‘कौन सुनेगा, अब किससे करेंगे फरियाद…’ पूर्व PM चंद्रशेखर के निधन के बाद चर्चा में आया था ये खत, बलिया में माफियाओं की नहीं चलती थी हनक!

‘कौन सुनेगा, अब किससे करेंगे फरियाद…’ पूर्व PM चंद्रशेखर के निधन के बाद चर्चा में आया था ये खत, बलिया में माफियाओं की नहीं चलती थी हनक!


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Ballia Latest News: बलिया की धरती ने देश को एक ऐसा प्रधानमंत्री दिया, जिसकी सियासी हनक और जनता से जुड़ाव की कहानियां आज भी सुनाई जाती हैं. पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के जीवित रहते बलिया में अपराधियों और माफियाओं की दहशत को लेकर जो छवि बनी, उसकी चर्चा आज भी होती है. उनके निधन के बाद इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय को लिखा गया एक पत्र खासा चर्चित हुआ था.

बलिया: उत्तर प्रदेश के जनपद बलिया के युवा तुर्क और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की शख्सियत बेहद रोचक और भावनात्मक रही है. वे देश के ऐसे राजनेता थे जो सीधे देश के प्रधानमंत्री बने थे. उनके जीते जी बलिया में किसी भी माफिया की कदम रखने की मजाल नहीं थी और यह चंद्रशेखर की ही हनक थी जिसकी चर्चा आज भी होती है. उनके निधन के बाद उनका एक पत्र खूब सुर्खियों में रहा, जिसमें लिखा था कि कौन सुनेगा, अब किससे करेंगे फरियाद…

प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहा कि, बलिया जनपद के चंद्रशेखर जी सीधे देश के प्रधानमंत्री बने थे. उनके जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर भारत सरकार और विभिन्न संगठनों द्वारा कई आयोजन किए जा रहे हैं. वर्ष 1997 में जब बलिया में अपराध बहुत बढ़ गए थे और चंद्रशेखर जी किन्हीं परिस्थितियों में बलिया से बाहर थे, तब कौशिकेय ने जो उस समय व्यापार मंडल के जिला महामंत्री थे, उन्हें एक पत्र लिखकर जिले में बढ़ते अपराधों की जानकारी दी थी.

पत्र मिलते ही चंद्रशेखर जी बहुत नाराज हुए और उन्होंने उत्तर में लिखा कि वे इस संदर्भ में राज्यपाल और जिलाधिकारी समेत सभी संबंधित लोगों से बात कर रहे हैं और इस पर कड़ी कार्रवाई होगी. उन्होंने बलिया में अपराध को कम कराया भी.

बलिया एक तरफ गाजीपुर जिले से जुड़ा था, जहां माफिया मुख्तार अंसारी का राज चलता था और दूसरी तरफ बिहार का सिवान जिला लगता था, जहां शहाबुद्दीन नाम का माफिया सक्रिय था. लेकिन जब तक चंद्रशेखर जीवित रहे, किसी भी माफिया की बलिया की सीमा के अंदर पैर रखने की हिम्मत नहीं हुई. वर्ष 2007 में उनके देहांत के बाद कौशिकेय को लिखा गया, उनका वह पत्र और उनकी शवयात्रा की तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं.

उस दौर में आज की तरह मोबाइल फोन का प्रचलन बहुत ज्यादा नहीं था, फिर भी समाचार पत्रों ने प्रमुखता से छापा था कि चंद्रशेखर के जीते जी बलिया में कोई माफिया कदम नहीं रख सका. कौन सुनेगा, अब किससे करेंगे फरियाद… दिल्ली में लोग उन्हें नेताओं का नेता कहते थे, लेकिन अपने लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंदर उन्होंने कभी किसी माफिया को टिकने नहीं दिया था. आज भी बलिया की मिट्टी में जन्मे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को बेहद भावनात्मक रूप से याद किया जाता है. इनकी तमाम कहानियां हैं, जो आज हमेशा आपस में चर्चा करते रहते हैं.



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