बहुमत नहीं पर PM की कुर्सी पर बैठे रहेंगे नेतन्याहू, बतौर केयरटेकर कितनी ताकत?
Last Updated:
Israel Election and Benjamin Netanyahu: इजरायल चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे और कानूनन उनके पास ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का फैसला लेने की गुंजाइश है. अगर कोई नई सरकार नहीं बनती है तो इजरायल में फिर से चुनाव होंगे. इस प्रक्रिया में 90 दिनों का समय लग सकता है. इस बीच नेतन्याहू ही केयरटेकर पीएम बने रहेंगे.
इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू. फोटो- रायटर
Israel Election and Benjamin Netanyahu: इजरायल में हुए चुनाव में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी सबसे बड़ा दल बनकर उभरी है. मंगलवार को हुए चुनाव में नेतन्याहू की अगुवाई वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला. विपक्षी गठबंधन भी सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़े से पीछे है. ऐसे में नई सरकार के गठन तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस दौरान वह ईरान के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने का फैसला ले सकते हैं?
इस सवाल का जवाब इजरायल की राजनीतिक व्यवस्था और कार्यवाहक सरकार की शक्तियों में छिपा है. इंटरनेशनल समाचार एजेंसी रायटर ने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री होने का मतलब यह नहीं है कि नेतन्याहू के अधिकार खत्म हो जाएंगे. कानून के तहत कार्यवाहक सरकार के पास नियमित सरकार जैसी शक्तियां होती हैं. हालांकि, उससे कुछ मामलों में संयम बरतने की अपेक्षा की जाती है.
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है. इसमें कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. सभी सीटों के नतीजे आ गए हैं. नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं. उनके प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं. अरब दलों के खाते में 19 सीटें गई हैं. यानी दोनों प्रमुख गठबंधन बहुमत से दूर हैं. अरब दलों का समर्थन सरकार बनाने की कोशिशों में अहम हो सकता है. हालांकि, विपक्ष के सामने मुश्किल यह है कि उसके कई नेता अरब दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने को लेकर सहज नहीं हैं.
नेतन्याहू के लिए भी रास्ता आसान नहीं है. उन्हें अपने गठबंधन के बाहर से समर्थन जुटाना होगा या विरोधी खेमे के कुछ दलों को साथ लाने की कोशिश करनी होगी. एक विकल्प राष्ट्रीय सरकार बनाने का भी हो सकता है. जब तक नई सरकार नहीं बनती, नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर काम करते रहेंगे. अगर सरकार गठन की कोशिशें नाकाम रहती हैं और दोबारा चुनाव की नौबत आती है, तो भी उनके कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहने की संभावना है.
यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू है. इजरायल के विशेषज्ञों के मुताबिक कार्यवाहक सरकार की शक्तियां नियमित सरकार से बहुत अलग नहीं होतीं. लेकिन उसे बड़े नीतिगत फैसले लेने में संयम बरतना चाहिए. नियुक्तियों और कुछ दूरगामी फैसलों पर उसकी स्वतंत्रता सीमित हो सकती है. हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में स्थिति अलग हो सकती है. अगर सरकार के सामने कोई गंभीर सुरक्षा संकट हो या तत्काल कार्रवाई की जरूरत पड़े तो वह फैसले ले सकती है.
रायटर ने इजरायल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता गाइ लूरी के हवाले से लिखा है कि कानून के लिहाज से कार्यवाहक सरकार के पास नियमित सरकार जैसी शक्तियां होती हैं. लेकिन उसे कुछ मामलों में संयम बरतना होता है.
खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव
QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें
login