ममता बनर्जी आउट, राहुल गांधी इन… बस यूपी और पंजाब चुनाव निकाल लें तो चमक जाएगा इंडिया गठबंधन में चेहरा

ममता बनर्जी आउट, राहुल गांधी इन… बस यूपी और पंजाब चुनाव निकाल लें तो चमक जाएगा इंडिया गठबंधन में चेहरा


अभी इसे शुरुआत ही कहा सकता है, लेकिन फिलहाल इतना साफ है कि इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) के सहयोगी दल राहुल गांधी को विपक्ष के चेहरे के रूप में स्वीकार करने को तैयार नजर आ रहे हैं. यह 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले के उस दौर से बिल्कुल अलग स्थिति है, जब INDIA गठबंधन का गठन हुआ था. उस समय गठबंधन के नेतृत्व और उसके चेहरे को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया था और इस मुद्दे को लगातार टाल दिया गया था.

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ही विपक्षी गठबंधन के भीतर ऐसे चेहरे की तलाश शुरू हो गई थी, जिसे विपक्ष की अगुवाई सौंपी जा सके. उस समय ज्यादातर नेताओं की नजर ममता बनर्जी पर जाकर ठहरी थी. लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद ममता बनर्जी की दावेदारी कमजोर पड़ गई है और राहुल गांधी ने उस जगह को हासिल कर लिया. हालांकि, गठबंधन के सहयोगी दल अभी भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं और इंतजार कर रहे हैं कि आगे क्या होता है.

अगर कांग्रेस पंजाब और उत्तर प्रदेश के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है, तो संभव है कि तीसरे मोर्चे की कवायद शुरू हो जाए. इस तीसरे मोर्चे में ऐसे राजनीतिक दल शामिल हो सकते हैं, जो बीजेपी और कांग्रेस दोनों के विरोधी हैं. हालांकि, यह आगे की बात है.

फिलहाल सहयोगी दल इस बात को समझ रहे हैं कि बीजेपी की तरह कांग्रेस भी देशभर में मौजूदगी रखने वाली प्रमुख पार्टी है. विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है, जिसकी राजनीतिक पहुंच कई राज्यों तक है. इसी वजह से सहयोगी दल फिलहाल राहुल गांधी और कांग्रेस को आगे रखकर चलने के लिए तैयार हैं. हालांकि, वे अभी भी वेट एंड वॉच की रणनीति पर ही चल रहे हैं.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि राहुल गांधी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भरने में कामयाब रहे हैं. उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि पार्टी की राज्य और जिला इकाइयां सक्रिय रहें और रामलीला मैदान में हुई रैली को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत लगाएं. पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता और भीड़ जुटाने की क्षमता इस आयोजन में साफ दिखाई दी.

राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनाव जीतने की है. पंजाब और उत्तर प्रदेश के चुनाव उनके लिए बेहद अहम होंगे. सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी रैली के लिए जिस तरह भीड़ जुटाने में सफल रहे, उसी तरह पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव के मैदान में भी सक्रिय कर पाएंगे?

विधानसभा चुनाव में अभी करीब तीन महीने ही बचे हैं, तो माना जा रहा है कि कांग्रेस और राहुल गांधी को अब पूरी तरह चुनावी मोड में आ जाना चाहिए.

राहुल गांधी पर सिर्फ बीजेपी की ही नजर नहीं है, बल्कि उनके गठबंधन के सहयोगी दल भी उनके प्रदर्शन को बारीकी से देख रहे हैं. वे यह समझना चाहते हैं कि सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान दिखाई देने वाला जोश क्या वोटिंग के दिन भी नजर आएगा? क्या रैलियों और आंदोलनों में जुटने वाली भीड़ को कांग्रेस वोटों में बदल पाएगी?

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