‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द पर आचार्य प्रशांत को क्यों है आपत्ति? बताया आजादी के इतने साल बाद भी भारत क्यों है गरीब


Last Updated:

‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए प्रख्यात विचारक आचार्य प्रशांत ने कहा है कि धीमी जीडीपी को धर्म से जोड़ना पूरी संस्कृति का अपमान है. उन्होंने एक चर्चा के दौरान भारत की गरीबी का असली कारण आर्थिक नहीं बल्कि मानसिकता और सोच की कमी बताया है.

Top Deals Inside

'हिंदू ग्रोथ रेट' पर क्यों भड़के आचार्य प्रशांत? बताया भारत की गरीबी का सचZoom

अर्थव्यवस्था को धर्म के नाम पर दोष देना बंद होना चाहिए

भारतीय अर्थव्यवस्था, विकास दर और ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ (Hindu Growth Rate) जैसे शब्दों पर अक्सर बहस छिड़ती रहती है. हाल ही में इस विषय पर जाने-माने दार्शनिक और विचारक आचार्य प्रशांत ने न्‍यूज 18 के एक शो ‘कह के रहेगा कहने वाला’ के दौरान बेहद तीखे और स्पष्ट विचार रखे. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि धीमी जीडीपी (GDP) ग्रोथ को ‘हिंदू’ धर्म के साथ जोड़ना न सिर्फ गलत है, बल्कि यह देश की संस्कृति और धर्म का अपमान भी है. आइए विस्तार से जानते हैं कि आचार्य प्रशांत ने इस पूरी डिबेट और भारत की गरीबी के असली कारणों पर क्या कुछ कहा है.

‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द पर क्यों भड़के आचार्य प्रशांत?
आचार्य प्रशांत ने सबसे पहले उस टर्म पर आपत्ति जताई जिसे दशकों से भारतीय अर्थव्यवस्था की धीमी चाल के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. उन्होंने कहा,”ये जो ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द है, मुझे इस शब्द पर ही आपत्ति है. आप भारत की जो धीमी जीडीपी ग्रोथ थी, उसको ‘हिंदू’ से जोड़ रहे हैं. इसका मतलब क्या हुआ? कि हिंदुओं की वजह से ग्रोथ नहीं हो रही है? ये तो धर्म का अपमान हुआ.”

View this post on Instagram





Source link