भारत को UNSC की स्थायी सदस्यता दिलाने की मांग एक बार फिर वैश्विक मंच पर तेज हो गई है. कई यूरोपीय देशों ने भारत की दावेदारी का समर्थन करते हुए कहा है कि बदलती दुनिया में भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में जगह मिलनी चाहिए. पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य जैसे यूरोपियन देशों ने भारत की स्थायी सीट की मांग का समर्थन किया है. भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र की ‘उभरती महाशक्ति’ है और यही कहते हुए चारों देशों ने भारत को UNSC में स्थायी सदस्य के तौर पर जगह देने की तरफदारी की है. दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी सोमवार को कहा कि ‘सुरक्षा परिषद’ में बदलाव बेहद जरूरी हैं क्योंकि वर्तमान सुरक्षा परिषद मूल रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के समय की दुनिया का प्रतिनिधित्व करती है. अहम सवाल है कि आखिर भारत को UNSC की स्थायी सदस्यता क्यों मिलनी चाहिए? क्या वो पहलू हैं जो भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दिलाने में बेहद अहम हैं?
सबसे पहले तो ये समझने की जरूरत है कि 1945 में बनी ये संस्था आज के बदले हुए दुनिया के समीकरण और वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं कर रही है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र सबसे शक्तिशाली अंगों में से एक है. इसका काम अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है. आज दुनिया में जो हालात हैं, इतने युद्ध चल रहे हैं, ऐसे में इस काउंसिल का हिस्सा बनना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी.
यूएनएससी में सुधार को लेकर हो रही देरी पर भारत ने तल्ख टिप्पणमी की. (फाइल फोटो)
क्या भारत को अभी UNSC की स्थायी सदस्यता मिली है?
नहीं, भारत अभी UNSC का स्थायी सदस्य है. युनाइटेड नेशंस की इस सिक्योरिटी काउंसिल में कुल 15 सदस्य होते हैं, 5 परमानेंट यानी स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जो हर 2 साल में बदलते रहते हैं. भारत इस काउंसिल का अभी तक 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है. भारत आखिरी बार 2021 और 2022 में इसका सदस्य बना था. पर भारत इस संस्था में स्थायी जगह चाहता है और कई देश भारत की इस मांग के साथ खड़े भी हैं. अभी इस संस्था में 5 स्थायी सदस्यों में अमेरिका, चीन, रूस, युनाइटेड किंगडम और फ्रांस हैं. इन स्थायी सदस्यों की सबसे बड़ी ताकत है ‘वीटो पावर’. इस पावर से कोई भी सदस्य काउंसिल में पास होने वाले अहम प्रस्तावों को रोक सकता है.
भारत को UNSC की स्थायी सदस्यता क्यों मिलनी चाहिए?
सबसे पहली बात तो ये कि UNSC की स्थायी सदस्यता पाने वाले पांच देश (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस) द्वितीय विश्व युद्ध के विजेता थे. 1945 में बनी इस संस्था को अब 80 से भी ज्यादा साल हो गए हैं, लेकिन यहां के समीकरण अब भी वही हैं. जबकि दुनिया पूरी तरह बदल गई है. भारत आज दुनिया के पावर चार्ट में सबसे अहम देशों में से एक है. दूसरी तरफ इस संस्था में अभी ग्लोबल साउथ की आवाज कहीं दब रही है. जबकि भारत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों को स्थायी प्रतिनिधित्व दिलाने की वकालत करता है, ताकि ग्लोबल साउथ की आवाज फैसलों में शामिल हो.
UNSC की स्थायी सदस्यता मिलने पर भारत को क्या फायदे होंगे?
- वीटो पावर
- वैश्विक निर्णयों में भूमिका
- कूटनीतिक प्रभाव
- चीन को संतुलित करने की क्षमता
UNSC की स्थायी सदस्यता के लिए भारत सबसे मजबूत दावेदार क्यों है?
