Karwa Chauth 2026 Katha: करवा चौथ व्रत कथा, आज पूजा समय सुनें वीरवती की कहानी, उपवास का मिलेगा पूरा फल, पति की बढ़ेगी आयु!

Karwa Chauth 2026 Katha: करवा चौथ व्रत कथा, आज पूजा समय सुनें वीरवती की कहानी, उपवास का मिलेगा पूरा फल, पति की बढ़ेगी आयु!


Karwa Chauth 2026 Vrat Katha In Hindi: करवा चौथ का व्रत आज 29 अक्टूबर को है. देशभर में सुहागन महिलाएं और युवतियां अपने जीवनसाथी की लंबी आयु, उत्तम सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत हैं. आज शाम को 5:38 बजे से करवा चौथ की पूजा होगी, उस समय सभी व्रती महिलाओं को करवा चौथ की व्रत कथा सुननी चाहिए. उसमें साहूकार की बेटी वीरवती की कहानी बताई गई है, जिसमें उसने व्रत में गलती की, जिसकी वजह से उसके ​पति की मृत्यु हो गई और बाद में सालभर तक हर महीने चतुर्थी व्रत करके पति को दोबारा प्राप्त कर लिया. आइए जानते हैं करवा चौथ व्रत कथा.

करवा चौथ व्रत कथा (Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi)

करवा चौथ की व्रत कथा के अनुसार, एक नगर में एक साहूकार का परिवार था. उसकी एक बेटी वीरवती और 7 बेटे थे. कुछ कहानियों में वीरवती का नाम करवा भी लिखा है. लेकिन दोनों कहानियां एक ही हैं. वीरवती का विवाह हो गया था. एक दिन वो अपने मायके आई और कार्तिक कृष्ण चतुर्थी का व्रत रखा. उस दिन जब सूर्यास्त हुआ तो वह काफी परेशान थी. सभी भाई वीरवती से स्नेह करते थे, इसलिए वे उसकी परेशानी का कारण जानना चाहते थे.

वीरवती ने बताया कि आज उसका निर्जला उपवास है. जब वह चंद्रमा को अर्घ्य दे लेगी, तभी उसका व्रत पूरा होगा. चंद्रोदय न होने की वजह से वह पारण करके व्रत को पूर्ण नहीं कर सकती थी. वैसे भी कृष्ण पक्ष में चतुर्थी का चंद्रमा देरी से निकलता है. चंद्रोदय न होने की वजह से वह परेशान थी, भूख और प्यास से हालत खराब हो रही थी. बहन को इस स्थिति में देखकर उसका सबसे छोटा भाई चिंतित हो गया. उसके मन में एक उपाय आया.

उसने घर के बाहर के पीपल के पेड़ पर छलनी लगा दिया और उसमें एक दीपक जलाकर रख दिया. उस छलनी को देखकर ऐसा लग रहा था कि चंद्रमा पीपल की ओट से उदित हुआ है. ऐसा करके वह अपनी बहन वीरवती के पास जाता है और कहता है कि चांद निकल गया है. यह जानकर वीरवती खुश हो जाती है. वह छलनी वाले दीपक को चांद समझकर अर्घ्य देती है और पारण करने बैठती है.

जैसे ही वह पहला निवाला खाती है, उसे छींक आती है, दूसरे निवाले में बाल गिर जाता है, तीसरा निवाला जैसे ही मुंह में डाली, तो उसे पति की मृत्यु की खबर मिलती है. यह सुनते ही वह रोने और चिल्लाने लगती है. उसी दौरान उसकी भाभी ने बताया कि तुमने चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा नहीं किया है, छलनी वाले दीपक को चांद समझकर अर्घ्य दिया है.

यह सुनकर वह स्तब्ध रह जाती है. वह प्रण करती है कि अपने पति को दोबारा प्राप्त करके रहेगी. उसके पति के शव को सुरक्षित रख दिया गया. वीरवती पूरे एक साल में हर माह की चतुर्थी का व्रत करती है. पति के शव के पास सूई जैसी घासें उग आती हैं, उनको इकट्ठा करके रख लेती है.

उस साल जब करवा चौथ आता है, तो उसकी सभी भाभी निर्जला उपवास रखती हैं. पूजा करके वे वीरवती से आशीर्वाद लेने आती हैं तो वीरवती उनसे कहती है कि यम की सूई लो, पिय की सूई दो, मुझे भी सुहागन बना दो. य​ह अपनी सभी 6 भाभियों से कहती है, लेकिन वे इस बात के लिए तैयार नहीं होतीं.

उन सभी ने वीरवती से कहा कि छोटे भाई ने तुम्हारे साथ छल किया था, तुम ये बात उसकी पत्नी से कहो. जब छोटे भाई की पत्नी आती है तो वीरवती उससे भी कहती है कि यम की सूई लो, पिय की सूई दो, मुझे भी सुहागन बना दो. छोटी भाभी उसकी बातों को टालती है. लेकिन वीरवती उसे पकड़ लेती है और निवेदन करती है. अंत में वह तैयार हो जाती है क्योंकि वीरवती एक साल से तप कर रही थी.

वीरवती के अनुरोध पर छोटी भाभी अपनी छोटी अंगुली काट देती है और उससे अमृत निकालती है. उसे वीरवती के पति के मुख में डाल देती है. उसके प्रभाव से वीरवती का पति गणेश जी का नाम लेकर जीवित हो जाता है. जो भी महिला इस व्रत को विधिपूर्वक करता है, उसे माता पार्वती, गणेश जी और भगवान शिव के आशीर्वाद से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है.



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