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Balrampur News : उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में 20.515 किलोमीटर लंबी रिंग रोड का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. इसका 60% से अधिक कार्य पूरा हो चुका है. गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर के बीच आवागमन भी बेहद आसान और सुगम हो जाएगा.
बलरामपुर रिंग रोड. (एआई तस्वीर)
बलरामपुर : उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां रहने वाले लोगों को आने वाले समय में ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. शहर के बाहर बन रहा रिंग रोड न केवल स्थानीय लोगों का सफर आसान करेगा, बल्कि गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर के बीच आवागमन को भी सुगम बनाएगा. करीब 515.89 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस बाईपास का 60.50 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. परियोजना को 30 जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
शहर के भीतर नहीं फंसेंगे बाहरी वाहन
बलरामपुर में अक्सर बाहरी वाहनों के शहर से होकर गुजरने के कारण यातायात का दबाव बढ़ जाता है. खासकर व्यस्त सड़कों पर लोगों को जाम के चलते परेशानी उठानी पड़ती है. ऐसे में रिंग रोड बनने के बाद शहर से बाहर जाने वाले और दूसरे जिलों की ओर जाने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिल सकती है. वाहन शहर के अंदर प्रवेश किए बिना ही बाईपास के रास्ते आगे निकल सकेंगे. इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जिन्हें रोजाना काम, पढ़ाई, कारोबार या दूसरे जरूरी कामों के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में आना-जाना पड़ता है. बाहरी वाहनों का दबाव कम होने से शहर की सड़कों पर यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है.
16 गांवों से होकर गुजरेगा
इस परियोजना के तहत 20.515 किलोमीटर लंबा बाईपास बनाया जा रहा है. यह सड़क 16 गांवों से होकर गुजरेगी. परियोजना पर कुल 515.89 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. अब तक 60.50 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. बाकी काम को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने की तैयारी है. रिंग रोड के तैयार होने से शहर की करीब दो लाख आबादी को ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, इसका वास्तविक असर सड़क शुरू होने और यातायात व्यवस्था सुचारु होने के बाद दिखाई देगा.
व्यापार और आवागमन को भी मिलेगा बढ़ावा
बलरामपुर रिंग रोड का फायदा सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रहेगा. गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर के बीच आने-जाने वाले लोगों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है. इससे माल ढुलाई, व्यापारिक गतिविधियों और दूसरे जिलों तक पहुंचने में आसानी हो सकती है. परियोजना पूरी होने के बाद भारी और बाहरी वाहनों को शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से गुजरने की जरूरत कम होगी. इससे समय की बचत के साथ ईंधन की खपत कम करने में भी मदद मिल सकती है. अब लोगों की नजरें 30 जनवरी 2027 की तय समय सीमा पर हैं. अगर निर्माण कार्य समय पर पूरा हो जाता है, तो बलरामपुर के यातायात की तस्वीर बदल सकती है.