Xi Jinping China Military Purge : जिनपिंग का अब तक का सबसे बड़ा ‘सैन्य सफाया’, चीन की टॉप मिलिट्री कमांड में बचे सिर्फ 2 लोग

Xi Jinping China Military Purge : जिनपिंग का अब तक का सबसे बड़ा ‘सैन्य सफाया’, चीन की टॉप मिलिट्री कमांड में बचे सिर्फ 2 लोग


चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी ही सेना और हुकूमत के भीतर एक ऐसा भयंकर भूचाल ला दिया है, जिसने दुनिया भर के डिफेंस एक्सपर्ट्स के होश उड़ा दिए हैं. बीजिंग में हुई कम्युनिस्ट पार्टी की 4 दिवसीय बैठक के बाद जो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, उन्हें इतिहास का सबसे बड़ा ‘सैन्य पर्ज’ यानी सफाया कहा जा रहा है. जिनपिंग ने पार्टी अनुशासन और भ्रष्टाचार की सफाई के नाम पर ऐसा ऐक्शन लिया है कि चीन की टॉप मिलिट्री कमांड में सिर्फ 2 लोग ही बचे हैं. जिनपिंग ने जिन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया है, वो कोई छोटा-मोटा नाम नहीं है बल्कि बड़े जनरल और डिफेंस इंडस्ट्री के दिग्गज चेहरे हैं.

जिनपिंग का ‘एंटी-करप्शन’ डंडा: इस बार निशाना सीधे टॉप कमांड पर

शी जिनपिंग जब से तीसरी बार सत्ता की कुर्सी पर बैठे हैं, तब से केंद्रीय समिति के सदस्यों पर गाज गिरने की रफ्तार बेहिसाब बढ़ चुकी है. ताजा फैसलों के बाद जिनपिंग के इस तीसरे कार्यकाल में अब तक कुल 51 सदस्यों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है. तुलना करें तो उनके पहले कार्यकाल में ऐसे 35 मामले सामने आए थे, जबकि दूसरे कार्यकाल में सिर्फ 5 लोगों पर गाज गिरी थी. इससे साफ पता चलता है कि जिनपिंग अपनी पार्टी और फौज के भीतर किसी भी तरह की सुगबुगाहट या असंतोष को बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं.

ये चार दिवसीय बैठक कितनी भयानक थी, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हांगकांग के ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल कमेटी के 205 पूर्ण सदस्यों में से सिर्फ 162 लोग ही बैठक में पहुंचे, यानी उपस्थिति महज 79 फीसदी रही. जिनपिंग के 14 साल के शासनकाल में ये पहला मौका है जब कुल उपस्थिति का आंकड़ा गिरकर 300 से नीचे यानी 279 पर आ गया है.

सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC): कभी 7 ताकतवर लोग थे, अब सिर्फ 2 बचे!

इस बार की कार्रवाई का सबसे बड़ा और सनसनीखेज हिस्सा चीन की टॉप मिलिट्री कमान यानी सेंट्रल मिलिट्री कमीशन पर गिरा है. ये वही ताकतवर आयोग है जो चीन की पूरी ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ (PLA) की कमान संभालता है और इसके मुखिया खुद शी जिनपिंग हैं.

  1. दिग्गज बाहर: बैठक के दौरान पूर्व सीएमसी उपाध्यक्ष झांग और पूर्व सीएमसी सदस्य लियू झेनली को पार्टी से आधिकारिक रूप से बर्खास्त कर दिया गया. ये दोनों लंबे वक्त से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच झेल रहे थे. बता दें कि झांग चीनी सेना के सबसे रसूखदार और वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते थे.
  2. बचे सिर्फ दो लोग: कभी 7 सदस्यों वाले इस सुपर-पॉवरफुल आयोग में अब केवल दो ही चेहरे बचे हैं, खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग और जनरल झांग शेंगमिन.
  3. जनरल झांग शेंगमिन वही हैं जो 2018 से इसी साल जुलाई तक सेना के एंटी-करप्शन विभाग को संभाल रहे थे. वफादारी के इनाम के तौर पर उन्हें हाल ही में पोलित ब्यूरो में प्रमोट किया गया है और वो जिनपिंग के सबसे करीबी सिपहसालार माने जाते हैं.
  4. सेना के साजो-सामान और खरीद-फरोख्त को संभालने वाले कई बड़े डायरेक्टरों को भी उनके पदों से हटा दिया गया है, जिससे पीएलए की पूरी टॉप लीडरशिप अंदर से थर्रा उठी है.

सिर्फ वर्दी वाले जनरल ही नहीं, डिफेंस इंडस्ट्री के बड़े राजा भी नप गए

ये सफाया सिर्फ सेना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चीन के हथियार और रक्षा-औद्योगिक तंत्र को चलाने वाले सिविलियन दिग्गजों को भी चुन-चुनकर साफ किया गया है.

