सूरज जितनी ऊर्जा पूरी जिंदगी में बनाता, उतनी 4 मिनट के भीतर दो महाविस्फोटों में बाहर निकली! नासा के उड़े होश

सूरज जितनी ऊर्जा पूरी जिंदगी में बनाता, उतनी 4 मिनट के भीतर दो महाविस्फोटों में बाहर निकली! नासा के उड़े होश


ब्रह्मांड के सुदूर कोने से आए एक रहस्यमय संदेश ने दुनिया भर के खगोलविदों की नींद उड़ा दी है. अंतरिक्ष में बिग बैंग के बाद होने वाले सबसे शक्तिशाली विस्फोटों को गामा-रे बर्स्ट यानी जीआरबी कहा जाता है. ये विस्फोट इतने ज्यादा विनाशकारी होते हैं कि पलक झपकते ही किसी भी ग्रह को भस्म कर सकते हैं. पहली बार ऐसा हुआ है जब दो बिल्कुल अलग प्रकृति के गामा-रे बर्स्ट केवल चार मिनट के अंतराल पर एक ही जगह से निकलते देखे गए. दूसरे धमाके में जितनी ऊर्जा निकली, उतनी तो हमारा सूर्य पूरी जिंदगी में नहीं बना पाएगा. वैज्ञानिकों ने इस ऐतिहासिक घटना को ‘जीआरबी 160425ए’ नाम दिया है.

ब्रह्मांड में गामा-रे बर्स्ट का जन्म कैसे होता है और ये कितने प्रकार के होते हैं?

गामा-रे बर्स्ट असल में अंतरिक्ष में होने वाले सबसे प्रचंड और चमकदार रेडिएशन के विस्फोट माने जाते हैं. जब कोई विशालकाय तारा अपनी उम्र पूरी करके ढह जाता है, तब इस तरह के महाविस्फोट जन्म लेते हैं.

अब तक खगोल विज्ञान में जीआरबी को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाता रहा है.

  1. पहली श्रेणी को ‘शॉर्ट-ड्यूरेशन जीआरबी’ कहा जाता है. ये विस्फोट दो सेकंड से भी कम समय के लिए रहते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के छोटे विस्फोट न्यूट्रॉन तारों या ब्लैक होल की आपसी भीषण टक्कर से पैदा होते हैं.
  2. दूसरी श्रेणी ‘लॉन्ग-ड्यूरेशन जीआरबी’ की होती है. ये विस्फोट दो सेकंड से लेकर कई मिनटों तक चलते हैं. आमतौर पर यह घटना सुपरनोवा के दौरान होती है, जब सूरज से दर्जनों गुना बड़ा कोई भारी तारा ढहकर खत्म होता है.
    दोनों ही प्रक्रियाएं अंतरिक्ष के बिल्कुल अलग-अलग नियमों पर काम करती हैं.

5.5 अरब साल का सफर तय करके पृथ्वी तक कैसे पहुंचा यह दोहरा धमाका?

नासा की अंतरिक्ष में तैनात ‘नील गेहर्ल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी’ ने इस असाधारण घटना को अपने सेंसर्स में कैद किया था. पृथ्वी का वायुमंडल गामा किरणों को रोक लेता है, इसलिए इन्हें केवल अंतरिक्ष में मौजूद टेलीस्कोप ही पकड़ सकते हैं. यह विस्फोट जिस होस्ट गैलेक्सी में हुआ, वह दो आपस में विलीन हो रही आकाशगंगाओं का समूह लगती है. वह गैलेक्सी पृथ्वी से इतनी दूर है कि उसके प्रकाश को हमारे तक पहुंचने में करीब 5.5 अरब साल का लंबा वक्त लग गया.

इसका मतलब यह है कि यह महाविस्फोट हमारे सौरमंडल और पृथ्वी के जन्म से भी लगभग एक अरब साल पहले हुआ था. इस विस्फोट से निकली हाई-एनर्जी किरणें ब्रह्मांड के एक-तिहाई इतिहास का सफर तय करके हमारे उपकरणों तक पहुंची हैं.

चार मिनट के भीतर रिकॉर्ड किए गए दोनों धमाकों में क्या अंतर था?

  • इस घटना में वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा जिस बात ने हैरान किया, वह दोनों विस्फोटों का अनोखा स्वभाव था. पहला विस्फोट, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘जी1’ नाम दिया, केवल 1.7 सेकंड तक चला. इसकी ऊर्जा और अवधि साफ तौर पर दो तारों के टकराने वाले शॉर्ट-बर्स्ट से मेल खाती थी.
  • इसके ठीक चार मिनट बाद दूसरा विशाल धमाका हुआ, जिसे ‘जी2’ नाम दिया गया. यह दूसरा विस्फोट करीब 51.2 सेकंड तक चला, जो किसी मरते हुए तारे के लॉन्ग-बर्स्ट की निशानी था. अंतरिक्ष में पहली बार एक ही जगह से कुछ ही मिनटों में दो अलग-अलग घटनाओं का ऐसा मेल देखा गया.
  • यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के खगोल भौतिकविद और इस रिसर्च के मुख्य लेखक बिंग झांग ने कहा, ‘अब तक पूरे ब्रह्मांड में ऐसी विचित्र विशेषताओं वाली यह अकेली घटना है. पहली नजर में यह दो स्वतंत्र घटनाएं लग सकती हैं, लेकिन एक ही दिशा में और एक ही समय पर इनके होने की संभावना इतनी कम है कि हमें मानना पड़ेगा कि दोनों का उद्गम एक ही है.’

