म्यांमार ट्रेनिंग कैंप केस: मैथ्यू वैनडाइक को अमेरिका लौटने की इजाजत मिली, 24 फरवरी तक रह सकेंगे विदेश में

म्यांमार ट्रेनिंग कैंप केस: मैथ्यू वैनडाइक को अमेरिका लौटने की इजाजत मिली, 24 फरवरी तक रह सकेंगे विदेश में


नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को संयुक्त राज्य अमेरिका लौटने की अनुमति दे दी है. इसके साथ ही अदालत ने उन्हें 24 फरवरी तक विदेश में रहने की छूट भी प्रदान की है. मामला म्यांमार के विद्रोही गुटों को आधुनिक ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग देने से जुड़ा है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने वैनडाइक को इस साल मार्च में म्यांमार की सैन्य जुंटा के खिलाफ लड़ रहे जातीय विद्रोही समूहों को अवैध रूप से आधुनिक युद्ध तकनीक सिखाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. इस मामले में वैनडाइक के साथ छह यूक्रेनी नागरिक भी आरोपी हैं. इससे पहले सितंबर में अदालत ने सभी आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत दी थी और अपने परिवारों से मिलने के लिए एक महीने के लिए स्वदेश जाने की सशर्त अनुमति दी थी.

म्यांमार में ड्रोन वॉरफेयर ट्रेनिंग का आखिर क्या है मामला?

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मैथ्यू वैनडाइक को 13 मार्च 2026 को एक अंतरराष्ट्रीय साजिश के सिलसिले में गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी का आरोप था कि यह पूरा नेटवर्क म्यांमार के भीतर सक्रिय जातीय विद्रोही संगठनों को ड्रोन युद्ध की आधुनिक तकनीक मुहैया कराने में शामिल था. इसी मामले में छह यूक्रेनी नागरिकों – पेट्रो हुरबा, तारास स्लीवियाक, इवान सुकमानोवस्की, मारियन स्टेफानकिव, मक्सिम होनचारुक और विक्टर कामिंस्की – को दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था.

एनआईए की जांच में खुलासा हुआ कि ये सभी विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे. आवश्यक परमिट लिए बिना वे पूर्वोत्तर भारत के संवेदनशील इलाकों में पहुंचे और फिर मिजोरम की सीमा लांघकर अवैध रूप से म्यांमार में दाखिल हो गए. वहां उन्होंने लगभग तीन महीने तक विद्रोही गुटों के लिए एक सघन ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया.

विद्रोही गुटों को ड्रोन तकनीक में क्या-क्या सिखा रहे थे?

एनआईए के मुताबिक म्यांमार के भीतर दी जाने वाली इस ट्रेनिंग में आधुनिक ड्रोन ऑपरेशंस, ड्रोन असेंबली (ड्रोन को जोड़ना और तैयार करना) और रडार तथा सिग्नल को जाम करने वाली जैमिंग टेक्नोलॉजी शामिल थी. विदेशी प्रशिक्षक विद्रोही लड़ाकों को सिखा रहे थे कि कैसे छोटे ड्रोनों को हथियारबंद बनाकर सैन्य जुंटा के ठिकानों पर सटीक हमले किए जा सकते हैं.

एजेंसी ने दावा किया कि इस मामले में इलाके में सक्रिय सशस्त्र गुटों से जुड़ी एक गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश शामिल है. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों के सीधे संबंध म्यांमार के प्रमुख जातीय संगठनों जैसे ‘चिन नेशनल फ्रंट’ (सीएनएफ) और ‘काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी’ (केआईए) के साथ थे. इसी वजह से एनआईए ने शुरुआत में इस केस में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा 18 (आतंकी कृत्य की साजिश, उकसावे या सहायता) जैसी कठोर धाराएं लगाई थीं.

एनआईए की अधूरी चार्जशीट और ‘डिफॉल्ट बेल’ का कानूनी पेच क्या था?

इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी मोड़ उस वक्त आया जब एनआईए ने 8 सितंबर को अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की. यह दिन जांच पूरी करने के लिए तय 180 दिनों की कानूनी समयसीमा का आखिरी दिन था. चौंकाने वाली बात यह रही कि एनआईए ने अपनी चार्जशीट में केवल आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 (इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट) के तहत अनधिकृत प्रवेश और वीजा नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोप ही लगाए.

एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में यूएपीए की किसी भी धारा का उल्लेख नहीं किया, हालांकि मौखिक रूप से यह कहा कि आतंकवाद रोधी कानून के तहत जांच अभी जारी है. इसके बाद वैनडाइक ने तुरंत अदालत में डिफॉल्ट जमानत की अर्जी लगाई. उनके वकीलों ने दलील दी कि जांच एजेंसी तय 180 दिनों की कानूनी अवधि में यूएपीए के तहत जांच पूरी करने में पूरी तरह विफल रही है.

विशेष एनआईए अदालत ने जांच एजेंसी की चार्जशीट पर क्या टिप्पणी की?

18 सितंबर को विशेष एनआईए अदालत ने कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दे दी. अदालत ने एनआईए की चार्जशीट को ‘टुकड़ों में पेश की गई चार्जशीट’ (पीसमील चार्जशीट) करार दिया. कोर्ट ने कहा कि एजेंसी ने केवल इमिग्रेशन कानून के प्रावधानों को शामिल किया है, जबकि गंभीर यूएपीए अपराधों की जांच को लंबित रखा गया है.

अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी एक अधूरी चार्जशीट का सहारा लेकर आरोपी को कानून द्वारा प्रदत्त ‘डिफॉल्ट बेल’ के वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं कर सकती. भारतीय कानून के तहत यदि जांच एजेंसी निर्धारित समयसीमा (गंभीर मामलों में 180 दिन) के भीतर संपूर्ण जांच पूरी करके औपचारिक चार्जशीट पेश नहीं करती है, तो आरोपी को रिहा होने का वैधानिक अधिकार मिल जाता है, जो नियमित जमानत से बिल्कुल अलग होता है.

तिहाड़ और रोहिणी जेल से स्वदेश वापसी तक का पूरा घटनाक्रम

डिफॉल्ट जमानत मिलने के बाद मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों ने अपने वतन लौटने और जब्त पासपोर्ट जारी कराने के लिए विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. उस समय वैनडाइक तिहाड़ जेल में बंद थे, जबकि सभी छह यूक्रेनी नागरिक रोहिणी जेल में न्यायिक हिरासत में थे.

24 सितंबर को विशेष अदालत ने मानवीय आधार और कानूनी परिस्थितियों को देखते हुए सातों आरोपियों को 30 दिनों के लिए अपने-अपने देश जाने की सशर्त अनुमति दी थी, साथ ही तय अवधि पूरी होने पर भारत लौटने का सख्त निर्देश दिया था.

अदालत की ओर से यह राहत इसलिए संभव हो सकी क्योंकि एनआईए द्वारा अदालत में पेश मुख्य चार्जशीट में यूएपीए की कोई धारा शामिल नहीं थी. अब दिल्ली की अदालत ने नए आदेश में वैनडाइक को अमेरिका लौटने और 24 फरवरी तक वहां रहने की अनुमति दे दी है.



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