अमेरिका की दिग्गज कंपनियों में पैसा लगाकर बैठे भारतीय निवेशकों के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसकी शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी. जिन शेयरों को वे लंबे समय से अपने पोर्टफोलियो में रखे हुए थे, वे अचानक बिक गए. Apple, Nvidia, Amazon, Tesla, Alphabet और AMD जैसी कंपनियों के शेयर बेच दिए गए और उस पैसे से एक ऐसी चीनी कंपनी के शेयर खरीद लिए गए, जिसका नाम ज्यादातर निवेशकों ने शायद पहले सुना भी नहीं था. कंपनी का नाम है Zhibao Technology Inc. और इसका शेयर अमेरिकी बाजार Nasdaq पर ZBAO नाम से कारोबार करता है.
मनी कंट्रोल की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक- यह पूरा मामला बेंगलुरु की फिनटेक कंपनी Stockal Securities से जुड़ा है. करीब 30 निवेशकों ने आरोप लगाया है कि 15 अक्टूबर को उनके ट्रेडिंग अकाउंट में बिना अनुमति लेनदेन किए गए. उनके अमेरिकी शेयर बेचकर चीनी कंपनी के लाखों शेयर खरीद लिए गए. निवेशकों का दावा है कि इससे उन्हें 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ.
सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि शेयर किसने बेचे. सवाल ये है कि निवेशकों के खाते तक किसी की पहुंच कैसे बनी? एक ही दिन में पूरा पोर्टफोलियो कैसे बदल गया? और जब गड़बड़ी का पता चला तो निवेशकों को समय पर सूचना क्यों नहीं मिली?
पहले समझिए Stockal क्या है, इसमें पैसा कैसे लगता है?
भारत में रहने वाला कोई निवेशक अगर Apple, Nvidia, Amazon या Tesla जैसी अमेरिकी कंपनियों के शेयर खरीदना चाहता है तो उसके पास कई रास्ते हैं. Stockal भी ऐसा ही एक प्लेटफॉर्म है, जो भारतीय निवेशकों को अमेरिकी शेयर, ETF और दूसरे विदेशी निवेश विकल्पों तक पहुंच देता है.
यानी आपको अमेरिका में जाकर बैंक खाता खोलने या वहां किसी ब्रोकर के ऑफिस जाने की जरूरत नहीं होती. आप भारत से ही प्लेटफॉर्म के जरिए पैसे जमा कर सकते हैं, अमेरिकी शेयर खरीद सकते हैं और अपने पोर्टफोलियो पर नजर रख सकते हैं.
Stockal का मुख्यालय बेंगलुरु में है. यह भारतीय प्रतिभूति बाजार नियामक सेबी के साथ रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म है. अमेरिकी बाजार में ट्रेड को पूरा करने और निवेशकों की संपत्ति की कस्टडी के लिए यह DriveWealth LLC जैसे अमेरिकी क्लियरिंग ब्रोकर के साथ काम करता है.
मान लीजिए आप भारत में किसी ऐप के जरिए अमेरिका की कंपनी का शेयर खरीदते हैं. ऐप आपको खरीद-बिक्री की सुविधा देता है, जबकि ट्रेड को पूरा करने और शेयरों को रखने की व्यवस्था में अमेरिकी ब्रोकर की भूमिका हो सकती है.
यानी इस व्यवस्था में कई कंपनियां शामिल होती हैं. Stockal निवेशक और अमेरिकी बाजार के बीच एक कड़ी का काम करता है. DriveWealth ट्रेडिंग और कस्टडी से जुड़ी सेवाएं देता है. इसलिए जब कोई गड़बड़ी होती है तो यह समझना जरूरी हो जाता है कि किस स्तर पर चूक हुई.
15 अक्टूबर को आखिर हुआ क्या?
एक निवेशक ने बताया कि उसके पोर्टफोलियो में Apple, Tesla, Amazon, Alphabet, Nvidia और AMD समेत 10 बड़ी अमेरिकी कंपनियों के शेयर थे. इन सभी को बेच दिया गया.
इन शेयरों की बिक्री से करीब 3,35,768 डॉलर मिले. इसके बाद इसी रकम से Zhibao Technology के 3 लाख शेयर खरीदने का ऑर्डर लगाया गया. खरीदारी औसतन 1.05 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर हुई.
किसी निवेशक ने Apple और Nvidia जैसे शेयर खरीदे हों तो वह अचानक अपना पूरा पोर्टफोलियो बेचकर एक कम कारोबार वाली चीनी कंपनी में पैसा क्यों लगाएगा? निवेशकों का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था.
3 लाख शेयर खरीदने के बाद 60% तक टूट गया भाव
निवेशक के मुताबिक, उसके अमेरिकी शेयर बेचकर Zhibao Technology के शेयर खरीद लिए गए. लेकिन यह कंपनी Apple या Nvidia जैसी बड़ी और ज्यादा कारोबार वाली कंपनी नहीं है. इसके शेयरों में कारोबार सीमित रहता है. शेयर बाजार की भाषा में इसे Thinly Traded Stock कहा जाता है.
