कल महाकुंभ का ध्वजारोहण, नासिक कुंभ में 2 कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र
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Kumbh Mela 2026-2028: 31 अक्टूबर को महाकुंभ का ध्वजारोहण होने जा रहा है, जिसमें नासिक कुंभ के 2 विशेष कार्यक्रम मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे. इस बार यह कुंभ मेला पूरे 21 महीने का होगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह और जिज्ञासा बनी हुई है. इस आयोजन की भव्यता और इसके लंबे समय तक चलने के पीछे के विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय कारणों को जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर.
Nashik Kumbh Flag Hoisting: नासिक में 31 अक्टूबर दिन शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के करकमलों से सिंहस्थ कुंभ मेला का ध्वजारोहण कार्यक्रम होने वाला है. अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता भक्ति चरण दास महाराज ने बताया कि 30-31 अक्टूबर और 1 नवंबर तक तीन दिवसीय कार्यक्रम प्रशासन द्वारा आयोजित किया गया है. उन्होंने बताया कि आयोजन में साढ़े पांच सौ लोगों का शंखनाद और साढ़े छह हजार आदिवासी बंधुओं की भव्य दिव्य आरती विशेष आकर्षण होगी. जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी ने कहा कि कुंभ के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आगमन हर्ष और गौरव का विषय है.
तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन
अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता भक्ति चरण दास महाराज ने कहा कि ध्वजारोहण 31 अक्टूबर को होने जा रहा है. 30-31 अक्टूबर और 1 नवंबर तक तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन हमारे पूरे सिंहस्थ के प्राधिकरण, महानगर पालिका और प्रशासन द्वारा किया गया है. मैं सर्वप्रथम सभी आमंत्रित अतिथियों, महापुरुषों और अखाड़ों का धन्यवाद देता हूं कि वे प्रशासन के निमंत्रण पर नासिक आए हैं. उन्होंने कहा कि दूसरी बात, राष्ट्रपति के करकमलों द्वारा यह ध्वजारोहण होने जा रहा है. यह नासिक और महाराष्ट्र के लिए गर्व और गौरव की बात है. साथ ही, महिलाओं को किस प्रकार सम्मान दिया जाता है और संतों-महापुरुषों द्वारा उनका सम्मान कैसे किया जाता है, यह भी इस कार्यक्रम में देखने को मिलेगा.
2 कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र
इसमें दो ऐसे कार्यक्रम होंगे जो विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगे. पहला लगभग साढ़े पांच सौ लोगों का शंखनाद और दूसरा लगभग साढ़े छह हजार आदिवासी बंधुओं द्वारा एक साथ भव्य दिव्य आरती. भक्ति चरण दास महाराज ने कहा कि ऐसे अनेक लोग हैं जिन्होंने कभी रामकुंड नहीं देखा होगा या गोदावरी कुंभ के बारे में अधिक नहीं जानते होंगे. उनके लिए भी यह एक ऐतिहासिक अवसर होगा. उन्होंने कहा कि एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्षों से एक परंपरा बनी हुई थी कि त्र्यंबकेश्वर वाले नासिक नहीं जाते और नासिक वाले त्र्यंबकेश्वर नहीं जाते. हम इस भेदभाव को समाप्त करते हुए 13 अखाड़ों के सभी श्रीमहंतों, शंकराचार्यों, रामानंदाचार्यों और वैष्णवाचार्यों को एक मंच पर लेकर आ रहे हैं. राष्ट्रपति की उपस्थिति में यह भव्य दिव्य आरती, गोदावरी की भजन-संध्या और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
इसलिए कहा जाता है सिंहस्थ कुंभ
बता दें महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में गोदावरी नदी के तट पर 31 अक्टूबर 2026 से शुभारंभ होकर 24 जुलाई 2028 तक चलेगा. सिंहस्थ कुंभ मेला हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में शामिल है. देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु इस पवित्र मेले में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिंहस्थ कुंभ का संबंध गुरु यानी बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश से माना जाता है. इसी वजह से इसे सिंहस्थ कहा जाता है.
21 महीने का इस बार नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला इस बार 21 महीने का लगने जा रहा है. इस महीने की शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को होगी और समापन 24 जुलाई 2028 को होगा. लगभग दो साल तक चलने वाले इस बार के कुंभ को सिंहस्थ कुंभ कहा जाता है, बाकी जगहों को सिंहस्थ नहीं कहा जाता. यहां पर राजा हर्षवर्धन काल से ही सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता रहा है. जब देवगुरु (गुरु ग्रह) सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता है.
नासिक कुंभ मेला 2027: पूरा शेड्यूल
ध्वजारोहण: 31 अक्टूबर 2026
नगर प्रदक्षिणा: 29 जुलाई 2027
पहला अमृत स्नान: 2 अगस्त 2027
दूसरा अमृत स्नान: 31 अगस्त 2027
तीसरा अमृत स्नान (नासिक): 11 सितंबर 2027
तीसरा अमृत स्नान (त्र्यंबकेश्वर): 12 सितंबर 2027
समापन समारोह: 24 जुलाई 2028