1000 सीढ़ियां, अरावली की चोटियां और दाल-बाटी! जानें वीर हनुमान के बारे में
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1000 Stairs Veer Hanuman : राजस्थान के अरावली की खूबसूरत वादियों में विराजमान है वीर हनुमान. वीर हनुमान मंदिर की अद्भुत गाथा है. यह मंदिर अपने अनूठे दिव्य दर्शन, खास परिधान और दाल-बाटी चूरमा भोग के लिए जाने जाते हैं. वीर हनुमान मंदिर जयपुर के बीकानेर नेशनल हाईव 11 पर स्थित समोद पर्वत पर विराजमान हैं. इस मंदिर का कनेक्शन राजा-महाराजाओं से जुड़ा हुआ है.
वीर हनुमान मंदिर का रॉयल कनेक्शन.
1000 Stairs Veer Hanuman : राजस्थान के समोद पर्वत पर स्थित वीर हनुमान मंदिर अपने आप में अद्वितीय हैं. यह मंदिर कई अनूठी खासियतों के कारण विख्यात हैं. यह मंदिर जयपुर से बीकानेर नेशनलहाईवे 11 पर स्थित है. यह मंदिर बहुत ऐतिहासिक है जिसका राजा-महाराजाओं से जुड़ा हुआ है. हालांकि इसका ऐतिहासिक कालखंड अनसुलझा हुआ है. किवदंतियों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार इसका संबंध बीकानेर के रेणराज वंशजों से माना जाता है. इस मंदिर में बसंत नवरात्रों में भीड़ उमड़ पड़ती है. वीर हनुमान को रुद्र अवतार माना जाता है. वज्र के समान शक्तिशाली शरीर होने के कारण वे बजरंगबली भी कहलाते हैं. उनका नाम मारुति नंदन भी है. राजस्थान के चौमूं के वीर हनुमान जी की महिमा सबसे अनूठी और निराली है. अरावली पर्वत पर होने के कारण इसकी कुदरती सुंदरता अद्भुत है.
भव्य स्वागत द्वार और राम-सीता-लक्ष्मण के दर्शन
समोद पर्वत की तलहटी में पहुंचते ही आपका स्वागत एक विशाल और भव्य नक्काशीदार द्वार करेगा. इस ऊंचे स्वागत द्वार के ऊपरी कटघरों में भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की बेहद आकर्षक मूर्तियों के दर्शन होंगे. यहां दर्शन के लिए आने वाले और दर्शन कर लौटने वाले श्रद्धालुओं से यह मुख्य मार्ग हमेशा गुलजार महसूस होगा. बसंत नवरात्रों के दौरान तो यहां भक्तों का महासैलाब उमड़ पड़ता है. पर्वत के निचले हिस्से में बने प्रांगण में श्रद्धालु राजस्थान के मशहूर व्यंजन दाल-बाटी का स्वाद चखकर अपनी यात्रा का आनंद दोगुना करते हैं.
1000 सीढ़ियों की चढ़ाई
मंदिर के मुख्य गर्भगृह तक पहुंचने के लिए आपको 1,000 से अधिक सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ेगी. जैसे-जैसे भक्त सीढ़ियां चढ़ते हैं, चारों ओर घिरी हरी-भरी अरावली पर्वत उनका स्वागत करता हुआ दिखाई देगा. सीढ़ियों की चढ़ाई के दौरान अरावली से आने वाली शीतल हवाएं भक्तों की सारी थकान मिटा देती हैं. पर्वतराज की चोटी पर स्थित मंदिर प्रांगण में पहुंचते ही एक अलौकिक और मधुर अनुभव की अनुभूति होती है. यहां बजरंगबली के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान रहता है.
राजस्थानी लोक-संस्कृति की झलक
समोद के वीर हनुमान मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है यहां की जीवंत राजस्थानी संस्कृति. यहां आने वाले अधिकांश स्थानीय श्रद्धालु अपनी पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में भगवान के दर्शन करने पहुँचते हैं. राजस्थान के जनपद और लोक कलाकार वीर हनुमान जी को अपना आराध्य मानते हैं. मंदिर प्रांगण में ये कलाकार ढोलक और खड़ताल की ताल पर पारंपरिक भजन-कीर्तन गाते हैं. संगीत की मधुर धुन पर नाचते-गाते भक्तों का यह उल्लास समोद पर्वत के वातावरण को दिव्य और भक्तिमय बना देता है.