भारत आज वैश्विक पटल पर यूएन सिक्योरिटी काउंसिल का सबसे मजबूत दावेदार है. आज हम दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश हैं. ऐसे में इतनी बड़ी जनशक्ति को इस काउंसिल में आवाज मिलनी चाहिए. साथ ही 4.15 ट्रलियन डॉलर जीडीपी के साथ हम दुनिया की प्रमुख और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं. इसके अलावा भारत 1948 से ही संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भरपूर योगदान देता रहा है और 3 लाख से ज्यादा लोग इन अभियानों का हिस्सा हैं. अब भी दुनिया के 10 से ज्यादा शांति अभियानों में भारत के 4300 से ज्यादा कर्मी तैनात हैं.
भारत की UNSC स्थायी सदस्यता का समर्थन कौन-कौन कर रहा है?
भारत के समर्थन की सबसे ताजी गूंज वी4 देशों से आई है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत और यूरोप के विसेग्राद समूह (V4) के चार देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई. इसमें चारों देशों ने भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया है. इसके साथ ही भारत को उभरती महाशक्ति माना. इन 4 देशों में पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य शामिल हैं. स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने बैठक के बाद कहा, ‘हम सभी V4 देश इस बात पर सहमत हैं कि ग्लोबल साउथ का हिस्सा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की उभरती महाशक्ति भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के तौर पर मेज पर होना चाहिए.’ इसके अलावा अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे दर्जनो देश भारत का समर्थन करते रहे हैं. ब्राजील और जर्मनी भी उन देशों में हैं, जो भारत के प्रयासों का समर्थन करते हैं.
‘आने वाली महाशक्ति’: यूरोप के चार V4 देशों ने UNSC में भारत की स्थायी सीट की दावेदारी का समर्थन किया
बेहद जरूरी हैं सुरक्षा परिषद का ‘नई दुनिया’ के अनुसार बनना
भारत की इस संस्था में स्थायी सदस्यता की दावेदारी इसलिए भी और मजबूत हो जाती है क्योंकि वर्तमान स्थायी सदस्य शांति के बजाए खुद युद्धों का हिस्सा बन रहे है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी सोमवार को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि युद्धों के लगातार जारी रहने से विश्व की स्थिति बिगड़ती जा रही है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ते भू-राजनीतिक विभाजन ने यूएन की इस सुरक्षा परिषद को पंगु बना दिया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में महासचिव के रूप में अपने अंतिम भाषण से ठीक पहले, गुटेरेस ने कहा युद्धों में “महाशक्तियों” और सुरक्षा परिषद के प्रमुख सदस्यों के हस्तक्षेप ने अंतरराष्ट्रीय कानून के लगातार उल्लंघन के कारण एक बड़ा संकट पैदा कर दिया है. पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री गुटेरेस 31 दिसंबर, 2026 तक इस पद पर हैं. ऐसे में साफ है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज़ और प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र को सुधारों की सख्त जरूरत है. खुद गुटेरेस का कहना है कि सबसे जरूरी है कि ‘सुरक्षा परिषद’ में बदलाव हों क्योंकि वर्तमान सुरक्षा परिषद मूल रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के समय की दुनिया का प्रतिनिधित्व करती है.
सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सीट के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में बदलाव की जरूरत होगी. बदलाव की यह प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र महासभा के व्यापक समर्थन और मौजूदा स्थायी सदस्यों के बीच सहमति पर निर्भर करती है. भारत की UNSC की स्थायी सदस्यता की मांग सिर्फ भारत की नहीं बल्कि वैश्विक प्रतिनिधित्व की बहस का हिस्सा बन चुकी है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव का ये ताजा बयान बताता है कि इस संस्था को बदलाव की और भारत जैसी उभरती हुई शक्ति को स्थायी सीट देने की कितनी अहम जरूरत है. दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और शांति अभियानों में योगदान के आधार पर भारत खुद को UNSC की स्थायी सदस्यता का मजबूत दावेदार मानता है.