जरा सोचिए! यूपी चुनाव में जेल से बाहर आ गए आजम खान, तो असदु्द्दीन ओवैसी और मायावती की प्लानिंग का क्या होगा?

जरा सोचिए! यूपी चुनाव में जेल से बाहर आ गए आजम खान, तो असदु्द्दीन ओवैसी और मायावती की प्लानिंग का क्या होगा?


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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड फर्जीवाड़े के मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की सजा पर रोक लगाते हुए जमानत दे दी है. निचली अदालत ने इन्हें क्रमशः 10 और 7 साल की सजा सुनाई थी. इस फैसले से रामपुर से लखनऊ तक सपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है. हालांकि, अन्य मुकदमों और ईडी द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्तियां अटैच करने से कानूनी मुश्किलें बरकरार हैं. राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, 2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले आजम खान की रिहाई सपा को मुस्लिम वोटरों और पारंपरिक काडर में मजबूती देगी, जिससे ओवैसी की AIMIM के प्रभाव को सीधा झटका लग सकता है.

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दो पैन कार्ड मामले में आजम खान को हाई कोर्ट से राहत मिली है.

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दो पैन कार्ड फर्जीवाड़े के मामले में हाईकोर्ट ने दोनों की सजा पर रोक लगाते हुए जमानत मंजूर कर ली है. इस फैसले के बाद से रामपुर से लेकर लखनऊ तक सपा खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई है. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले आजम खान की संभावित रिहाई को समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है.

हाईकोर्ट का फैसला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा को निलंबित करते हुए जमानत दे दी है.

निचली अदालत की सजा: रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में आजम खान को 10 साल और उनके बेटे को 7 साल की कैद सुनाई थी.

जश्न का माहौल: जमानत की खबर मिलते ही रामपुर में सपाइयों ने ढोल-नगाड़े बजाकर जश्न मनाया और मिठाइयां बांटीं.

कानूनी मुश्किलें बरकरार: एक तरफ जहां जमानत से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर दी हैं, जिनका बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपये है.

यूपी चुनाव 2027 और आजम खान की भूमिका

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आजम खान जेल से बाहर आते हैं, तो आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समीकरण बदल सकते हैं. मुस्लिम मतदाताओं और पार्टी के पारंपरिक काडर के बीच आजम खान का प्रभाव आज भी बेहद मजबूत माना जाता है. समाजवादी पार्टी के नेता यह उम्मीद जता रहे हैं कि उनकी रिहाई से पार्टी को क्षेत्रीय स्तर पर नई मजबूती मिलेगी.

हालांकि, आजम खान की पूरी तरह से रिहाई उनके खिलाफ दर्ज अन्य मुकदमों की कानूनी स्थिति पर भी निर्भर करती है. मदरसा आलिया की किताबें चुराने, जमीन हड़पने और भड़काऊ भाषण जैसे मामलों के चलते उनकी राहें अभी पूरी तरह आसान नहीं हैं, लेकिन हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले ने सपा खेमे में नया जोश जरूर भर दिया है.

असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव लंदन में अपना रुपया रखते हैं.

आजम जेल से बाहर आए तो ओवैसी और मायावती को होगी दिक्कत?

यूपी चुनाव 2027 में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी मुस्लिम बाहुल्य जिलों में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी की ओर से गठबंधन का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद ओवैसी सीधे तौर पर अखिलेश यादव का नाम लेकर हमलावर हैं. वह मंचों से लगातार आरोप लगा रहे हैं कि अखिलेश यादव और उनका परिवार मुसलमानों को केवल वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल करता रहा है. जवाब में अखिलेश यादव भी ओवैसी को कभी रावण तो कभी प्रीपेड पार्टी कहकर जवाब दे रहे हैं. ऐसे में चर्चा शुरू हो गई है कि अगर आजम खान जेल से बाहर आते हैं और यूपी चुनाव के दौरान जनसभाएं करते हैं तो यह सीधे तौर पर ओवैसी के लिए नुकसानदायक होगा. ओवैसी इस कोशिश में हैं कि वह दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की पार्टी से गठबंधन करके 2017 और 2022 के मुकाबले अपनी पार्टी का प्रदर्शन सुधार सकें.

वहीं यूपी की राजनीति में एक बार फिर से अपनी पांव जमाने की कोशिश कर रहीं मायावती भी एक बार फिर से मुसलमानों को अपने साथ जोड़ने के प्रयास में हैं. देखा जा रहा है कि वह यूपी चुनाव 2027 में बीएसपी ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवारों को उतार रही है. लेकिन आजम खान की भाषण शैली जिस किस्म की होती है उसे देखते हुए चर्चा है कि अगर वह काननू पछड़ों से निपटने के बाद जेल से बाहर आते हैं तो यूपी चुनाव में एक अलग रंग देखने को मिलना तय है.



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