जिन बड़े नामों पर गाज गिरी है, उनमें उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी के पूर्व मंत्री जिन जियांगलांग और लेई फैनपेई शामिल हैं. इसके अलावा, चीन की उन चार सबसे बड़ी सरकारी रक्षा कंपनियों के पूर्व प्रमुखों की बर्खास्तगी पर भी मुहर लग गई है, जो साल 2024 से ही अचानक रहस्यमय तरीके से जनता की नजरों से गायब हो गए थे.

  • यू जियानफेंग (चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉरपोरेशन के पूर्व चेयरमैन)
  • युआन जी (चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन के पूर्व चेयरमैन)
  • झांग झोंगजियांग (चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन के पूर्व जनरल मैनेजर)
  • वोन गैंग (चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन के पूर्व चेयरमैन)

इन दिग्गजों पर कार्रवाई करके बीजिंग ने साफ संदेश दे दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ये डंडा केवल छावनी तक नहीं, बल्कि हथियारों की फैक्ट्रियों तक पहुंच चुका है.

चीन की दलील: ‘हजारों को नाराज करना मंजूर, पर 1.4 अरब लोगों से धोखा नहीं’

बीजिंग में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीनी अधिकारियों ने इस बड़े राजनीतिक ‘ब्लड-बाथ’ का खुलकर बचाव किया. सेंट्रल कमीशन फॉर डिसिप्लिन इंस्पेक्शन के डिप्टी सेक्रेटरी झांग फुहाई ने सीना ठोकते हुए कहा कि पार्टी, देश और सेना के भीतर छिपे अंदरूनी खतरों को जड़ से उखाड़ फेंका गया है.

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, ‘हम हजारों लोगों को नाराज करना पसंद करेंगे, लेकिन 1.4 अरब देशवासियों को निराश नहीं होने देंगे’.

आंकड़ों की बात करें तो उन्होंने बताया कि 2012 में जब से जिनपिंग सत्ता में आए हैं, तब से जांच एजेंसियों ने 81 लाख मामले दर्ज किए हैं और 79 लाख लोगों को सजा दी है. इनमें केंद्र सरकार के तहत काम करने वाले 963 वीआईपी अधिकारी भी शामिल हैं. अकेले इस साल के शुरुआती नौ महीनों में 6,80,000 लोगों पर डंडा चलाया गया है. हालांकि, अधिकारियों ने दबी जुबान में ये भी माना कि इस खौफनाक माहौल की वजह से सरकारी तंत्र में सन्नाटा पसर गया है और अब अधिकारी गलती के डर से कोई भी नया या बड़ा फैसला लेने से कतराने लगे हैं.

असली खेल क्या है? 2027 के महाधिवोशन से पहले मुकम्मल बादशाहत!

दुनियाभर के रक्षा और राजनीतिक पंडित इस माथापच्ची में लगे हैं कि आखिर जिनपिंग इस कदर अपनी ही सेना को क्यों काट रहे हैं. ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये सिर्फ करप्शन के खिलाफ जंग नहीं है, बल्कि साल 2027 के अंत में होने वाली 21वीं पार्टी कांग्रेस से पहले अपनी सत्ता और सिंहासन को पूरी तरह लोहे की तरह मजबूत करने का एक मास्टरस्ट्रोक है.

कार्नेगी चाइना के रिसर्चर चोंग जा इयान का कहना है कि ये अभियान अब भ्रष्टाचार मिटाने से ज्यादा जिनपिंग के एकाधिकार को सुरक्षित रखने का जरिया बन चुका है. ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बेंजामिन हिलमैन का मानना है कि इस तरह के दहशत भरे माहौल में अफसर कुछ नया करने से डरते हैं और सिर्फ कागजी बैठकों के जरिए अपनी वफादारी का नाटक करने में जुटे रहते हैं, जिससे जमीनी फैसले ठप पड़ जाते हैं.

डर के साए में चीन की फौज

शी जिनपिंग ने जिस बेदर्दी से अपनी ही सेना की रीढ़ कहे जाने वाले जनरलों और डिफेंस इंडस्ट्री के बादशाहों को उठाकर बाहर फेंका है, वो चीख-चीख कर बता रहा है कि ड्रैगन के घर के अंदर कुछ बहुत खतरनाक पक रहा है. एक तरफ जिनपिंग पार्टी और सेना की हर एक नस पर अपना शिकंजा कसना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ इस भारी-भरकम ‘सैन्य सफाए’ ने पूरी दुनिया को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या चीन की ये फौज सच में ताकतवर हो रही है, या फिर डर के साए में अंदर से खोखली होती जा रही है!



Source link