नई दिल्ली (Scholarship to Study Abroad). हर साल लाखों युवा विदेश की बेहतरीन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने का सपना देखते हैं. लेकिन अक्सर भारी-भरकम फीस और रहने-खाने के महंगे खर्च की वजह से कई बच्चों का यह सपना अधूरा रह जाता है. दुनियाभर की यूनिवर्सिटीज और सरकारें टैलेंटेड स्टूडेंट्स को फाइनेंशियल मदद देने के लिए ढेरों स्कॉलरशिप्स ऑफर करती हैं. इसे हासिल करने के लिए सही स्ट्रैटेजी और समय पर की गई सटीक तैयारी की जरूरत होती है.
स्कॉलरशिप के लिए प्रोफाइल को दमदार कैसे बनाएं?
स्कॉलरशिप कमेटी सबसे पहले यह देखती है कि आप बाकी उम्मीदवारों से अलग क्यों हैं. इसके लिए अपने प्रोफाइल को मजबूत करना होगा. सिर्फ किताबी कीड़ा होना काफी नहीं है. लीडरशिप स्किल्स, सोशल वर्क, इंटर्नशिप और किसी खास प्रोजेक्ट में आपका योगदान बायोडेटा में चमकना चाहिए. इसके अलावा, IELTS या TOEFL जैसे लैंग्वेज टेस्ट और जीआरई (GRE) या जीमैट (GMAT) में बेहतरीन स्कोर आपकी दावेदारी को मजबूत बना सकता है.
विदेशी स्कॉलरशिप के लिए किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी?
किसी भी स्कॉलरशिप एप्लीकेशन की जान उसके डॉक्यूमेंट्स होते हैं. इनमें कोई भी कमी रह जाने पर आवेदन रद्द हो सकता है. स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करते समय इन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ सकती है:
- SOP (स्टेटमेंट ऑफ पर्पस): इस लेटर में बताएं कि आप इस स्कॉलरशिप के असली हकदार क्यों हैं.
- LOR (लेटर ऑफ रिकमेंडेशन): प्रोफेसर्स या बॉस की तरफ से लिखा गया यह पत्र आपकी काबिलियत की गवाही देता है.
- एकेडमिक ट्रांसक्रिप्ट्स: पिछले सभी सालों की मार्कशीट और डिग्री.
- फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट: कई बार नीड-बेस्ड स्कॉलरशिप के लिए इनकम प्रूफ की भी जरूरत पड़ती है.
डेडलाइन का रखें खास ख्याल
‘कल करे सो आज कर’ वाली कहावत विदेश की पढ़ाई के मामले में सौ फीसदी सच साबित होती है. ज्यादातर इंटरनेशनल स्कॉलरशिप्स की डेडलाइन यूनिवर्सिटी के एडमिशन फॉर्म से महीनों पहले बंद हो जाती हैं. आखिरी समय पर फॉर्म भरने पर कई बार जरूरी डॉक्यूमेंट्स तैयार नहीं हो पाते और हाथ आया मौका निकल जाता है. इसलिए यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर सभी तारीखों का कैलेंडर बना लें और समय से पहले अपनी एप्लीकेशन सबमिट कर दें.
समझें रिसर्च और नेटवर्किंग की ताकत
ज्यादातर स्टूडेंट्स सिर्फ पॉपुलर स्कॉलरशिप्स के पीछे भागते हैं. लेकिन उनमें कॉम्पिटीशन का स्तर बहुत ज्यादा होता है. इसके बजाय, ऐसे छोटे ट्रस्ट, फाउंडेशन और डिपार्टमेंटल ग्रांट्स ढूंढने चाहिए, जिनके बारे में कम लोग जानते हैं. लिंक्डइन (LinkedIn) या उस यूनिवर्सिटी के एलुमनी से बात करें जो पहले ही वहां पढ़ रहे हैं. उनके अनुभव से समझने में मदद मिलेगी कि स्कॉलरशिप कमेटी असल में किस तरह के उम्मीदवारों को चुनना पसंद करती है.
विदेश में स्कॉलरशिप पाना कोई जादू नहीं, बल्कि प्लान्ड प्रोसेस है. अगर डॉक्यूमेंट्स तैयार हैं, समय पर आवेदन करते हैं और अपनी यूनीक स्टोरी को सही तरीके से प्रेजेंट करते हैं तो स्कॉलरशिप जरूर मिलेगी.