दिल्लीवालों के लिए कालसर्प योग, काला धुआं और धुंध का साया, हवा की सेहत खराब
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Delhi AQI: दिल्ली-एनसीआर के साथ ही पूरे उत्तर और पूर्वी भारत में ठंड ने दस्तक देनी शुरू कर दी है. सुबह और शाम के समय हवाओं में ठंडक घुलने लगी है. दिल्ली की हवा में ठंडक के साथ ही धुआं भी घुलने लगा है. यही वजह है कि लगातार तीसरे दिन 24 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई पूअर यानी खराब कैटेगरी में बना हुआ है.
Delhi AQI: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता लगातार तीसरे दिन शनिवार को ‘खराब’ श्रेणी में बनी रही. ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 180 दर्ज किया गया. दशहरा उत्सव के बाद हवा में धुएं और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने प्रदूषण रोधी उपाय तेज कर दिए हैं. दिल्ली के कई निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर ऊंचा दर्ज किया गया. जहांगीरपुरी में AQI 270, मुंडका में 264, विवेक विहार में 261 और अलीपुर में 254 रहा. पंजाबी बाग में 247, आरके पुरम में 240, आईआईटी दिल्ली में 221 और बुराड़ी क्रॉसिंग में 217 AQI दर्ज किया गया. चांदनी चौक में यह 211, पूसा और सिरिफोर्ट में 209 तथा द्वारका सेक्टर-8 में 206 रहा.
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने इस सप्ताह की शुरुआत में AQI के खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के पहले चरण को लागू किया था. इसके तहत धूल नियंत्रण, निर्माण एवं विध्वंस संबंधी नियमों का पालन, कचरा प्रबंधन में सुधार और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने पर जोर दिया जा रहा है.
प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट पर बनेगा एक्शन प्लान
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रदूषण के प्रमुख हॉटस्पॉट की पहचान कर उनके लिए लक्षित कार्ययोजना (Targeted Action Plan) तैयार करने के निर्देश दिए हैं. समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों से विभिन्न क्षेत्रों के एक्यूआई आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रदूषण के प्रमुख कारणों का पता लगाने को कहा. इसके बाद संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और सुधारात्मक कदम उठाने के लिए समयसीमा निर्धारित होगी. प्रदूषण के संभावित स्थानीय स्रोतों में सड़कों की धूल, वाहनों की भीड़, निर्माण गतिविधियां, अनधिकृत पार्किंग और कचरा जलाना शामिल हैं. अधिकारियों को इन कारणों के आधार पर क्षेत्रवार कार्रवाई करने की योजना तैयार करनी है. शुक्रवार को दिल्ली के तीन निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई थी. पंजाबी बाग में एक्यूआई 302, पूसा में 319 और आरके पुरम में 307 दर्ज किया गया. उस दिन आंकड़े उपलब्ध कराने वाले 56 निगरानी केंद्रों में से 36 पर हवा की गुणवत्ता खराब थी, जबकि शेष केंद्रों पर यह मध्यम श्रेणी में रही.
प्रदूषण में ट्रांसपोर्ट की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में प्रदूषण के लिस्टेड सोर्स में परिवहन यानी वाहनों की हिस्सेदारी सर्वाधिक 20.3 प्रतिशत है. आवासीय स्रोतों का योगदान 5.2 प्रतिशत, उद्योगों का 4.2 प्रतिशत और निर्माण गतिविधियों का 2.6 प्रतिशत है. ऊर्जा क्षेत्र की हिस्सेदारी दो प्रतिशत, कचरा जलाने की 1.8 प्रतिशत और सड़क की धूल की 1.4 प्रतिशत है. अन्य स्रोतों का योगदान 1.3 प्रतिशत दर्ज किया गया है. प्रशासन का जोर ग्रैप के पहले चरण के तहत लागू उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर है, ताकि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके.