गाजीपुर में 67 लाख रुपये की लागत से जर्जर सड़कों का निर्माण शुरू, सालों से धूल और गड्ढों से जूझ रहे शहरवासियों को मिली बड़ी राहत

गाजीपुर में 67 लाख रुपये की लागत से जर्जर सड़कों का निर्माण शुरू, सालों से धूल और गड्ढों से जूझ रहे शहरवासियों को मिली बड़ी राहत


गाजीपुर: जिले में पिछले 7-8 सालों से सड़कों के गड्ढे, उड़ती धूल और खराब रास्तों से जूझ रहे शहरवासियों के लिए आखिरकार एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. पिछले दो-तीन दिनों से गाजीपुर नगर में एक दुर्लभ नजारा देखने को मिल रहा है, जहां युद्ध स्तर पर शहर की जर्जर सड़कों का कायाकल्प किया जा रहा है. करीब 67 लाख रुपये के बजट से नगर की इन प्रमुख सड़कों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है.सालों की घुटन और परेशानी के बाद अचानक रास्तों को बनते देख लोग अपने घरों से बाहर निकलकर आश्चर्यचकित होकर इस बदलाव को देख रहे हैं.

इस ग्राउंड रिपोर्ट के सिलसिले में जब हमने गाजीपुर के स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के जानकारों से बात की, तो जनता के चेहरे पर राहत की खुशी तो साफ दिखी, साथ ही गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर सवाल और सुझाव भी सामने आए.

संघर्ष रंग लाया, पर सड़क कालीन जैसी पतली न हो

सड़कों के सुधार के लिए लंबी लड़ाइयां लड़ने वाले और कई वायरल वीडियो के जरिए प्रशासन का ध्यान खींचने वाले प्रद्युमन यादव ने इस पहल का स्वागत किया है .उन्होंने इसके लिए जिलाधिकारी को बधाई दी, लेकिन साथ ही एक संदेश भी दी. हमने इसके लिए कड़ा संघर्ष किया, जो आखिरकार अधिकारियों के कानों तक पहुँचा और आज सड़क बन रही है, जिसके लिए डीएम साहब बधाई के पात्र हैं. लेकिन हमारी मांग है कि सड़क को महज एक कालीन की तरह न बनाया जाए जो आज बने और कल उखड़ जाए.इसकी मोटाई और पैमाना मानकों के अनुरूप होना चाहिए.

लंका पर हादसों का दर्द, पर काम में पारदर्शिता और मानक जरूरी

स्थानीय निवासी दीपक उपाध्याय ने शहर के हालातों को बयां करते हुए बताया कि लंका क्षेत्र और सिंचाई विभाग के पास सड़कों के गहरे गड्ढों के कारण आए दिन ई-रिक्शा पलट जाते थे, लोग गंभीर रूप से घायल होते थे, और यहाँ तक कि कई लोगों की जान भी जा चुकी है. इन हादसों को लेकर हमने लड़ाइयां लड़ी थीं, जिसका फल आज सड़क के रूप में मिला है. जिलाधिकारी का यह कदम सराहनीय है, लेकिन सड़क 25 एमएम या तय मानकों के हिसाब से ही बननी चाहिए.प्रशासन को चाहिए कि निर्माण स्थल पर बोर्ड या पोस्टर लगाकर पूरा मानक सार्वजनिक करे, ताकि जनता जान सके कि काम सही गुणवत्ता से हो रहा है या नहीं.सड़क के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा नहीं होना चाहिए

चुनाव करीब आ रहा है, हो रही लीपापोती

जंगीपुर विधानसभा के रहने वाले डॉ. शम्मी कुमार सिंह ने सात साल के गड्ढे और धूल भरे दौर को याद करते हुए कहा कि सड़क बनना अच्छी बात है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि यह काम भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़े और इसकी गुणवत्ता 25 से 50 एमएम के मानकों पर खरी उतरे. गाजीपुर सदर में तो सड़कें बन रही हैं, लेकिन जंगीपुर विधानसभा साथ ही साथ पटखनिया, युवराजपुर और कालूपुर जैसे इलाकों में आज भी सड़कें गड्ढायुक्त हैं. चुनाव नजदीक आ रहे हैं, इसलिए शायद यह कोरम पूरा किया जा रहा है. लेकिन सवाल यह है कि ग्रामीण इलाकों और तहसीलों को जोड़ने वाली बदहाल सड़कों का इलाज कब होगा?

स्थानीय नागरिक कुमार प्रशांत का कहना है कि शहर में सड़क बनने से गाँवों से आने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर ठेकेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ठेकेदारों को बजट मिलता है और वे जल्दबाजी में पतली परत बिछा देते हैं. उम्मीद यही की जानी चाहिए कि इस बार बरसों बाद बनी यह सड़क टिकेगी और पूरी मजबूती के साथ मानकों के अनुसार ही रहेगी.

शिक्षक और दमा के मरीज को राहत की सांस

पेशे से शिक्षक और दमा के मरीज अवनीश प्रसाद सिंह के लिए यह सड़क किसी वरदान से कम साबित हो रही है, पिछले कई सालों से धूल और प्रदूषण के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था और मेडिकल कॉलेज में दमा के मरीजों की लाइनें लगी रहती थीं. उन्होंने कहा पिछले 5-6 सालों में तमाम जिलाधिकारी आए, किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया,मौजूदा जिलाधिकारी ने सराहनीय कदम उठाया है, मैं खुद पिछले दो-तीन दिनों से अपने स्कूटर से ट्रैवल कर रहा हूँ और मुझे बहुत राहत मिली है. कुछ लोग पैमानों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन सड़क का बनना ही अपने आप में बहुत बड़ी बात है हमें अच्छा काम करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल बढ़ाना चाहिए.

सड़क निर्माण की दे पूरी जानकारी

सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों ने इसकी मोटाई और टिकाऊपन की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है. तकनीकी मानकों के अनुसार, सड़क की निर्धारित मोटाई उसके प्रकार, निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और स्वीकृत डिजाइन पर निर्भर करती है. उदाहरण के लिए, बिटुमिनस कंक्रीट की ऊपरी परत के लिए अलग-अलग विनिर्देशों में 30–40 मिलीमीटर या 50 मिलीमीटर जैसी मोटाई निर्धारित हो सकती है. हालांकि, गाजीपुर में बन रही इन सड़कों के लिए वास्तविक मानक क्या है, इसकी पुष्टि संबंधित सड़क के स्वीकृत एस्टीमेट और तकनीकी विनिर्देशों से ही की जा सकती है. ऐसे में नगरपालिका और संबंधित विभाग से अपेक्षा है कि वे निर्माण की लागत, निर्धारित मोटाई और गुणवत्ता जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करें, ताकि लोगों को पता चल सके कि सड़क का निर्माण स्वीकृत मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं.

गाजीपुर में करीब 67 लाख रुपये की लागत से चल रहा यह सड़क निर्माण शहरवासियों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है, जहाँ एक तरफ दमा के मरीजों, बुजुर्गों और चालकों को धूल और दुर्घटनाओं से मुक्ति मिल रही है, वहीं जनता की यह माँग भी उतनी ही मजबूत है कि यह विकास सिर्फ चुनावी खानापूर्ति न बनकर रह जाए, बल्कि तय मानकों के अनुसार मजबूत और टिकाऊ हो ताकि गाजीपुर की रफ्तार पर कभी ब्रेक न लगे.



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