दिल्ली को मिलेगा सबसे लंबा साइकिल कॉरिडोर, यमुना किनारे क्या-क्या होगा खास?
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दिल्लीवालों के लिए अच्छी खबर है. यमुना के किनारे राजधानी में 52 किलोमीटर लंबा साइकिल और वॉकिंग कॉरिडोर बनाने की योजना आगे बढ़ रही है. DDA ने पहले फेज के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं. इसमें पुराने रेलवे पुल से NH-9 तक 24 किलोमीटर का ट्रैक बनाया जाएगा. इस हिस्से पर करीब 16.4 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है. योजना में सौर पैनल, एलईडी लाइटें, साइकिल पार्किंग, आराम करने की जगहें और नदी का नजारा देखने के लिए डेक शामिल हैं. पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के बाद रूट में बदलाव किया गया है. पूरा कॉरिडोर तीन फेजों में विकसित होगा और कई पार्कों को जोड़ने में मदद कर सकता है.
दिल्ली में यमुना किनारे 52 किलोमीटर लंबा साइकिल और वॉकिंग कॉरिडोर बनाने की योजना आगे बढ़ी है. (फोटो AI)
दिल्ली में साइकिल चलाने और नदी के किनारे सुकून के पल बिताने का शौक रखने वालों के लिए अच्छी खबर है. राजधानी में यमुना के किनारे 52 किलोमीटर लंबा साइकिल और वॉकिंग कॉरिडोर बनाने की योजना अब आगे बढ़ रही है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने इसके पहले फेज के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं. इस फेज में यमुना के पश्चिमी किनारे पर 24 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाया जाएगा. यह पुराना रेलवे पुल से नेशनल हाईवे-9 तक फैलेगा. इसके निर्माण पर करीब 16.4 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है. योजना पूरी होने पर दिल्लीवालों को साइकिलिंग और पैदल घूमने के लिए एक नया रास्ता मिलेगा.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रोजेक्ट सिर्फ साइकिल चलाने वालों के लिए ट्रैक बनाने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए यमुना के बाढ़ क्षेत्र को बेहतर बनाने और लोगों को प्रकृति के करीब लाने की कोशिश भी की जाएगी. पूरे कॉरिडोर को तीन फेजों में विकसित करने की योजना है. इसमें सौर ऊर्जा से चलने वाली सुविधाएं और एलईडी लाइटें लगाने के साथ हरियाली भी विकसित की जाएगी. ट्रैक के लिए ऐसी सामग्री इस्तेमाल करने की योजना है जिससे पानी जमीन में समा सके. साथ ही आराम करने की जगहें और नदी का नजारा देखने के लिए डेक भी बनाए जाएंगे. पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए इसके रूट में बदलाव भी किए गए हैं.
पहले फेज में 24 किलोमीटर का ट्रैक बनेगा
DDA के मुताबिक पहले फेज में यमुना के पश्चिमी किनारे पर पुराने रेलवे पुल से NH-9 तक साइकिल ट्रैक विकसित किया जाएगा. इसके निर्माण की अनुमानित लागत 16.4 करोड़ रुपए रखी गई है. प्रोजेक्ट से जुड़े काम में करीब छह से सात महीने लगने का अनुमान है. ट्रैक के साथ सौर पैनल, एलईडी लाइटें और अन्य रोशनी की व्यवस्था की जाएगी. बागवानी के जरिए आसपास के क्षेत्र में हरियाली बढ़ाई जाएगी. हालांकि पूरे 52 किलोमीटर के कॉरिडोर का विकास अलग-अलग फेजों में होना है.
साइकिल ट्रैक पर मिलेंगी कई सुविधाएं
इस कॉरिडोर को इस्तेमाल करने वालों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा. इसमें साइकिल पार्क करने की जगह और डॉकिंग स्टेशन बनाए जाने की योजना है. रास्ते में छायादार विश्राम स्थल और नदी का नजारा देखने के लिए व्यूइंग डेक भी होंगे. रास्ता पहचानने के लिए संकेतक लगाए जाएंगे. अधिकारियों के मुताबिक ट्रैक को इस तरह विकसित किया जाएगा कि बाढ़ क्षेत्र की प्राकृतिक बनावट और पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे. इससे साइकिलिंग के साथ पैदल घूमने वालों को भी फायदा मिल सकता है.
पर्यावरण से जुड़ी आपत्तियों के बाद बदला गया रूट
इस परियोजना को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की प्रधान समिति से अप्रैल में मंजूरी मिली थी. इससे पहले विशेषज्ञों ने प्रस्तावित रास्ते की दिशा और पर्यावरण पर उसके असर को लेकर चिंताएं जताई थीं. इसके बाद योजना में बदलाव किए गए. अब ट्रैक को नदी के संवेदनशील किनारों से दूर रखते हुए मौजूदा तटबंधों और पहले से बने रास्तों के सहारे विकसित करने की योजना है. इसका उद्देश्य पूरे साल इस्तेमाल होने वाला रास्ता तैयार करना और यमुना के बाढ़ क्षेत्र की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखना है.
52 किलोमीटर का कॉरिडोर कई पार्कों को जोड़ेगा
दिल्ली के मास्टर प्लान 2047 में यमुना के किनारे 52 किलोमीटर लंबे साइकिल और वॉकिंग ट्रैक का प्रस्ताव शामिल है. यह परियोजना तीन फेजों में विकसित होगी. इसकी योजना वजीराबाद यमुना पुल से NH-9 और फिर कालिंदी कुंज बायोडायवर्सिटी पार्क तक रास्ता जोड़ने की है. DDA यमुना के बाढ़ क्षेत्र में 1,700 हेक्टेयर से अधिक जमीन को जैव विविधता और सार्वजनिक उपयोग के लिहाज से विकसित करने की व्यापक योजना पर भी काम कर रहा है. असिता, बांसरा, कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क, यमुना वाटिका और अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क जैसी कई परियोजनाएं पहले ही विकसित की जा चुकी हैं. नया ट्रैक इन स्थलों को जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है.