Jalore Temple: जालोर-सिरोही सीमा पर विराजे वराडा हनुमानजी, महाभारत काल से जुड़ी मान्यता, जहां से गुजरते हर वाहन रुकते जरूर हैं

Jalore Temple: जालोर-सिरोही सीमा पर विराजे वराडा हनुमानजी, महाभारत काल से जुड़ी मान्यता, जहां से गुजरते हर वाहन रुकते जरूर हैं


होमताजा खबरधर्म

जालोर-सिरोही सीमा पर विराजे वराडा हनुमानजी, जहां से गुजरते वाहन रुकते जरूर हैं

Last Updated:

Jalore famous Varada hanumanji Temple : जालोर-सिरोही सीमा पर स्थित वराडा हनुमानजी मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. महाभारत काल से जुड़े इस मंदिर में हनुमानजी के एक पैर के नीचे शनिदेव विराजमान हैं. मंदिर मुख्य रास्ते पर स्थित होने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले लोग हनुमानजी के दर्शन और नमन करके ही आगे बढ़ना शुभ मानते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार, रोडवेज बसें भी मंदिर के सामने हॉर्न बजाकर आगे बढ़ती हैं.

ख़बरें फटाफट

जालोर. जालोर-सिरोही सीमा पर स्थित वराडा हनुमानजी मंदिर आस्था, परंपरा और कई अनोखी मान्यताओं के लिए जाना जाता है. इस मंदिर से जुड़ी सबसे खास मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है. स्थानीय लोगों के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस स्थान पर आकर हनुमानजी के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की थी. यही वजह है कि इस स्थान को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है.

स्थानीय व्यक्ति कीर्ति कुमार ने लोकल18 को बताया कि इस मंदिर में विराजमान हनुमानजी की प्रतिमा को भक्त स्वयंभू यानी प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई मानते हैं. प्रतिमा का विशाल स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. यहां हनुमानजी की प्रतिमा के एक पैर के नीचे शनिदेव विराजमान हैं. भक्तों के लिए हनुमानजी और शनिदेव का यह स्वरूप मंदिर की सबसे खास विशेषताओं में से एक है.

मंदिर के सामने हॉर्न बजाकर आगे बढ़ते हैं वाहन
वराडा हनुमानजी मंदिर की एक और खास बात यहां से गुजरने वाले वाहनों से जुड़ी है. मंदिर मुख्य रास्ते पर स्थित होने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले लोग हनुमानजी के दर्शन और नमन करके ही आगे बढ़ना शुभ मानते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार, रोडवेज बसें भी मंदिर के सामने हॉर्न बजाकर आगे बढ़ती हैं. यात्रियों के लिए यह केवल रास्ते में आने वाला मंदिर नहीं, बल्कि यात्रा के दौरान आस्था का एक पड़ाव बन चुका है.

परिसर में कई देवी-देवताओं के मंदिर
मंदिर परिसर में मुख्य हनुमानजी मंदिर के अलावा सुंधा माता, श्री राम दरबार, शनिदेव और वीर भगवान के मंदिर भी मौजूद हैं. पास ही एक कुंवारी कन्या का मंदिर भी बताया जाता है. अलग-अलग देवी-देवताओं के मंदिरों के साथ ही मंदिर की दीवारों पर संपूर्ण रामायण का चित्रण भी किया गया है.

खास पत्थर को लेकर भी है मान्यता
मंदिर से जुड़ी एक और स्थानीय मान्यता एक खास पत्थर को लेकर है. कहा जाता है कि इस पत्थर को हर व्यक्ति नहीं उठा सकता. मान्यता है कि जिसने कभी बुरे कर्म नहीं किए हों, वही इसे उठा पाता है. यह स्थानीय आस्था और मान्यता का हिस्सा है.

बंदरों को हनुमानजी की वानर सेना मानते हैं भक्त
वराडा हनुमानजी मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में बंदर भी दिखाई देते हैं. भक्त इन्हें हनुमानजी से जुड़ी वानर सेना मानकर शुभ मानते हैं और इन्हें भोजन भी कराते हैं. जालोर और सिरोही की सीमा पर स्थित यह मंदिर केवल पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि स्थानीय आस्था, लोकविश्वास और वर्षों से चली आ रही परंपराओं का भी हिस्सा है.



Source link