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Mau Crime News: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला आया है. 2016 के एक हत्या मामले में आरोपी राजकुमार राजभर उर्फ राजू पुलिस और कानून को चकमा देकर फरार हो गया. उसने करोड़ों रुपये लौटाने से बचने के लिए अपनी ही मौत शातिर चाल चलकर फरार हो गया. आखिर क्या है असली मामला, क्यों इतना चर्चा में चलिए जानते हैं.
मऊ/लखनऊ: अपराधी कानून की पकड़ से बचने के लिए किस हद तक जा सकते हैं, इसका एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला उत्तर प्रदेश के मऊ से सामने आया है. 2016 में एक हत्याकांड में ट्रायल का सामना कर रहे आरोपी कानून और पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया. उसने खुद की मौत की कहानी रच डाली. इतना ही नहीं, उसने अपना चिता सजाया, आग लगाया और तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर दी. वह केवल हत्या का आरोपी नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के ठगी में भी नामजद था. इस पूरे खेल में उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से की.
पुलिस के अनुसार, पकड़ा गया आरोपी राजकुमार राजभर उर्फ राजू (38) मऊ के कोतवाली नगर थाना क्षेत्र का रहने वाला है. कक्षा 12 तक की पढ़ाई करने वाला राजकुमार शेयर बाजार (Stock Market) में ट्रेडिंग का काम करता था. उसने कई बड़े शहरों के रसूखदार लोगों से यह कहकर भारी मात्रा में पैसे इकट्ठा किए थे कि वह उनके पैसों को शेयर बाजार में निवेश कर मोटा मुनाफा दिलाएगा. लेकिन जब निवेशकों ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए और वर्ष 2016 के योगेश सिंह हत्याकांड में उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने लगा, तो उसने पुलिस और कोर्ट को चकमा देने के लिए यह शातिर षड्यंत्र रचा.
गाजीपुर में रची गई बकरे के अंतिम संस्कार की साजिश
अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) अनूप कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी ने 30 मई 2025 को गाजीपुर में अपनी मौत का झूठा ताना-बाना बुना था. अपनी योजना को सच साबित करने के लिए उसने एक बकरे की मौत के बाद उसका पारंपरिक तरीके से अंतिम संस्कार किया और उसकी अर्थी व अंतिम यात्रा का पूरा नाटक रचा. इसके बाद उसने एआई (AI) तकनीक का सहारा लिया और चिता पर लेटे हुए बकरे के शरीर पर अपना चेहरा मॉर्फ करके एक बेहद शातिर और फर्जी तस्वीर तैयार कर ली, जिससे लोगों को उसकी मौत का यकीन हो जाए.
मऊ नगर पालिका से बनवा लिया फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र
इस फर्जी डिजिटल साक्ष्य और गढ़ी गई कहानी के दम पर शातिर राजकुमार ने स्थानीय निकायों को अंधेरे में रखकर मऊ नगर पालिका परिषद से अपना मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) भी जारी करवा लिया. इसके बाद उसने और उसके सहयोगियों ने इस मृत्यु प्रमाण पत्र को अदालत में पेश कर दिया, ताकि यह साबित हो सके कि मुकदमे का मुख्य आरोपी इस दुनिया में नहीं रहा और केस स्वतः समाप्त मान लिया जाए. इसके बाद वह खुद को मृत घोषित करवाकर भूमिगत हो गया और पुलिस की नजरों से छिपकर रहने लगा.
सर्विलांस और एसओजी टीम ने ऐसे किया पर्दाफाश
हालांकि, पुलिस की पैनी नजर और तकनीकी सर्विलांस से यह शातिर खेल अधिक दिनों तक छिप नहीं सका. मऊ की कोतवाली नगर पुलिस, एसओजी (SOG) और सर्विलांस टीम ने संयुक्त रूप से मामले की गहरी छानबीन शुरू की. जांच के दौरान जैसे ही इस फर्जीवाड़े की परतें खुलीं, पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई. पुलिस ने कड़ियों को जोड़ते हुए रविवार सुबह मऊ के ख्वाजाजहांपुर इलाके के पास से इस शातिर आरोपी को धर दबोचा.
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
पुलिस ने आरोपी राजकुमार राजभर को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ कोतवाली नगर थाने में फर्जी दस्तावेज तैयार कर खुद को मृत साबित करने व धोखाधड़ी के आरोप में बीएनएस (BNS) की अलग-अलग धाराओं में नया मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग उसके साथ शामिल थे और उसने मऊ नगर पालिका से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने में किन भ्रष्ट तौर-तरीकों का इस्तेमाल किया था. कानून से बचने का यह अनोखा और फिल्मी हथकंडा अंततः आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे ले गया.