5 अरब साल पहले फटे थे दो अलग-अलग तारे, अंतरिक्ष के इस अनोखे रहस्य ने विज्ञान को हिलाकर रख दिया. (Video : AI Generated)

सूरज की पूरी जिंदगी से भी ज्यादा ऊर्जा इन चार मिनटों में कैसे बाहर निकली?

गामा-रे बर्स्ट अंतरिक्ष में अपनी ऊर्जा को किसी लेजर बीम की तरह बेहद केंद्रित दिशा में छोड़ते हैं. यदि गणितीय हिसाब से बीम के प्रभाव को एक तरफ रखकर सीधी ऊर्जा का आकलन करें, तो पहला छोटा विस्फोट ही अरबों सालों की सौर ऊर्जा के बराबर था. वहीं दूसरा विस्फोट उससे भी तीन गुना ज्यादा भयानक साबित हुआ. प्रोफेसर बिंग झांग के अनुसार हमारा सूरज अपने पूरे जीवनकाल में जितनी ऊर्जा पैदा करेगा, वह पूरी ऊर्जा भी इस दूसरे विस्फोट के बराबर नहीं पहुंच सकती. इतनी भयानक और अकूत ऊर्जा का केवल चार मिनट के शांत अंतराल के बाद दोबारा फूटना खगोल भौतिकी के लिए एक पहेली बन चुका है.

क्या महज एक अजूबा संयोग था यह विस्फोट?

इस रहस्य को समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने पांच अलग-अलग थ्योरी पर गहराई से विचार किया है.

  1. पहली संभावना यह मानी गई कि शायद दो अलग-अलग आकाशगंगाओं में यह विस्फोट अलग-अलग समय पर हुआ हो. दोनों विस्फोटों की किरणें अंतरिक्ष में एक साथ पृथ्वी की तरफ घूम गईं और चार मिनट के फर्क से हमें दिखाई दीं. हालांकि वैज्ञानिकों के गणितीय कैलकुलेशन के अनुसार किसी एक पल में आकाश के एक हिस्से में ऐसा संयोग होने की संभावना 10 खरब में केवल 2 बार की होती है. स्विफ्ट टेलीस्कोप के वर्षों के डेटा को मिलाने के बाद भी ऐसी संभावना एक लाख में एक या एक करोड़ में एक ही बैठती है. यानी इस बात की उम्मीद न के बराबर है कि यह केवल एक इत्तेफाक था.
  2. दूसरी थ्योरी यह पेश की गई कि दोनों विस्फोट एक ही गैलेक्सी के भीतर लेकिन अलग-अलग स्थानों पर हुए हों. वैज्ञानिकों ने जब इसका प्रोबेबिलिटी एनालिसिस किया, तो आंकड़े और भी ज्यादा चौंकाने वाले निकले. ऐसा होने की संभावना 100 खरब में 8 से लेकर 10 खरब में 8 के बीच पाई गई. इसे सरल भाषा में समझने के लिए कल्पना करें कि आपके पास 100 खरब दिनों का एक कैलेंडर है. यह समय 27 अरब साल से भी ज्यादा है, जो पूरे ब्रह्मांड की मौजूदा उम्र से लगभग दोगुना है. इतने बड़े कैलेंडर में से यदि दो दोस्त बिना बात किए एक ही तारीख पर डिनर का समय चुन लें, तो उसकी संभावना जितनी कम होगी, उतना ही कम संयोग इस विस्फोट का था. इसलिए वैज्ञानिकों ने इस थ्योरी को भी लगभग खारिज कर दिया.
  3. तीसरी संभावना यह देखी गई कि क्या यह किसी न्यूट्रॉन तारे के टकराने का दुर्लभ रूप था, जिसमें मुख्य धमाके के बाद पीछे एक कमजोर पूंछ जैसी किरण निकलती है. लेकिन चार मिनट का बिल्कुल शांत अंतराल और दूसरे धमाके की भयानक ताकत इस थ्योरी को भी गलत साबित कर देती है.
  4. चौथा अनुमान यह लगाया गया कि क्या किसी विशाल तारे ने ढहने से ठीक पहले कोई छोटी चेतावनी दी थी. जैसे कोई मरता हुआ तारा अपने अंदर का भारी मलबा अंतरिक्ष में फेंकने से पहले एक छोटी डकार जैसी गैस बाहर निकाले. हालांकि वैज्ञानिक गणना बताती है कि इस तरह की प्रक्रिया में पहला धमाका इतना ज्यादा तेज और केंद्रित नहीं हो सकता.
  5. पांचवीं और सबसे दिलचस्प व्याख्या यह मानी जा रही है कि यह दोनों विस्फोट एक ही जटिल सिस्टम से जुड़े हुए थे. हो सकता है कि किसी एक सिस्टम के भीतर कई तारे और ब्लैक होल एक साथ मौजूद रहे हों. वहां किसी ऐसे अज्ञात भौतिक तंत्र ने जन्म लिया, जिसने ब्रह्मांड की दो सबसे भयानक घटनाओं को एक धागे में पिरो दिया.

बिंग झांग ने स्वीकार किया, ‘यही सबसे कठिन हिस्सा है क्योंकि हमारे पास उपलब्ध वैज्ञानिक संभावनाएं अब खत्म हो चुकी हैं. हर संभावित परिदृश्य में भारी सैद्धांतिक अड़चनें हैं. दो दशकों से अधिक समय से जीआरबी पर रिसर्च कर रहे एक थ्योरिस्ट के रूप में इस घटना ने मुझे वास्तव में झकझोर कर रख दिया है.’

यह खोज साफ करती है कि इंसान भले ही तकनीक के दम पर अंतरिक्ष के अरबों प्रकाश वर्ष दूर तक झांकने लगा हो, लेकिन कुदरत के पास आज भी ऐसे कई राज हैं जो इंसानी समझ से परे हैं.



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