पाकिस्तान से बढ़ती दोस्ती क्या मालदीव के लिए सही है? जानिए पूर्व रक्षामंत्री ने क्यों उठाए सवाल

पाकिस्तान से बढ़ती दोस्ती क्या मालदीव के लिए सही है? जानिए पूर्व रक्षामंत्री ने क्यों उठाए सवाल


पाकिस्तान के साथ रक्षा और साइबर सुरक्षा संबंधों को मजबूत करते हुए, मालदीव को सहयोग से मिलने वाले तात्कालिक लाभ से आगे बढ़कर, क्षेत्रीय स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि पर इसके व्यापक प्रभावों के संबंध में विचार करना चाहिए. यह मानना है मालदीव की पूर्व रक्षा मंत्री मारिया दीदी का.

राष्ट्रपति मुइज्जू की हालिया पाकिस्तान पर लिखे एक आर्टिकल में उन्होंने लिखा है कि मालदीव एक छोटा देश है, लेकिन रणनीतिक रूप से इसका महत्व अधिक है. हिंद महासागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्थित होने, एक विशाल समुद्री क्षेत्र होने और काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्था होने के कारण हमारा देश प्रमुख भू-राजनीतिक हितों के केंद्र-बिंदु पर स्थित है.

मारिया दीदी के मुताबिक मालदीव के लिए विदेश नीति का मतलब केवल दोस्ती बढ़ाना या समझौतों पर हस्ताक्षर करना नहीं है. इसका उद्देश्य अपनी संप्रभुता की रक्षा करना, अपने आर्थिक भविष्य को सुरक्षित रखना और यह सुनिश्चित करना कि बड़ी ताकतों के बीच की प्रतिद्वंद्विता हमारे लिए बोझ न बन जाए.राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू की 20 से 22 अक्टूबर तक की पाकिस्तान की राजकीय यात्रा की गहन समीक्षा की जानी चाहिए. इस दौरान दोनों देशों के बीच 20 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ था.

मारिया दीदी के मुताबिक सवाल यह नहीं है कि मालदीव को पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने चाहिए या नहीं. पाकिस्तान के साथ संबंध रखना चाहिये. पर, सवाल यह है कि क्या सरकार ने इन प्रतिबद्धताओं के हमारे राष्ट्रीय हितों पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का उचित आकलन किया है?

मालदीव के लिए समुद्री सुरक्षा बुनियादी रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है. मारिया दीदी के मुताबिक देश विशेष आर्थिक क्षेत्र की निगरानी करने, तस्करी और अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों से निपटने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने तथा आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता को विकसित करनी है. सैन्य प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी साझा करना, उपकरणों की खरीद और तकनीकी सहायता से ऐसी निर्भरता पैदा हो सकती है जो समझौतों पर हस्ताक्षर होने के काफी समय बाद तक बनी रहती है. इ

पाकिस्तान में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान के रुख और सिंधु जल संधि को लेकर उसकी चिंताओं का जिक्र किया.‘अटोल टाइम्स’ की खबर के अनुसार राष्ट्रपति मुइज्जू ने इन टिप्पणियों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की. कूटनीतिक चुप्पी को अपने आप सहमति नहीं मान लेना चाहिए. साथ ही, किसी नेता से यह अपेक्षा भी नहीं की जानी चाहिए कि वह एक संयुक्त कार्यक्रम के दौरान दिए गए हर विवादित बयान का सार्वजनिक रूप से जवाब दे.

भारत हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है और सुरक्षा, आर्थिक विकास तथा क्षेत्रीय स्थिरता के मामले में एक अपरिहार्य साझेदार है. पूर्व में हुए महत्वपूर्ण संकट की स्थितियों जैसे कि नवंबर 1988 में तख्तापलट की कोशिश, 2004 में हिंद महासागर की सुनामी, 2014 में माले में जल संकट और कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत की मदद इस रिश्ते के व्यावहारिक महत्व को दर्शाती है.

मालदीव के सामने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती है. पाकिस्तान लंबे समय से उसका साझेदार है और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) का सदस्य भी है.मारिया दीदी के मुताबिक भारत उसका सबसे करीबी पड़ोसी और समुद्री सुरक्षा, व्यापार, क्षेत्रीय संपर्क तथा आपात स्थितियों में सहायता के लिहाज से एक महत्वपूर्ण साझेदार है. मालदीव को इन दोनों में से किसी एक को चुनना पड़े, ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए. लेकिन वह ऐसे फैसलों को नजरअंदाज करने का जोखिम भी नहीं उठा सकता, जो भविष्य में किसी संकट के दौरान उसके लिए ऐसा चुनाव करना मुश्किल बना सकते हैं.

मारिया दीदी के मुताबिक मालदीव ने दशकों के प्रयास से एक शांतिपूर्ण और मेहमाननवाज पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है. यह पहचान हमारी सबसे मूल्यवान राष्ट्रीय संपत्ति में से एक है. बड़े देश आपस में युद्ध करेंगे या नहीं, इस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है. लेकिन हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हमारी विदेश नीति हमें बेवजह उनके आपसी टकरावों में न उलझा दे. राष्ट्रपति मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा एक बुनियादी सवाल पूछने का अवसर देती है. क्या हमारी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां मालदीव को अधिक सुरक्षित, अधिक संकट-सक्षम और अपना भविष्य खुद तय करने में अधिक सक्षम बना रही हैं?

सवाल यह नहीं है कि मालदीव के मित्र होने चाहिए या नहीं. सवाल यह है कि क्या इस दोस्ती को इस तरह से निभाया जा रहा है जिससे हमारी संप्रभुता सुरक्षित रहे, हमारे काम करने की आजादी बनी रहे और हम अपने सभी पड़ोसियों के साथ रचनात्मक रूप से काम कर सकें. हिंद महासागर केवल रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र नहीं है. मालदीव के लिए यह उसकी अर्थव्यवस्था, संपर्क और भविष्य की जीवनरेखा है.

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