गोरखपुर नगर निगम का डिजिटल सिस्टम, शिकायत ऑनलाइन, लेकिन समाधान के लिए इंतजार, समय से नहीं हो रहा निस्तारण

गोरखपुर नगर निगम का डिजिटल सिस्टम, शिकायत ऑनलाइन, लेकिन समाधान के लिए इंतजार, समय से नहीं हो रहा निस्तारण


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गोरखपुर नगर निगम ने नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए पोर्टल और टोल फ्री नंबर जैसी डिजिटल व्यवस्था शुरू की है. इसी कड़ी में लोगों की शिकायतों को आसानी से दर्ज कराने और उनके निस्तारण की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था भी शुरू की गई है. नगर निगम का पोर्टल और टोल फ्री नंबर इसी पहल का हिस्सा हैं. हालांकि, इस व्यवस्था के बीच एक सवाल यह भी है कि ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के बाद लोगों को समय पर समाधान मिल पा रहा है या नहीं.

गोरखपुर: शहर को स्मार्ट बनाने और नागरिक सुविधाओं को बेहतर करने के लिए नगर निगम की ओर से सफाई, जलनिकासी और जनसमस्याओं के समाधान की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में लोगों की शिकायतों को आसानी से दर्ज कराने और उनके निस्तारण की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था भी शुरू की गई है. नगर निगम का पोर्टल और टोल फ्री नंबर इसी पहल का हिस्सा हैं. हालांकि, इस व्यवस्था के बीच एक सवाल यह भी है कि ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के बाद लोगों को समय पर समाधान मिल पा रहा है या नहीं.

नागरिकों की सुविधा और टोल फ्री नंबर

नगर आयुक्त अजय जैन के मुताबिक, नागरिकों की सुविधा के लिए ‘8810709390’ टोल फ्री नंबर की व्यवस्था की गई है. यह नंबर सोमवार से शनिवार तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सक्रिय रहता है. इसके अलावा नगर निगम के पोर्टल के माध्यम से भी लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. शिकायतों की निगरानी को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि दर्ज शिकायतों की स्थिति पर नजर रखी जा सके. डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है. लेकिन नगर निगम में प्रत्येक मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में पहुंचने वाले कुछ फरियादियों की शिकायतें इस व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करती हैं. जनसुनवाई में कई लोग अपनी समस्याएं बताते हुए दावा करते हैं कि वे एक महीने से लेकर एक साल तक संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगा चुके हैं. कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ.

धर्मशाला क्षेत्र के निवासी दुर्गा प्रसाद भी नाली की समस्या को लेकर परेशान हैं. उनका कहना है कि उन्होंने इस संबंध में नगर निगम के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है. ऐसे मामलों में शिकायत के निस्तारण की स्थिति और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही अहम हो जाती है.

बरसात से सर्दी तक बनी रहती हैं चुनौतियां

शहर में नालियों की सफाई, जलनिकासी और सड़कों की स्थिति जैसी समस्याएं मौसम बदलने के साथ लोगों की परेशानी बढ़ा देती हैं. बरसात में जलभराव और सर्दियों में खराब सड़कों से जुड़ी दिक्कतें नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं. ऐसे में केवल शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका समयबद्ध निस्तारण भी जरूरी है. नगर निगम की डिजिटल पहल तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब शिकायतकर्ता को उसकी शिकायत की स्थिति, कार्रवाई और समाधान की जानकारी मिले, साथ ही, लंबे समय से लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था भी जरूरी है.

अब चुनौती डिजिटल सुविधा शुरू करने से आगे बढ़कर उसे भरोसेमंद बनाने की है. यदि ऑनलाइन शिकायतों की निगरानी, अधिकारियों की जवाबदेही और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित होता है, तो नागरिकों को बार-बार जनसुनवाई में पहुंचने की जरूरत कम हो सकती है.



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