Tax on Petrol-Diesel : डीजल पर बढ़ाया विंडफाल टैक्स, पेट्रोल पर शून्य कर दिया, आपकी जेब पर क्या असर?

Tax on Petrol-Diesel : डीजल पर बढ़ाया विंडफाल टैक्स, पेट्रोल पर शून्य कर दिया, आपकी जेब पर क्या असर?


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Tax on Petrol-Diesel : घरेलू बाजार से डीजल को निर्यात होने से रोकने के लिए सरकार ने विंडफाल टैक्स बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. इसके अलावा हवाई ईंधन पर भी टैक्स बढ़ा दिया गया है, लेकिन पेट्रोल पर विंडफाल टैक्स घटाकर शून्य कर दिया है. विंडफाल टैक्स घरेलू बाजार में तेल की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए लगाया जाता है और सरकार ने पहली बार इसे ईरान युद्ध शुरू होने के बाद लगाया था.

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सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन पर विंडफाल टैक्स बढ़ा दिया है.

नई दिल्ली. सरकार ने 31 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर यानी विंडफाल टैक्स बढ़ा दिया और पेट्रोल पर इस शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया है. वित्त मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि इस पखवाड़े एटीएफ के निर्यात के लिए शुल्क को 10.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. डीजल के निर्यात पर सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर के साथ ही विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क की दर अब 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 11.5 रुपये प्रति लीटर होगी.

मंत्रालय ने बताया कि अगले पखवाड़े के लिए पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क को 2.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है. इसका मतलब है कि जहां डीजल और एटीएफ पर विंडफाल टैक्स बढ़ाया गया है, वहीं पेट्रोल पर इसे खत्म कर दिया गया. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने 27 मार्च को डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क लगाया था और हर पखवाड़े इसमें संशोधन किया जाता है. बाद में 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी टैक्स लगाया गया था.

घरेलू बाजार पर क्या होगा असर
वित्त मंत्रालय ने यह भी बताया कि घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच ईंधन की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया था. इसका मतलब है कि टैक्स का असर सिर्फ उसी डीजल पर पड़ेगा जो देश के बाहर निर्यात किया जाता है. इसी तरह, निर्यात किए जाने वाले एटीएफ पर भी टैक्स का असर दिखेगा.

क्यों लगाया जाता है विंडफाल टैक्स
सरकार देश के घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए इसके निर्यात पर टैक्स लगाती है, जिसे विंडफाल टैक्स कहा जाता है. डीजल की कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार ने इस पर विंडफाल टैक्स बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि पेट्रोल का उत्पादन बेहतर होने की वजह से इस पर टैक्स खत्म कर दिया और कंपनियों को निर्यात करने के लिए पूरी छूट दे दी है. हवाई ईंधन के निर्यात पर भी सरकार काबू पाना चाहती है. लिहाजा इस पर भी विंडफाल टैक्स बढ़ा दिया है.



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