आदि कैलाश यात्रा ने बदली चाइना बॉर्डर पर बसे इस गांव की तस्वीर, हर घर बना होम स्टे


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Nabi Village : चीन बॉर्डर पर बसे उत्तराखंड के एक गांव की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है. कभी अपनी सीमांत पहचान के लिए जाना जाने वाला यह गांव अब होम स्टे टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है. आदि कैलाश यात्रा पर आने वाले सैलानियों को यहां की खूबसूरत वादियां और स्थानीय संस्कृति खूब लुभा रही हैं. 

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आदि कैलाश यात्रा ने बदली चीन बॉर्डर पर बसे गांव की तस्वीर, हर घर बना होम स्टेZoom

नाबी की पहचान होम स्टे से बनी.

पिथौरागढ़: चाइना बॉर्डर पर बसे नाबी गांव की पहचान अब होम स्टे के रूप में होने लगी है. असल में यहां तकरीबन हर घर होम स्टे में तब्दील हो गया है. आदि कैलाश यात्रा के परवान चढ़ने के साथ ही सैलानियों की पहली पसंद नाबी के होम स्टे बन रहे हैं.

यहां बसा है ये गांव

आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर हायर हिमालया में नाबी गांव बसा है. 35 से अधिक परिवारों के वाले इस गांव में सभी अपने घरों को होम स्टे में तब्दील कर चुके है. नाबी की पूर्व ग्राम प्रधान सनम नबियाल ने होम स्टे की शुरूआत की थी. उन्होनें साल 2017 में होम स्टे का काम शुरू किया था. सनम नबियाल को तत्कालीन कुमाऊं मंडल विकास निगम के एमडी धीराज गर्बयाल ने होम स्टे के लिए प्रेरित किया था.

20 से ज्यादा लोगों ने खोला होम स्टे

सनम नबियाल ने अपना होम स्टे शुरू करने के बाद गांव के ही 20 अन्य लोगों को भी होम स्टे खोलने की राह दिखाई. इसके बाद नाबी की पहचान ही होम स्टे के रूप में होने लगी है. फिलहाल सभी गांव वालों ने होम स्टे बनाए हैं. यही नही अब गांव के आस-पास होटल भी बनने लगे हैं.

असल में नाबी गांव सैलानियों के लिहाज से काफी बेहतर है. हायर हिमालया में गुंजी, नाबी और कुटी गांव आते हैं. गुंजी में पानी की दिक्कत के कारण सैलानी रूकना कम पसंद करते हैं. जबकि कुटी गांव काफी ऊंचाई पर मौजूद है. जिस कारण यहां ठंड तो रहती ही है, साथ ही ऑक्सीजन की भी खासी कमी रहती है. ऐसे में इस इलाके में सैलानियों की पहली पसंद नाबी बनता जा रहा है.

श्रद्धालु जा रहे आदि कैलास

आदि कैलास यात्रा लगातार परवान चढ़ रही है. इस साल 70 हजार के करीब यात्री यात्रा में शामिल हो चुके हैं. यात्रियों की बढ़ती संख्या से होम स्टे संचालकों को भी खासा फायदा हो रहा है. मई से अक्टूबर तक नाबी के सभी होम स्टे पूरी तरह सैलानियों से पटे रहते हैं. वर्तमान में नाबी में दो सौ से अधिक सैलानियों के रूकने की व्यवस्था है.



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