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Hyderabad Women Entrepreneur Success Story: हैदराबाद के कूकटपल्ली की महिला उद्यमी दीक्षिता ने जंक फूड और मिलावटी खाद्य पदार्थों के बढ़ते चलन के बीच सेहतमंद स्नैक्स तैयार करने की अनोखी पहल शुरू की है. श्री रक्षा फूड्स के जरिए वह पारंपरिक अनाज से ऐसे उत्पाद बना रही हैं, जिनमें सफेद चीनी, मैदा, डालडा, पाम ऑयल और कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. मीठे उत्पादों में ऑर्गेनिक गुड़ और नमकीन स्नैक्स में कोल्ड-प्रेस्ड तेल का उपयोग होता है. खास बात यह है कि दीक्षिता बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज सीधे किसानों से खरीदती हैं. फिलहाल करीब 10 से 15 किसान परिवार उनके इस कारोबार से जुड़े हैं. छोटे स्तर से शुरू हुए इस गृह उद्योग का मासिक टर्नओवर अब लगभग 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच गया है. हर महीने 300 से अधिक नियमित ग्राहक उनके उत्पाद खरीदते हैं. उनकी यह पहल पारंपरिक स्वाद, महिला उद्यमिता और किसानों की आय को एक साथ जोड़ रही है.
हैदराबाद. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मिलावटी खान-पान और जंक फूड के बढ़ते चलन से हर उम्र के लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. इस समस्या को देखते हुए हैदराबाद के कूकटपल्ली की एक महिला उद्यमी ने शुद्धता और पारंपरिक खान-पान की अनोखी मुहिम शुरू की है. उन्होंने श्री रक्षा फूड्स के जरिए पारंपरिक स्वाद को स्वास्थ्य के साथ जोड़कर एक सफल गृह उद्योग की नींव रखी है.
बाजार के प्रोसेस्ड और तले-भुने खाने से बढ़ते ब्लड प्रेशर, शुगर, मोटापा और महिलाओं में पीसीओडी जैसी समस्याओं को खुद महसूस करने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया. इनका मुख्य उद्देश्य लोगों को एक ऐसा विकल्प देना था जो पूरी तरह रसायन मुक्त और पौष्टिक हो. इनका मानना है कि जैसे मां अपने बच्चों को घर पर पौष्टिक खाना बनाकर देती है समाज के हर वर्ग को भी वैसा ही शुद्ध पोषण मिलना चाहिए.
किसानों के पास खुद जाकर जांचती हैं फसल की गुणवत्ता
श्री रक्षा फूड्स की दीक्षिता ने बताया कि यहां तैयार होने वाले किसी भी उत्पाद में सफेद चीनी, मैदा, डालडा, पाम ऑयल या आर्टिफिशल रंगों का इस्तेमाल नहीं होता है. मीठे व्यंजनों के लिए सिर्फ ऑर्गेनिक गुड़ और नमकीन स्नैक्स के लिए गेहूं के आटे के साथ कोल्ड-प्रेस्ड तेल का प्रयोग किया जाता है. यह पारंपरिक तरीका दिल और पाचन तंत्र को सुरक्षित रखने में मददगार माना जाता है. मिलेट्स यानी मोटे अनाज की मांग पूरी करने के लिए वे बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे किसानों के पास जाकर बाजरा, ज्वार और रागी की गुणवत्ता जांचती है.
हर महीने डेढ़ से दो लाख का है टर्नओवर
उन्होंने बताया कि वर्तमान में करीब 10 से 15 किसान परिवारों से सीधे कच्चा माल खरीदा जा रहा है. छोटे स्तर से शुरू हुए इस काम में अब हर महीने लगभग 1.5 से 2 लाख रुपये का टर्नओवर निकल रहा है, जिसमें 40 से 50 प्रतिशत तक का शुद्ध मुनाफा रहता है. हर माह 300 से अधिक नियमित ग्राहक इनसे सीधे जुड़कर उत्पाद खरीद रहे हैं.दीक्षिता ने बताया कि बाजार में मुनाफा कमाने के कई रास्ते उपलब्ध हैं, लेकिन मिलावट के बिना शुद्ध ऑर्गेनिक उत्पाद उपलब्ध कराने से जो आत्मसंतुष्टि मिलती है. वही इस उद्यम की असली सफलता है. घर-घर तक सेहतमंद विकल्प पहुंचाकर यह पहल आज स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता और शुद्धता की बेहतरीन मिसाल बन चुकी है.