Last Updated:
अमेठी के जगदीशपुर औद्योगिक क्षेत्र में 1984 में बने जर्जर लोहिया पुल का अब यूपीसीडा द्वारा दो करोड़ रुपये की लागत से पुनर्निर्माण कराया जाएगा. इससे व्यापारियों और स्थानीय लोगों की दस किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी. पुल जर्जर होने से कभी कभी तो माल लदे वाहन भी पलट जाते हैं. इस एरिया में कई दिग्गज कंपनियां है जिससे लोगों को रोजगार मिलता है. 1984 में इस पुल का निर्माण इस उद्देश्य से कराया गया था कि यह पुल विकास में सहयोगी बनेगा और औद्योगिक क्षेत्र को फायदा होगा.
अमेठी: अमेठी जिले के जगदीशपुर क्षेत्र को बड़ी इंडस्ट्रियल एरिया यानी औद्योगिक क्षेत्र का हब कहा जाता है, लेकिन 1984 में बना एक पुल जिसे लोहिया पुल का नाम दिया गया वह काफी जर्जर अवस्था में है. जिसके कारण वर्तमान समय में करीब 10 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी अन्य प्रदेशों से आने वाले व्यापारियों को कारखाने तक पहुंचने के लिए तय करनी पड़ती है. करीब 42 सालों बाद इस पुल के बनने की उम्मीदें एक बार फिर जगी हैं. जिसे अब यूपीसीडा पूरा करने जा रहा है. इस नई परियोजना से न सिर्फ व्यापारियों को फायदा होगा बल्कि यहां पर चलने वाली बड़ी औद्योगिक कंपनियों भी विकास के क्षेत्र में आगे बढ़कर तरक्की कर पाएंगे और स्थानीय लोगों के पास भी रोजगार के तमाम अवसर होगें.
1984 में बना था पुल 42 वर्षों से जर्जर
अमेठी जिले में लघु भारतीय उद्योग के जानकारी के मुताबिक 1984 में इस पुल का निर्माण इस उद्देश्य से कराया गया था कि यह पुल विकास में सहयोगी बनेगा और औद्योगिक क्षेत्र को फायदा होगा. लेकिन बढ़ते औद्योगिक निवेश और बड़े कारखाने के कारण अब कंपनियां ज्यादा हो गई. जिसका कारण बड़े वाहनों का आवागमन अब इस जर्जर पुल से नहीं हो पा रहा है. अब इसका निर्माण करीब 2 करोड रुपये लागत से किया जाएगा. जिससे लगभग 10 किलोमीटर की दूरी कम होगी और 2 लाख की आबादी को फायदा होगा.
सामान लेकर जाते समय पलट जाते हैं वाहन
लोकल 18 नें औद्योगिक क्षेत्र के इस जर्जर पुल की समस्या को लेकर व्यापारियों से बातचीत की जो बाहर से उद्यमी आते हैं उसमें एक बिहार के उद्यमी राकेश कुमार ने कहा कि हम सबके वाहन पलट जाते हैं यह पुल इतना जर्जर हो गया है कि डर लगता है कि कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है. वही एक और श्याम कुमार गुप्ता बताते हैं और क्षेत्र में समान ले जाने के लिए . ले आने के लिए तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है करीब 9 से 10 किलोमीटर अतिरिक्त समय की दूरी तय करनी पड़ती है. कभी-कभार तो हम सब भटक जाते हैं रास्ता भूल जाते हैं. जिसके कारण दिक्कत होती है और हमारा समय और पैसा दोनों बर्बाद हो जाता है. इसके बन जाने से काफी फायदा होगा और हम सबको व्यापार करने में सहूलियत मिलेगी इसके साथ यहां के लोगों को भी लाभ मिलेगा.
अब लोगों को मिलेगी राहत
लघु उद्योग भारती के जिम्मेदार इंजीनियर संजय सिंह ने कहा की कई बार इसके लिए शासन से पत्राचार करना पड़ा. अब लंबे अरसे बात इस पुल के निर्माण की सौगात मिलने जा रही है. आज के कई वर्ष पहले यहां पर सेक्टर 13 और 14 को मिलाकर एक नए औद्योगिक क्षेत्र को विकसित किया गया था, लेकिन इस पुल के कारण जो जर्जर हो चुका है. इससे बाहर से आने वाले व्यापारियों को उद्यमियों को इसके साथ ही स्थानीय लोगों को काफी समस्या होती है. यह बन जाएगा तो काफी राहत होगी लोगों को अतिरिक्त दूरी नहीं तय करनी पड़ेगी. उनका समय बचेगा उनका पैसा बचेगा जो वाहनों में ईंधन ज्यादा खर्च होता है. वह भी बचेगा जिससे औद्योगिक विकास को रफ्तार मिलेगी.