EVM नहीं बैलट पेपर से क्यों हुए MLC चुनाव, किन इलेक्शन में मतपत्र का इस्तेमाल?
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Why Ballot Papers Used In MLC Elections: देश में आम चुनाव ईवीएम से होते हैं, लेकिन राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यसभा, विधान परिषद, कुछ पंचायत और नगर निकाय चुनावों में आज भी बैलट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है. ईवीएम को ज्यादा सुरक्षित और जल्दी नतीजे देने वाला सिस्टम माना जाता है. फिर इन चुनावों में बैलट पेपर का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
एमएलसी चुनाव बैलट पेपर से करवाए जाते हैं. ऐसा क्यो? ईवीएम क्यों नहीं होते इस्तेमाल. फाइल फोटो
Why Ballot Papers Used In MLC Elections: बीते दिनों चार राज्यों बिहार, यूपी, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विधान परिषद की 23 सीटों के लिए चुनाव हुए. ये चुनाव बैलट पेपर से करवाए गए. इन 23 में से मात्र एक सीट नागपुर में कांग्रेस को जीत मिली. कांग्रेस पार्टी कर्नाटक की सभी चार सीटों पर चुनाव हार गई. बावजूद इसके कि राज्य में कांग्रेस की ही सरकार है. हालांकि, भाजपा को भी इस चुनाव में झटके लगे हैं. वह यूपी की वाराणसी और लखनऊ सीट से हार गई है. वाराणसी से ही पीएम नरेंद्र मोदी सांसद हैं. इन चुनावों में भाजपा ने कुल नौ सीटें जीतीं, जबकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पांच उम्मीदवारों को जीत मिली.
खैर, हम इन चुनावों के नतीजों की नहीं, बल्कि चुनाव कराने के तरीके की बात कर रहे हैं. देश में लोकसभा और विधानसभा के आम चुनाव ईवीएम से कराए जाते हैं. इसके बावजूद कुछ चुनाव आज भी बैलट पेपर से होते हैं. विपक्ष लंबे समय से ईवीएम में धांधली का आरोप लगाता रहा है और बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग करता है. इन नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस पर कटाक्ष किया और बैलट पेपर से हुए इन चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर तंज कसा. ऐसे में आज समझते हैं कि देश में कौन-कौन से चुनाव मतपत्रों से कराए जाते हैं और इसके पीछे की वजह क्या है.
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनावों में आज भी बड़े पैमाने पर बैलट पेपर का इस्तेमाल होता है. हालांकि, इन चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल करने या मतपत्रों से मतदान कराने का फैसला संबंधित राज्य का निर्वाचन आयोग करता है. इसलिए पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था नहीं है.
पंचायती राज मंत्रालय के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) की ओर से 2023 में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, 53 फीसदी राज्यों में ग्राम पंचायत चुनावों के लिए बैलट पेपर का इस्तेमाल होता है. केवल केरल, सिक्किम और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव में ग्राम पंचायत की सभी सीटों पर ईवीएम से मतदान कराने की व्यवस्था बताई गई थी. कुछ राज्यों में ईवीएम और बैलट पेपर, दोनों का इस्तेमाल होता है.
आखिर पंचायत चुनावों में मतपत्रों का इस्तेमाल क्यों होता है? इसकी एक बड़ी वजह खर्च और व्यवस्था से जुड़ी है. कई राज्यों में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव एक ही समय के आसपास होते हैं. अलग-अलग पदों के लिए बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर मशीनें उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में मतपत्रों का इस्तेमाल आसान विकल्प बन जाता है.
नगर निगम और दूसरी शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों में भी पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था नहीं है. इन चुनावों की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोगों के पास होती है. आयोग संबंधित राज्य के कानूनों और नियमों के तहत ईवीएम या बैलट पेपर से मतदान कराने का फैसला कर सकता है. दिल्ली नगर निगम के चुनाव ईवीएम से होते हैं. वहीं, पंजाब ने 2026 में नगर निकाय चुनावों के लिए बैलट पेपर का रास्ता चुना. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि पंजाब नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में दोनों तरीकों की अनुमति है. यानी जहां नियम इजाजत देते हैं, वहां राज्य निर्वाचन आयोग तय कर सकता है कि मतदान मशीन से होगा या मतपत्र से.
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