अनंत सिंह गए जेल, तो ललन सिंह हुए ‘निग्लेक्ट’, नीतीश की JDU में भूमिहार नेताओं में कौन करा रहा महासंग्राम?

अनंत सिंह गए जेल, तो ललन सिंह हुए ‘निग्लेक्ट’, नीतीश की JDU में भूमिहार नेताओं में कौन करा रहा महासंग्राम?


पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य सभा सांसद नीतीश कुमार की बढ़ती उम्र और खराब सेहत की परेशानी से जूझ रहे हैं. ठीक उसी तरह उनकी पार्टी जेडीयू का भी बुरा टाइम शुरू हो चुका है. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनता ने जेडीयू को 85 सीटें देकर नीतीश कुमार का पूरा सम्मान किया. अब नीतीश 75 की उम्र में थोड़े कमजोर क्या पड़े उनकी पार्टी के शीर्ष नेता ही आपस में टकराते हुए दिख रहे हैं. खासकर पार्टी में भूमिहार समाज के तीनों बड़े चेहरों ललन सिंह, अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच आमने सामने की जंग दिख रही है. अनंत सिंह के जेल जाने और नीरज कुमार के एमएलसी चुनाव जीतने के साथ ही जेडीयू में झगड़ा बढ़ता दिख रहा है.

ऐसे शुरू हुआ जेडीयू में महासंग्राम

जेडीयू में भूमिहार नेताओं के बीच हालिया संघर्ष की कहानी बिहार एमएलसी चुनाव 2026 में शुरू हुई. पार्टी ने पुराने नेता नीरज कुमार को पटना स्नातक सीट से लगातार चौथी बार उम्मीदवार बनाया. जेडीयू के पुराने बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने खुले तौर पर नीरज कुमार का विरोध शुरू कर दिया. पार्टी लाइन से अलग जाकर अनंत सिंह ने साफ तौर पर कहा कि वह नीरज कुमार को हराने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. आरोप लगाया कि जब वह जेडीयू के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे तब नीरज कुमार ने उन्हें परास्त करने के लिए हर तरह के तिकड़म अपनाए थे. इसलिए वह पर्सनल खुन्नस में नीरज कुमार को नुसान पहुंचाएंगे. इसके बाद अनंत सिंह जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार प्रसार में जुट गए. यहां तक कि वह उनके नॉमिनेशन में भी चले गए.

कई बार कहने के बाद भी जब अनंत सिंह बार-बार यही कहते रहे कि उन्हें पार्टी से कोई दिक्कत नहीं है, वह केवल नीरज कुमार से हिसाब चुकता करना चाहते हैं. मामला जब बढ़ गया तब जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को जिम्मेदारी सौंपी की वह बातचीत करके अनंत सिंह को शांत करें.

ललन सिंह ने दोनों नेताओं को बिठाकर बात की, लेकिन अनंत सिंह अपनी बात पर अड़े रहे. इसके बाद ललन सिंह ने मीडिया में आकर कहा कि अनंत सिंह का अपना तर्क है. वह कह रहे हैं कि नीरज कुमार ने उनके खिलाफ काम किया, इसलिए वो भी करेंगे. यानी इस झगड़े में एक तरह से अनंत सिंह को ललन सिंह का पूरा सपोर्ट मिल गया. इसके बाद अनंत सिंह यह भी गिनाने लगे कि नीरज कुमार कब-कब नीतीश कुमार और ललन सिंह को धोखा देने की कोशिश करते रहे. वह यह भी बताने लगे कि नीतीश कुमार के साथ आने के चलते उनके नौ लोगों की बिहार एसटीएफ ने एनकाउंटर कर दिया था. वोटिंग के दिन तक अनंत सिंह पूरी शिद्दत से जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ अनुज सिंह के लिए प्रचार में लगे रहे. वहीं चुनाव प्रचार के दौरान जब नीरज कुमार की सेहत बिगड़ गई तो खुद नीतीश कुमार उन्हें देखने पहुंचे. वहीं निशांत कुमार ने नीरज कुमार के लिए खूब प्रचार किया.

टकराहट में सबसे पहले अनंत सिंह का खेल हुआ खराब

23 अक्टूबर को एमएलसी चुनाव की वोटिंग संपन्न होने के साथ ही अनंत सिंह का पुरा टाइम शुरू हो गया. जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने पत्र जारी कर अनंत सिंह और उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से छह साल के लिए बाहर कर दिया. इसके अलावा बिहार विधानसभा स्पीकर प्रेम कुमार से यह भी अनुशंसा कर दी गई कि अनंत सिंह की विधायकी रद्द कर दी जाए. इसके बाद अनंत सिंह बौखलाहट में दिखने लगे. वह कहने लगे- ‘जीने की खुशी नहीं, मरने का गम नहीं’. कहा कोई भी पार्टी उन्हें बुलाकर ले जाती है, वह खुद से नहीं जाते हैं. गिनाने लगे कि किस तरह से नीतीश कुमार की सरकार बचाने के लिए उन्होंने आरजेडी से गद्दारी की थी.

