1 नवंबर को दिल्ली में होने जा रही कांग्रेस की महारैली से व्यापारियों में डर बढ़ गया है. व्यापारियों ने इस रैली में 10 लाख लोगों के 20000 वाहनों से दिल्ली के 20 बाजारों में चक्का जाम लगने की आशंका जताई है. लिहाजा दिल्ली के कारोबारियों ने इस महारैली को दिवाली बाद शिफ्ट करने मांग की है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने इसे लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखा है.
दिल्ली में व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को एक विस्तृत पत्र लिखकर 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित 10 लाख लोगों की महारैली को दिवाली के बाद शिफ्ट करने की मांग की है.
CTI ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी इस पत्र की प्रति भेजी है और उनके द्वारा सहयोगी दलों से चर्चा करने की मांग की है.
सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि कल राहुल गांधी जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापारियों के नाम संबोधन भेजा था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वो दीवाली के इस पीक सीजन में 1 नवंबर को रैली करके ही दम लेंगे.
उनके इस बयान के बाद रामलीला मैदान के आसपास 20 बड़े बड़े बाजारों के व्यापारियों में चिंता और निराशा बढ़ गई है और पैनिक का माहौल पैदा हो गया है.
- व्यापारियों को डर सता रहा है कि क्या 31 अक्टूबर को ही बैरिकेडिंग हो जाएगी और क्या रास्ते बंद हो जाएंगे ?
- क्या 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को दुकानें खुल पाएंगी और क्या ग्राहक दुकानों पर पहुंच पाएंगे ?
- 10 लाख लोग आएंगे तो 15,000 से 20,000 वाहन भी आएंगे?
- पार्किंग कहां होगी?
- पत्र में कहा गया कि कांग्रेस के बड़े बड़े नेता खुलकर बोल रहे हैं कि पूरे भारत से 10 लाख लोग इस रैली में शामिल होने के लिए आने वाले हैं. CTI ने अपने कैलकुलेशन में बताया है कि
- . 50 लोग प्रति बस के हिसाब से भी 10,000 से 12,000 बड़ी बसें
- * 5,000 से 7,000 छोटी गाड़ियां (कार, टेंपो ट्रैवलर, मिनी बस, ई-रिक्शा)
- * कुल 15,000 से 20,000 वाहनों का काफिला दिल्ली में प्रवेश करेगा.
सीटीआई का कहना है कि सवाल ये है कि ये 20,000 गाड़ियां जाएंगी कहां और पार्क कहां होंगी? रामलीला मैदान के आसपास 200 गाड़ियों की भी अधिकृत पार्किंग नहीं है. रामलीला मैदान के आसपास के 20 बड़े होलसेल और रिटेल बाजार सीधे प्रभावित होंगे.
CTI ने स्पष्ट किया है कि रामलीला मैदान चारों तरफ से दिल्ली के सबसे बड़े होलसेल और रिटेल बाजारों से घिरा है. रामलीला मैदान तक पहुंचने का हर रास्ता इन्हीं बाजारों से होकर गुजरता है, दिल्ली-6 की गलियां 10-12 फीट चौड़ी हैं, जहां एक ट्रक फंसने से 3 घंटे जाम लगता है.
महारैली से प्रभावित हो सकते हैं ये 20 प्रमुख बाजार
- 1. चांदनी चौक ( विश्व प्रसिद्ध बाजार जिसके अंदर 100 बड़े बड़े कटरे )
- 2. भागीरथ पैलेस (एशिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिकल मार्केट)
- 3. खारी बावली (एशिया की सबसे बड़ी मसाला मार्केट और ड्राई फ्रूट्स मार्केट)
- 4. सदर बाजार ( 40 हजार दुकानों का प्रसिद्ध बाजार )
- 5. चावड़ी बाजार ( हार्डवेयर और सेनिटरी के लिए विश्व प्रसिद्ध )
- 6. कश्मीरी गेट ( एशिया की सबसे बड़ी ऑटो पार्ट्स मार्केट )
- 7. नबी करीम ( लैदर और रेक्सीन उत्पादों के लिए मशहूर )
- 8. करोल बाग
- 9. अजमेरी गेट
- 10. दरियागंज / किताब मार्केट
- 11. नई सड़क
- 12. किनारी बाजार
- 13. दरीबा कलां / ज्वेलरी मार्केट
- 14. फतेहपुरी
- 15. लाहौरी गेट / मशीनरी मार्केट
- 16. फिल्मिस्तान / फर्नीचर मार्केट
- 17. पहाड़गंज
- 18. गफ्फार मार्केट
- 19. जामा मस्जिद / मीना बाजार
- 20. लाल किला / लाजपत राय मार्केट
- 21. नया बाजार ( अनाज मंडी )
CTI का कहना है कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मात्र 3 – 4 हजार लोगों के कार्यक्रम से ही पूरी सेंट्रल दिल्ली सील हो गई थी और व्यापारियों को 3000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. 1 नवंबर को 10 लाख लोगों की रैली होने पर पूरा पुरानी दिल्ली का व्यापार ठप्प हो जाएगा और 10 हजार करोड़ रुपए का नुक़सान होगा .
CTI की मांग क्या है?
CTI ने मांग की है कि जनहित और व्यापारी हित में इस रैली को 10 नवंबर, भैया दूज के बाद आयोजित किया जाए. अगर रैली 1 नवंबर को ही करनी अनिवार्य है तो इसे रामलीला मैदान की जगह बुराड़ी ग्राउंड या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जैसे खुले स्थान पर शिफ्ट किया जाए, जहां बाजारों पर असर न पड़े.