प्रशांत महासागर में बनने वाली मौसमी स्थिति ‘एल नीनो’ (El Nino) एक बार फिर दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित करने की ओर बढ़ रही है. 22 अक्टूबर की तारीख को प्रशांत महासागर का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया. ऐसा पहली बार हुआ है. ऐसा हाल-फिलहाल की घटना में कभी नजर नहीं आया. समुद्री तापमान के अभी और अधिक बढ़ने का भी अनुमान है. अगर ऐसा होता है तो यह खतरनाक संकेत है.
हवा और बादल के साथ ही मौसम का बदला हुआ प्रभाव भी नजर आया. विश्व मौसम विज्ञान विभाग (WMO) के अनुसार इस इलाके में समुद्र का सामान्य तापमान यानी नीनो में जून से अगस्त के बीच 2.5 डिग्री का अंतर नजर आया. अनुमान है कि अक्टूबर-नवंबर के दौरान यह सामान्य से 3.7 डिग्री अधिक तक पहुंच सकता है.
नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमानों के अनुसार 2026 में एल नीनो की वापसी भारत के मॉनसून, बारिश के पैटर्न और औसतन तापमान पर सीधा असर डाल सकती है. जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच वैज्ञानिकों और मौसम एक्सपर्ट्स की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले महीनों में एल नीनो का यह रूप कितना मजबूत होता है.
क्या होता है एल नीनो? भारत पर इसका असर?
एल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक मौसमी परिघटना है, जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के सतह का पानी नॉर्मल से अधिक गर्म हो जाता है. इसका असर वैश्विक स्तर पर हवा के बहाव और बारिश के पैटर्न पर पड़ता है. ऐतिहासिक रूप से भारत में एल नीनो वाले साल के दौरान मॉनसून और तापमान पर असर पड़ता है, जिससे कृषि प्रभावित होती है. आइए समझते हैं, वो कैसे.
- कमजोर मॉनसून: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश में गिरावट दर्ज की जाती है, जिससे कई राज्यों में सूखे जैसे हालात पैदा हो जाते हैं.
- बढ़ता तापमान: गर्मी के मौसम में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जाता है और भीषण हीटवेव यानी लू के दिन बढ़ जाते हैं.
- कृषि पर असर: बारिश में अनिश्चितता की वजह से रबी और खरीफ फसलों के प्रोडक्शन पर बुरा असर पड़ता है.
2026 के लिए क्या है अनुमान?
NOAA के नवीनतम मॉडल्स के अनुसार, प्रशांत महासागर में समुद्र के सतह का तापमान (SST) धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जो 2026 में एल नीनो स्थिति के मजबूत होने के संकेत देता है. वहीं दूसरी तरफ भारतीय मौसम विज्ञान विभाग इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.
मौसम के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एल नीनो मॉनसून के सीजन के दौरान पूरी तरह ऐक्टिव होता है, तो भारत के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का डिस्ट्रिब्यूशन असमान हो सकता है. मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश देखने को मिल सकती है, जबकि अन्य इलाकों में अत्यधिक तापमान दर्ज किया जा सकता है.
जलवायु परिवर्तन की चुनौती
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की वजह से अब एल नीनो का असर पहले से अधिक तेज और अप्रत्याशित होने लगा है. लगातार बढ़ते वैश्विक तापमान की वजह से ना केवल भारत बल्कि दुनिया भर में मौसम की एक्सट्रीम घटनाएं बढ़ रही हैं.
IMD और कृषि मंत्रालय आने वाले महीनों में डेटा का एनालिसिस करके किसानों और राज्यों के लिए समय-समय पर सलाह जारी करेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि सूखे या जल संकट से निपटा जा सके.