ऐसे शेयरों में खरीदने और बेचने वाले कम हो सकते हैं. इसलिए बड़ी संख्या में शेयर खरीदना या बेचना मुश्किल हो सकता है. कीमत में तेज उतार-चढ़ाव भी आ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 23 अक्टूबर तक Zhibao Technology का शेयर करीब 60 फीसदी गिरकर 0.42 डॉलर पर बंद हुआ. यानी जिस कीमत पर निवेशक के खाते में शेयर खरीदे जाने का आरोप है, उसके मुकाबले भाव काफी नीचे आ गया.
एक दूसरे निवेशक ने दावा किया कि उसके खाते से करीब 31 लाख डॉलर यानी लगभग 29 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए गए. इसके बाद 30.5 लाख शेयर Zhibao Technology के खरीद लिए गए. उनका कहना है कि पूरा पोर्टफोलियो महज दो मिनट में बेच दिया गया और नए शेयरों की खरीदारी करीब 15 मिनट में पूरी हुई.
निवेशकों को पता कैसे चला?
इस मामले में निवेशकों की सबसे बड़ी शिकायत सिर्फ शेयरों की बिक्री नहीं, बल्कि सूचना देने में हुई कथित देरी भी है. एक निवेशक ने Moneycontrol को बताया कि पहले जब वह सामान्य तरीके से शेयर खरीदता या बेचता था, तो उसे ईमेल के जरिए ट्रेड की जानकारी मिलती थी. लेकिन 15 अक्टूबर को उसके पोर्टफोलियो में बड़े पैमाने पर हुई बिक्री और Zhibao Technology की खरीद के लिए उसे वैसी अलग-अलग पुष्टि या चेतावनी नहीं मिली.
उसके मुताबिक, 18 अक्टूबर को Stockal की पैरेंट कंपनी Borderless ने उससे संपर्क किया. कंपनी ने 15 अक्टूबर को संदिग्ध अकाउंट गतिविधि की बात स्वीकार की और बताया कि DriveWealth ने अकाउंट पर गतिविधियां सीमित कर दी हैं.
यानी निवेशक के आरोप के मुताबिक, जिस दिन ट्रेड हुए और जिस दिन उसे संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिली, उनके बीच तीन दिन का अंतर था. इस देरी और सामान्य ट्रेड अलर्ट नहीं मिलने को लेकर निवेशक ने सवाल उठाए हैं.
Stockal ने क्या सफाई दी?
Stockal ने Moneycontrol को भेजे ईमेल में कहा कि मामला जांच के अधीन है. कंपनी के मुताबिक, शुरुआती जानकारी से ऐसा लग रहा है कि ग्राहक का ईमेल अकाउंट और उससे जुड़े लॉगिन क्रेडेंशियल सोशल इंजीनियरिंग या फिशिंग के जरिए किसी के हाथ लग गए हों.
फिशिंग में ठग किसी फर्जी ईमेल, लिंक, वेबसाइट या संदेश के जरिए व्यक्ति से उसकी निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं. सोशल इंजीनियरिंग में लोगों को झांसे में लेकर उनसे पासवर्ड या दूसरी गोपनीय जानकारी निकलवाई जाती है.
Stockal का कहना है कि अब तक की जांच में उसे अपने प्लेटफॉर्म में सेंधमारी का कोई सबूत नहीं मिला है. लेकिन निवेशकों का सवाल है कि अगर किसी का ईमेल या लॉगिन किसी दूसरे के हाथ लग भी गया था, तो इतनी बड़ी रकम के शेयर बेचने और एक कम कारोबार वाली कंपनी में लगाने से पहले अतिरिक्त सुरक्षा जांच क्यों नहीं हुई?
DriveWealth ने Stockal पर डाल दी जिम्मेदारी
इस मामले में Stockal के साथ काम करने वाली अमेरिकी कंपनी DriveWealth का जवाब भी सामने आया है. 30 अक्टूबर को DriveWealth ने एक प्रभावित निवेशक को लिखे पत्र में कहा कि अनधिकृत तीसरे पक्ष की पहुंच Stockal के इंटरफेस के जरिए हुई थी. कंपनी ने अपने ऊपर जिम्मेदारी लेने से इनकार करते हुए कहा कि Stockal के प्लेटफॉर्म की सुरक्षा में हुई किसी भी चूक की जिम्मेदारी Stockal की है.
DriveWealth के मुताबिक, 15 अक्टूबर के आसपास हुई घटना की जानकारी मिलने के बाद Stockal ने उसे निवेशक का अकाउंट फ्रीज करने के लिए कहा था. इसके बाद अकाउंट में आगे की गतिविधियां रोक दी गईं. लेकिन DriveWealth के पत्र में एक और गंभीर बात कही गई. कंपनी का दावा है कि उसने Stockal को कई बार चेतावनी दी थी कि सिर्फ अकाउंट फ्रीज करने से निवेशक का बाजार जोखिम खत्म नहीं होगा, क्योंकि खाते में अवैध तरीके से खरीदे गए शेयर अब भी मौजूद थे.