अनंत सिंह का बेल टूटा, जाएंगे जेल.

जब अनंत सिंह पूरी तरह से नीरज कुमार की मुखालफत में जुटे थे तभी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान जनसुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रयदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे टाल क्षेत्र के बाहुबली दुलारचंद यादव की हत्या मामले को सुप्रीम कोर्ट ले आया गया. एमएलसी चुनाव का रिजल्ट आ गया है, जिसमें जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार पटना स्नातक सीट से जीत गए हैं. 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दुलारचंद यादव हत्याकांड पर सुनवाई हुई और अनंत सिंह की जमानत को रद्द कर उन्हें एक दिसंबर तक जेल में सरेंडर करने का आदेश जारी कर दिया गया.

झगड़े में ललन सिंह vs संजय झा

जब अनंत सिंह को पार्टी से निकाला गया तो मीडिया में खबर आई कि यह पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के स्तर पर लिया गया फैसला है. केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह इसके पक्ष में नहीं हैं. इसी बीच दिल्ली से एक तस्वीर सामने आई. इत्तेफाक से ललन सिंह और संजय कुमार झा एक साथ ही मिल गए. पत्रकार ने सबसे पहले ललन सिंह से अनंत सिंह को लेकर सवाल पूछा. ललन सिंह केवल इतना बोलकर गाड़ी में बैठ गए कि यह संजय झा जी से पूछिए यह उनका विशेषाधिकार है. ललन सिंह का यह जवाब सुनकर संजय झा के चेहरे का हाव-भाव बदल गया. पत्रकारों ने जब उनसे अनंत सिंह के निकाले जाने का सवाल पूछा तो उन्होंने कुछ भी बोलने से मना कर दिया.

अब जब नीरज कुमार एमएलसी चुनाव जीत गए हैं. तब संजय कुमार झा ने पटना में पत्रकारों से कहा कि किसी भी पार्टी में अनुशासन जरूरी है, इसलिए अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई. उन्होंने यह भी कहा कि जेडीयू में सभी फैसले सर्वसम्मति से होते हैं और अंतिम फैसला नीतीश कुमार ही लेते हैं. जेडीयू में किसी के चाहने या ना चाहने से फैसले नहीं होते हैं.

संजय झा के बयान के बाद नीरज ने ललन के प्रति जताया विरोध

इसी बीच एमएलसी चुनाव में जीत के बाद नीरज कुमार पार्टी के तमाम बड़े नेताओं से मिलने पहुंचे, लेकिन ललन सिंह के पास नहीं गए. पत्रकारों ने पूछा तो साफ तौर से कहा कि वह ललन सिंह के पास नहीं जाएंगे. यह भी कहा- ‘राजनीति का कर्ज सूद समेत लौटाऊंगा’. इतना ही नहीं, नीरज कुमार के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में लगाए गए पोस्टर में ललन सिंह की तस्वीर भी हटा दी गई. यहां देखना दिलचस्प होगा कि कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा जिस तरह से अनंत सिंह के मामले में अनुशासन की बात कर रहे हैं क्या वह नीरज कुमार के केस में उसी निष्पक्षता से फैसला लेते दिखेंगे.

जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार ने जीत दर्ज की है.

जेडीयू में भूमिहार वर्चस्व की जंग?

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ललन सिंह, अनंत सिंह और नीरज कुमार तीनों भूमिहारों के बड़े नेता रहे. अनंत सिंह पहले ही बाहर कर दिए गए हैं. अब नीरज कुमार खुलकर ललन सिंह के खिलाफ आ चुके हैं. वहीं पूरे खेल में संजय कुमार झा भी सवर्ण नेता के तौर पर बड़े प्लेयर हैं. यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के कमजोर होने के बाद संजय झा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया. इस बात से ललन सिंह बहुत खुश नहीं हैं. वहीं पार्टी की जिम्मेदारी संभालने के लिए लाए गए नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पार्टी के इस झगड़े को अब तक फ्रंट पर आकर सुलझाते हुए नहीं दिख रहे हैं.

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह (फाइल फोटो)

अगले कुछ महीनों में देखना होगा कि जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व के बीच छिड़ा यह झगड़ा कहां जाकर रुकता है. यहां यह भी बता दूं कि ललन सिंह और अनंत सिंह दोनों एक खेमे के माने जाते हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान ललन सिंह की मुंगेर में जीत सुनिश्चित करने के लिए अनंत सिंह पैरोल पर कुछ दिनों के लिए बाहर आए थे. हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में मुंगेर सीट पर ही अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी कांग्रेस के टिकट पर ललन सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ चकी हैं. फिर भी कहा जाता है कि ललन सिंह और अनंत सिंह में काफी नजदीकी है.



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