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Mira Shahid Parenting Strategy: मीरा राजपूत और शाहिद कपूर दो बच्चों के माता-पिता है. मीरा 21 की उम्र में ही मां बन गयी थी. वैसे तो कम उम्र में मां बनना काफी महिलाओं के लिए मुश्किल भरा सफर होता है, लेकिन मीरा का अनुभव काफी अच्छा था और वो इस बारे में काफी खुश महसूस करती हैं. इसका कारण और पैरेंटिंग स्ट्रेटजी के बारे में आप यहां जान सकते हैं, जो आपके भी हेल्पफुल साबित हो सकती हैं.
मां बनने का अहसास बहुत खास होता है, लेकिन किसी भी एज में महिलाओं के लिए ये सफर आसान नहीं होता. कुछ महिलाएं 20 की उम्र में मां बनने का फैसला करती हैं, तो कुछ महिलाएं अपने करियर में सेटल होने के बाद 30-40 की उम्र में. हालांकि करियर ऑरिएंटेड महिलाओं के लिए कम उम्र में मां बनना कई बार ज्यादा उथल-पुथल स्थितियों से भरा होता है. बच्चे के साथ करियर को बनाना आसान नहीं है. ऐसे में पार्टनर का साथ बहुत जरूरी है.
शाहिद कपूर की पत्नी मीरा राजपूत ने हाल ही में करीना कपूर खान के पॉडकास्ट वाट वूमन वान्ट्स में बताया कि वो बच्चों के जिम्मेदारी शाहिद के साथ शेयर करती हैं. 21 की उम्र में ही वो प्रेग्नेंट हो गयी थी. साल 2016 में उनकी बेटी मीशा और 2018 में बेटे जैन का जन्म हुआ. लेकिन उन्हें इस बात का कोई पछतावा नहीं है. क्योंकि उनके पार्टनर परवरिश में अपना रोल बखूबी निभाते हैं. मीरा का अनुभव उन महिलाओं के लिए सीख हो सकता है, जो 20 की उम्र में मां बनने का फैसला करती हैं. (फोटो क्रेडिट- Insta @mira.kapoor)
पार्टनर का साथ बनाता है सफर आसान
करीना कपूर खान के चैट शो में मीरा राजपूत ने बताया कि मां बनने का हर पड़ाव चुनौतीपूर्ण होता है. बच्चों की परवरिश के दौरान कई बार महिलाएं खुद को थका हुआ और परेशान महसूस करती हैं. ऐसे समय में शाहिद का साथ उनके लिए काफी मददगार रहा. मीरा के मुताबिक, शाहिद ने हमेशा उनका साथ दिया और इस वजह से उन्हें अकेले सारी जिम्मेदारियां नहीं उठानी पड़ीं.
परिवार के अनुभव से मिली मदद
मीरा ने बताया कि उनकी दो बहनें पहले ही मां बन चुकी थीं. इसलिए उन्होंने बच्चों की परवरिश के बारे में उनसे काफी कुछ सीखा. मीरा ने कहा कि उन्होंने इस विषय पर एक भी किताब नहीं पढ़ी, बल्कि अपनी बहनों को बच्चों की देखभाल करते देखकर कई बातें समझीं. इससे उन्हें मां बनने के बाद आने वाली चुनौतियों का सामना करने में मदद मिली.
बच्चों की जिम्मेदारियां आपस में बांटें
मीरा के अनुसार, बच्चों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति पर नहीं डालनी चाहिए. उन्होंने बताया कि शाहिद बच्चों के खेलकूद और खानपान का ध्यान रखते हैं, जबकि वह उनके होमवर्क, बर्थडे पार्टी, क्लास और व्यवहार से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालती हैं. जरूरत पड़ने पर दोनों एक-दूसरे की मदद करते हैं.
गैरमौजूदगी में संभालते हैं एक-दूसरे की जिम्मेदारी
मीरा ने बताया कि जब उनमें से कोई एक काम के सिलसिले में बाहर जाता है, तो दूसरा बच्चों की जिम्मेदारी संभाल लेता है. इससे बच्चों की दिनचर्या प्रभावित नहीं होती और माता-पिता दोनों को अपने काम के लिए समय मिल जाता है.
बच्चों के साथ मजबूत रिश्ता बनाएं
मीरा को अपने बच्चों के साथ समय बिताना पसंद है. वह उनके बात करने के तरीके और भावनाओं को समझती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि जब बेटी मीशा 21 साल की होगी, तब उनकी उम्र 41 साल होगी. मीरा का अनुभव बताता है कि कम उम्र में मां बनने के साथ बच्चों के बड़े होने के सफर को करीब से देखना भी एक खास अनुभव हो सकता है.