बैंक FD में लगाएं पैसा लेकिन नए अंदाज में, ये ट्रिक दिलाएगी ज्यादा ब्याज, कैश की भी नहीं होगी किल्लत

बैंक FD में लगाएं पैसा लेकिन नए अंदाज में, ये ट्रिक दिलाएगी ज्यादा ब्याज, कैश की भी नहीं होगी किल्लत


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FD Investment Strategy : अगर आप एफडी पर बेहतर रिटर्न चाहते हैं तो लैडरिंग रणनीति अपनी चाहिए. इसमें आप अपनी पूरी रकम एक ही एफडी में जमा करने के बजाय उसे अलग-अलग एफडी में बांट देते हैं. इससे आपको ब्‍याज तो ज्‍यादा मिलता ही है, साथ ही लिक्विडिटी भी बनी रहती है.

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एफडी में पैसा डूबने का खतरा नहीं होता.

नई दिल्‍ली. बढिया रिटर्न, पैसा डूबने का खतरा न के बराबर होने और जरूरत पड़ने पर पैसा आसानी से हाथ में आने जैसी खूबियों ने फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट (Fixed Depost) को एक शानदार निवेश विकल्‍प बना दिया है. भारत में लोग एफडी में खूब पैसा लगाते हैं. अब तो भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट (RBI Rapo Rate Hike) में भी इजाफा कर दिया है. इसके बाद अब बैंक एफडी पर ब्‍याज बढ़ना लगभग तय ही है. आपको भी अगर एफडी पर ज्‍यादा ब्‍याज और लिक्विडिटी चाहिए तो, एक ट्रिक आजमानी चाहिए. ये वो नुस्‍खा है जिसे अपनाकर स्‍मार्ट इन्‍वेस्‍टर्स हमेशा एफडी पर और से ज्‍यादा ब्‍याज पाते हैं. इस स्मार्ट तरीके का नाम है ‘एफडी लैडरिंग’ (FD Ladder Strategy), जिसके जरिए अधिक रिटर्न के साथ-साथ पैसों की किल्‍लत भी कभी नहीं होती.

ज्‍यादा ब्‍याज और लिक्विडिटी हासिल करने की इस रणनीति को अपनाने में ज्‍यादा गुणा भाग नहीं करना पड़ता है. इसका फंडा साफ है. आपको जितना पैसा एफडी में लगाना है, उसे बांटकर लगाइये. मतलब एक ही अवधि की फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट में अपना सारा पैसा लगा देने की बजाय उन पैसों को तीन भागों में बांटिए. पहला हिस्सा 1 साल की अवधि वाली एफडी में लगाएं. दूसरा हिस्सा 3 साल की अवधि के लिए लगाएं. तीसरा हिस्सा 5 साल की लंबी अवधि के लिए फिक्स करें. जैसे ही 1 साल वाली पहली एफडी मैच्योर होगी, उसे दोबारा 3 या 5 साल की नई अवधि के लिए री-इन्वेस्ट कर दें. इस तरह एफडी की एक निरंतर ‘सीढ़ी’ तैयार हो जाती है, जिससे हर साल या निश्चित अंतराल पर आपका कोई न कोई फंड मैच्योर होता रहता है.

ज्यादा मिलेगा ब्याज

लेडर रणनीति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि आपको अपने पूरे पैसे पर एक समान ब्याज नहीं मिलता, बल्कि अलग-अलग अवधियों के हिसाब से अधिकतम रिटर्न हासिल होता है. आमतौर पर बैंक 3 साल या मध्यम अवधि की एफडी पर ज्‍यादा ब्‍याज देते हैं. इसके अलावा, यदि भविष्य में बैंक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करते हैं तो मैच्योर हुई रकम को तुरंत नई और ऊंची दरों पर दोबारा निवेश करने का मौका मिलता है.

हाथ में बना रहेगा कैश

सारा पैसा एक ही एफडी में डालने का नुकसान यह होता है कि पूरी पूंजी लंबे समय के लिए लॉक हो जाती है. अचानक जरूरत पड़ने पर पूरी एफडी तुड़वानी पड़ती है, जिस पर बैंक प्री-मैच्योर पेनल्टी लगाते हैं और ब्याज का भारी नुकसान होता है. लैडरिंग तकनीक में चूंकि अलग-अलग समय पर एफडी मैच्योर होती रहती हैं, इसलिए हाथ में नकदी की उपलब्धता बनी रहती है. अगर कोई मेडिकल या घरेलू इमरजेंसी आ भी जाए, तो पूरी रकम की जगह केवल एक छोटी एफडी तोड़कर काम चलाया जा सकता है.

समय-समय पर मिलने वाला यह मैच्योरिटी फंड आपको अचानक पैसे की किल्लत होने पर पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड जैसे महंगे कर्ज के जाल में फंसने से बचाता है. बच्चों की पढ़ाई, घर की मरम्मत, कार खरीदने या रिटायरमेंट के बाद नियमित पैसे का फ्लो बनाए रखने में भी यह रणनीति कारगर साबित होती है.

इन बातों का रखें ख्‍याल

एफडी लैडरिंग रिटर्न को ऑप्टिमाइज़ करने का बेहतरीन जरिया है, लेकिन निवेश से पहले टैक्स ब्रैकेट और री-इन्वेस्टमेंट की योजना को समझना जरूरी है. समय से पहले निकासी पर पेनल्टी से बचने के लिए हमेशा एक अलग इमरजेंसी फंड साथ रखें और अपने फाइनेंशियल गोल्‍स के अनुसार ही एफडी टेन्‍योर चुनें.



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