सिक्किम के ग्याल्शिंग में जमीन से ठीक 5 किलोमीटर नीचे अचानक ऐसी खौफनाक हलचल हुई कि पूरा इलाका थर्रा उठा. 23 अक्टूबर की शाम करीब 6:58 बजे जब 3.6 तीव्रता के झटके से धरती डोली, तो लोगों के होश उड़ गए. लेकिन तबाही और खौफ का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. इसके ठीक बाद पड़ोस के तिब्बत में एक के बाद एक दो बार धरती बुरी तरह कांपी. रात 7:44 बजे और फिर 8:11 बजे 4.3 तीव्रता के बैक-टू-बैक झटकों ने पूरे रीजन में ऐसा खौफनाक मंज़र पैदा कर दिया कि करीब 7 लाख की आबादी पर आफत टूट पड़ी. पहाड़ की वादियों में सन्नाटा चीखों में बदल गया और लोग अपने घरों से निकलकर सड़कों पर भागने लगे. कुदरत का यह डबल-अटैक इतना अचानक था कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला. जमीन के नीचे छिपी इस खौफनाक हलचल ने पूरे इलाके को दहशत के साए में ला खड़ा किया है.
सिक्किम, तिब्बत और दक्षिण एशिया में भूकंप: 24 घंटे में कहां-कहां आए झटके?
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के डेटा के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2026 को दक्षिण एशिया के बड़े हिस्से में जमीन के अंदर असाधारण हलचल दर्ज की गई. सिक्किम और उसके आस-पास के हिमालयी इलाकों से लेकर दक्षिण भारत तक झटके महसूस किए गए हैं:
सिक्किम (ग्याल्शिंग): शाम 6:58 बजे ग्याल्शिंग में जमीन से महज 5 किलोमीटर नीचे 3.6 तीव्रता का भूकंप आया. जमीन की कम गहराई होने के कारण झटके काफी तेज महसूस हुए.
तिब्बत और चीन सीमा क्षेत्र: सिक्किम के बाद तिब्बत-चीन सीमा पर भूकंपों की सीरीज देखने को मिली. रात 7:44 बजे और रात 8:11 बजे 4.3 तीव्रता के दो बड़े झटके महसूस हुए. इससे पहले सुबह और दोपहर में भी 4.0 से 4.6 तीव्रता के कई झटके दर्ज किए गए थे.
मेघालय और हिमाचल: पूर्वोत्तर के मेघालय (वेस्ट खासी हिल्स) में शाम 4:04 बजे 3.1 तीव्रता का झटका दर्ज किया गया. वहीं हिमाचल प्रदेश के शिमला में रात 2:43 बजे (2.7 M) और चंबा में रात 12:38 बजे (2.3 M) हल्के झटके महसूस हुए.
दक्षिण भारत (बेंगलुरु): कर्नाटक के ‘बेंगलुरु रूरल’ इलाके में भी सुबह 9:01 बजे 3.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ, जिसने लोगों को चौंका दिया.
पड़ोसी देश (पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार): पाकिस्तान में तड़के 4:56 बजे 4.9 तीव्रता का बड़ा झटका महसूस किया गया. इसके अलावा म्यांमार (3.3 से 4.0 M) और अफगानिस्तान (4.1 M) में भी धरती हिली.
7 लाख की आबादी में क्यों फैला खौफ?
सिक्किम और तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में एक ही दिन में बैक-टू-बैक कई झटके आने से स्थानीय लोगों में भारी दहशत का माहौल बन गया.
कम गहराई बनी चिंता की वजह: ग्याल्शिंग में भूकंप का केंद्र जमीन से केवल 5 किमी नीचे था. विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्र जब सतह के इतने करीब होता है, तो कम तीव्रता के बावजूद झटके और थरथराहट ज्यादा महसूस होती है.
लैंडस्लाइड (भूस्खलन) का डर: हिमालयी क्षेत्र बेहद संवेदनशील जोन में आता है. लगातार आ रहे झटकों के कारण स्थानीय प्रशासन ने पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन की आशंका को लेकर अलर्ट जारी किया है.
क्या कोई नुकसान हुआ है?
रिपोट्र्स के मुताबिक, अधिकांश भूकंप मध्यम और कम तीव्रता (2.3 से 4.9 M) के थे, इसलिए किसी बड़े बुनियादी ढांचे के नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है. हालांकि, एहतियात के तौर पर आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और लोगों को आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है.