दुनिया में कहां पैदा हुए चमगादड़? पहले उड़ना सीखा या अंधेरे में रास्ता खोजना, विकास का रहस्य क्या है

दुनिया में कहां पैदा हुए चमगादड़? पहले उड़ना सीखा या अंधेरे में रास्ता खोजना, विकास का रहस्य क्या है


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दुनिया में कहां पैदा हुए चमगादड़? पहले उड़ना सीखा या अंधेरे में रास्ता खोजना

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चमगादड़ों की जन्मस्थली संभवत: यूरोप है. अब तक इस सवाल का जवाब तलाशने में एक बड़ी मुश्किल यह रही है कि पक्षियों के उलट, चमगादड़ों के फॉसिल में उनके विकास की शुरुआती दौर के सबूत बहुत कम मिलते हैं. पक्षियों के जीवाश्मों का रिकॉर्ड इतना समृद्ध है कि उससे डायनासोर से मुर्गी तक जैसे पक्षियों एवं जानवरों के विकास की कड़ी को समझा जा सकता है.

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चमगादड़

दशकों से वैज्ञानिक इस सवाल पर बहस करते रहे हैं कि चमगादड़ों की उत्पत्ति कहां हुई थी? ‘नेचर’ मैगजीन में हाल में पब्लिश एक स्टडी इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए नए सबूत पेश करता है. ‘डीएनए’ और जीवाश्मों के साथ इंटरनैशनल लेवल पर कई गई स्टडी इस बात का समर्थन करती हैं कि चमगादड़ों की जन्मस्थली संभवत: यूरोप है. अब तक इस सवाल का जवाब तलाशने में एक बड़ी मुश्किल यह रही है कि पक्षियों के उलट, चमगादड़ों के फॉसिल में उनके विकास की शुरुआती दौर के सबूत बहुत कम मिलते हैं. पक्षियों के जीवाश्मों का रिकॉर्ड इतना समृद्ध है कि उससे डायनासोर से मुर्गी तक जैसे पक्षियों एवं जानवरों के विकास की कड़ी को समझा जा सकता है, लेकिन जब वैज्ञानिकों को चमगादड़ों के जीवाश्म मिलते हैं, तो वे लगभग पूरी तरह विकसित चमगादड़ों के ही होते हैं.

चमगादड़ों के बारे में अब तक क्या पता था?
चमगादड़ उड़ान भरने और हवा में बने रहने के लिए सक्रिय रूप से अपने पंखों का इस्तेमाल करने वाले इकलौते स्तनधारी हैं. पहले की गई स्टडी में अमेरिका, अफ्रीका या एशिया को उनकी संभावित जन्मस्थली बताया गया था. अलग-अलग आंकड़ों और गणना के तरीकों से अलग-अलग नतीजे सामने आए.

अब तक मिले चमगादड़ों के सबसे पुराने ज्ञात कंकाल अमेरिका के वायोमिंग में मिले थे. ये करीब 5.2 करोड़ साल पुराने हैं और भूवैज्ञानिक काल के प्रारंभिक इयोसीन युग के हैं. पंखों को सहारा देती इनकी लंबी उंगलियां इस बात का संकेत हैं कि उस समय तक चमगादड़ उड़ने में सक्षम हो चुके थे.

हालांकि सबसे पुराने ज्ञात जीवाश्म जहां मिले हैं, जरूरी नहीं कि वही जगह हो जहां किसी जीव-समूह का विकास पहली बार हुआ हो. फिर भी, ये जीवाश्म शुरुआती चमगादड़ों की शारीरिक बनावट, उनके आपसी विकासवादी संबंधों और उनके भौगोलिक फैलाव को समझने में अहम सुराग देते हैं. अब तक जिस चीज की कमी रही है, वह ऐसे जीवाश्मों की पूरी सीरीज है, जिससे उड़ान ना भर पाने वाले पूर्वजों से लेकर उड़ने वाले शुरुआती चमगादड़ों तक के विकास का पता चल सके.

अधिकतर चमगादड़ प्रतिध्वनि यानी इको के सहारे रास्ता खोजते हैं. यह सोनार जैसा एक सिस्टम है, जिसमें वे आवाजें निकालते हैं और उनसे लौटने वाली प्रतिध्वनि के आधार पर दिशा पहचानते और भोजन खोजते हैं. चमगादड़ों की उत्पत्ति कहां हुई, इस सवाल के साथ ही वैज्ञानिक इस बात पर भी बहस करते रहे हैं कि उड़ने और इको के सहारे रास्ता खोजने की क्षमता का विकास कैसे हुआ. क्या पहले उड़ने की क्षमता विकसित हुई या प्रतिध्वनि के सहारे रास्ता खोजने की? अथवा दोनों क्षमताएं एक साथ विकसित हुईं?

जीवाश्म चमगादड़ प्रजाति ‘ओनिकोनिक्टेरिस’ पर 2008 में की गई स्टडी से इस विचार को समर्थन मिला कि उड़ने की क्षमता पहले विकसित हुई थी. उसके पंखों की बनावट से संकेत मिलता था कि वह उड़ सकता था, जबकि उसके कानों की संरचना से पता चलता था कि वह प्रतिध्वनि के सहारे रास्ता नहीं खोज सकता था. हालांकि, 2010 में की गई स्टडी में ओनिकोनिक्टेरिस की शारीरिक बनावट की तुलना आज के दौर के जिंदा चमगादड़ों से की गई और इस नतीजे पर सवाल उठाए गए.

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