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Where is Shinkula Pass: हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में स्थित शिंकुला दर्रा बर्फबारी के बाद भी सैलानियों के लिए खुला है. माइनस 6 से माइनस 8 डिग्री तापमान और कड़ाके की ठंड के बावजूद पर्यटकों का भारी उत्साह देखने को मिल रहा
केलांग. हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी के बाद भी लाहौल-स्पीति के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल शिंकुला दर्रे सैलानियों और आम लोगों के लिए खुला है. ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों और सैलानियों को को इन दिनों बर्फ की खूबसूरत वादियां अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं.
हाल ही में पिछले दिनों हुई बर्फबारी के बाद यहां चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछी हुई है. प्रकृति के इस अद्भुत नजारे को करीब से देखने के लिए रोजाना सैकड़ों की संख्या में पर्यटक शिंकुला दर्रे का रुख कर रहे हैं. हालांकि, यहां तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है और कड़ाके की ठंड के बावजूद सैलानियों के जोश और उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आ रही है.
लाहौल घाटी के शिंकुला दर्रे में बर्फबारी के बाद कुदरत का खूबसूरत नजारा देखने को मिल रहा है और ठंड से कि यहां बहने वाले नालों का पानी भी जमने लगा है. तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे पहुंचने के बावजूद पर्यटक इस बर्फीली वादी का दीदार करने के लिए लगातार पहुंच रहे हैं.
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शिंकुला दर्रे में तापमान लगभग माइनस 6 से माइनस 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. इसके बावजूद बर्फ से ढके पहाड़ों और प्राकृतिक सुंदरता को अपने कैमरों में कैद करने के लिए सैलानियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है.
शिंकुला दर्रे की ओर जाने वाला सड़क मार्ग सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही के लिए खुला बताया जा रहा है. हालांकि, ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल सकता है. ऐसे में पर्यटकों के लिए यात्रा से पहले सड़क और मौसम की ताजा स्थिति की जानकारी लेना बेहद जरूरी है. अक्तूबर महीने के अंत तक यह मार्ग बर्फबारी के चलते अगले छह माह तक बंद हो जाएगा और फिर गर्मियों में खुलता है. दारचा से शिंकुला के लिए रास्ता जाता है जो कि आगे जांस्कार और कारगिल को जोड़ता है.
मिलता है.
कहां है शिंकुला पासः हिमाचल और लद्दाख की सीमा पर शिंकुला पास है और यह 16000 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है. जहां पर ऑक्सीजन की कमी भी रहती है. मनाली से शिंकुला पास के लिए करीब 3-4 घंटे का वक्त लगता है. अगर सुबह आप मनाली से चलेंगे तो शाम को मनाली लौट सकते हैं. करीब 180 किमी का यह सफर है. शिंकुला में भारत सरकार टनल का भी निर्माण कर रही है.
10 किमी आगे गैंबो रंजनः शिंकुला पास से पांच किमी आगे लद्दाफ की सीमा में गैंबो रंजन पर्वत है, जिसे देखने के लिए भी काफी लोग आते हैं. यहां पर सैलानियों के रहने के लिए कैंपिग भी है. मनाली से यहां तक आना दिन एक दिन में संभव हैं. हालांकि, अपने साथ सैलानी पानी और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस से जुड़ी दवाएं भी जरूर ले जाएंगे. क्योंकि ऑक्सीजन कम होने की वजह से सिरदर्द और चक्कर आ सकता है.