ये कैसा मजाक…चार्जशीट दाखिल नहीं हुई तो खत्म हुआ हाजीपुर के लेखपाल का निलंबन, फिर हुई बहाली

ये कैसा मजाक…चार्जशीट दाखिल नहीं हुई तो खत्म हुआ हाजीपुर के लेखपाल का निलंबन, फिर हुई बहाली


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Hajipur Accountant Reinstatement: हाजीपुर नगर परिषद के लेखपाल मनीष कुमार को आय से अधिक संपत्ति के मामले में EOU की छापेमारी के बाद निलंबित किया गया था. 16 जून 2026 को उनके आवास और नगर परिषद कार्यालय पर कार्रवाई हुई थी. EOU के अनुसार, उनके पास 2.02 करोड़ रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति का प्रथमदृष्टा साक्ष्य मिला था. तीन महीने बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर नगर परिषद ने उनका निलंबन वापस ले लिया. 18 सितंबर को जारी आदेश के बाद उन्हें फिर प्रधान सहायक-सह-लेखपाल के पद पर बहाल कर दिया गया.

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EOU केस में निलंबित लेखापाल की बहाली

हाजीपुर: बिहार के हाजीपुर नगर परिषद के लेखपाल मनीष कुमार से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के मामले में नया मोड़ सामने आया है. आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU की कार्रवाई के बाद निलंबित किए गए मनीष कुमार का निलंबन अब खत्म कर दिया गया है. उन्हें फिर से उसी पद पर योगदान करने का आदेश दिया गया है. यह आदेश हाजीपुर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने 18 सितंबर 2026 को जारी किया है.

आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई
मनीष कुमार के खिलाफ 16 जून 2026 को आर्थिक अपराध इकाई ने कार्रवाई की थी. EOU ने उनके बागमली स्थित आवास और नगर परिषद कार्यालय पर छापेमारी की थी. यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई थी. EOU के अनुसार, सत्यापन के दौरान मनीष कुमार के पास उनकी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति होने के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले थे.

आय से अधिक संपत्ति अर्जित
आर्थिक अपराध इकाई के मुताबिक, मनीष कुमार के खिलाफ 2 करोड़ 2 लाख 31 हजार 500 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिला. यह राशि उनकी ज्ञात आय से करीब 208.57 प्रतिशत अधिक बताई गई. तलाशी के दौरान 50 हजार रुपये नकद मिले थे. करीब साढ़े छह लाख रुपये के आभूषण भी बरामद किए गए थे. इसके अलावा वाहन, जमीन और एलआईसी से जुड़े दस्तावेज भी मिलने की बात EOU ने कही थी.

विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई
इस कार्रवाई के बाद EOU थाना कांड संख्या 10/26 दर्ज किया गया था. मामला दर्ज होने और जांच लंबित रहने के कारण मनीष कुमार को निलंबित कर दिया गया था. उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू की गई थी. इसके बाद करीब तीन महीने तक वह निलंबित रहे. अब तीन महीने पूरे होने के बाद मनीष कुमार ने निलंबन वापस लेने का अनुरोध किया.

आपराधिक जांच अभी भी लंबित
नगर परिषद ने इस मामले में अपने विधि परामर्शी से राय ली. विधि परामर्श में सुप्रीम कोर्ट के 2015 के अजय कुमार चौधरी बनाम भारत संघ मामले के फैसले का हवाला दिया गया. इसमें निलंबन की अवधि और तीन महीने के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं होने की स्थिति को लेकर कानूनी पहलुओं का उल्लेख किया गया है. नगर परिषद के आदेश में कहा गया है कि मनीष कुमार के खिलाफ आपराधिक जांच अभी लंबित है. इस मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है. इसी आधार पर 16 जून को जारी निलंबन आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया. इसके बाद मनीष कुमार को फिर से प्रधान सहायक-सह-लेखपाल के पद पर बहाल कर दिया गया है.

EOU की जांच अभी जारी
आदेश में वर्तमान में प्रभार संभाल रहे मनोज कुमार आर्य को भी निर्देश दिया गया है. उन्हें एक सप्ताह के भीतर संबंधित शाखा का प्रभार मनीष कुमार को सौंपना होगा. इसमें अभिलेख, पंजी, रोकड़ बही और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल हैं. इस पूरे मामले में EOU की जांच अभी जारी है. मनीष कुमार के खिलाफ लगाए गए आय से अधिक संपत्ति के आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी. फिलहाल नगर परिषद के आदेश के बाद वह फिर से अपने पुराने पद पर काम करेंगे.



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