प्रभु श्रीराम ने किया था यहां पिंड दान, लिया रंगनाथ स्वामी का आशीर्वाद, जानें तीर्थराज पुष्कर की अमर गाथा

प्रभु श्रीराम ने किया था यहां पिंड दान, लिया रंगनाथ स्वामी का आशीर्वाद, जानें तीर्थराज पुष्कर की अमर गाथा


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प्रभु श्रीराम ने किया था यहां पिंड दान, लिया रंगनाथ स्वामी का आशीर्वाद, जानें

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Tirthraj Pushkar: तीर्थराज पुष्कर के बारे में कौन नहीं जानता. पुष्कर की महिमा अपनी आप में अनूठी है. पवित्र पुष्कर कुंड का विशेष महत्व है. पुराणों में कहा गया है कि भगवान श्री राम पुष्कर के कुंड में ही अपने पूर्वजों का पिंडदान किया था. पद्म पुराण के अनुसार इस परम पावन क्षेत्र में मात्र एक रात बिताने से ही मनुष्य को पापों से मुक्ति और कैवल्य धाम की प्राप्ति हो जाती है. पुष्कर सरोवर के पास स्थित पुराना और नया रंगनाथ स्वामी मंदिर, शालिग्राम रूप में भगवान की सेवा और ऐतिहासिक गोपुरम यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं. इसके अलावा नाग कुंड, अगस्त्य कुंड और पंचकुंडों में स्नान से मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में लगने वाला भव्य पुष्कर मेला राजस्थानी संस्कृति, परंपरा और देव-भक्ति का शानदार उदाहरण है.

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पुष्कर का रंगनाथ स्वामी मंदिर. Photo : studiodharma1 के इंस्टाग्राम पेज से साभार.

शास्त्रों में पुष्कर धाम को तीर्थों में तीर्थराज कहा जाता है. पुष्कर सभी तीर्थों के गुरु हैं, इसलिए उन्हें तीर्थराज कहा जाता है. पुष्कर की महिमा निराली है. यह वही पावन भूमि है जहां इस सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने महायज्ञ संपन्न किया था और इंद्रदेव के माध्यम से माता गायत्री का सृजन कर उनसे विवाह रचाया था. पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्री रामचंद्र जी ने भी माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ यहां पुष्कर सरोवर में स्नान कर अपने पितरों का पिंड दान किया था. ब्रह्मा जी के मंदिर और माता सावित्री के दर्शन के पश्चात श्रद्धालु श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर में भगवान रंगनाथ स्वामी का दर्शन करते हैं. स्वामी रंगनाथ मंदिर द्रविड़ और राजस्थानी वास्तुकला का अद्भुत संगम हैं. इस मंदिर में भगवान रंगनाथ और माता लक्ष्मी का दर्शन कर आप भाव-विभोर हो जाएंगे. कार्तिक मास में यहां भगवान के दर्शन और पूजा का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है.

श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर और शालिग्राम रूप की महिमा

माता सावित्री के दर्शन के बाद थोड़ी दूरी पर स्थित श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर अत्यंत शांत और आध्यात्मिक वातावरण के बीच स्थित है. मंदिर के प्रवेश द्वार पर बना विशाल गोपुरम है जिस पर कई देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां सुशोभित हैं. यह नक्काशीदार भगवान की मूर्ति भक्तों को पहली ही नजर में आकर्षित कर लेती है. मंदिर के गर्भगृह में ऊँ श्रीरंगनाथाय नमः के जप के साथ भक्त भगवान रंगनाथ स्वामी और उनके बगल में विराजमान माता लक्ष्मी के दर्शन करते हैं. मान्यता है कि यहां शालिग्राम रूप में दर्शन देने वाले गुरुतमान और अलवार स्वामियों की कृपा से जीवन के समस्त दुखों को नाश होता है. पुराने रंगनाथ स्वामी मंदिर के साथ-साथ श्रद्धालु नए रंगनाथ स्वामी मंदिर में भी माथा टेककर असीम पुण्य के भागी बनते हैं.

पंचकुंड, अगस्त्य आश्रम और नाग कुंड

रंगनाथ स्वामी के दर्शन के पश्चात तीर्थयात्री पुष्कर के प्रसिद्ध पंचकुंड की ओर दर्शन करने जाते हैं. ज्येष्ठ पुष्कर क्षेत्र से थोड़ा आगे चलने पर यज्ञ पर्वत दिखाई देता है, जहां महर्षि अगस्त्य का प्राचीन आश्रम और अगस्त्य कुंड स्थित है. इसके पास ही प्रसिद्ध नाग कुंड है, जहां स्नान कर भक्त नाग वासुकीनाथ की पूजा करते हैं. विशेष रूप से नागपंचमी के दिन यहां महिला श्रद्धालुओं और नवविवाहित दंपतियों की अपार भीड़ उमड़ती है. इसके अलावा गंगा कुंड, सूर्य कुंड, चक्र कुंड और पद्म कुंड में स्नान करने से जन्मों-जन्मों के पापों का क्षय होता है.

कार्तिक मास का अलौकिक पुष्कर मेला

पुष्कर की महिमा का सबसे शानदार रूप प्रतिवर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में देखने को मिलता है. इस समय यहां विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेले का आयोजन होता है. इस मेले में दुनिया भर के लोग आते हैं. राजस्थानी संस्कृति, परंपराओं और अगाध आस्था को प्रतिबिंबित करने वाला यह मेला इतना भव्य होता है कि मानो स्वयं ब्रह्मा जी यहां आकर भक्तों की पूजा स्वीकार करते हैं. कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सरोवर में दीपदान और पवित्र स्नान के लिए लाखों देशी-विदेशी श्रद्धालु पहुंचते हैं. जगतगुरु ब्रह्मा जी की कृपा से भरपूर यह पावन यात्रा हर श्रद्धालु के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा और उल्लास भर देती है.



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