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5 Old Age Disease in Young: दिमाग के सिकुड़ने से भूलने की जो बीमारी होती है, क्या आप जानते है बुढ़ापे वाली यह बीमारी जवानी में भी शरीर को जकड़ सकती है. चाहे वह बीपी हो या डायबिटीज ये सब एक समय में बुढ़ापे वाली बीमारी थी लेकिन आज यह जवानी में लोगों को सताने लगी है. ऐसे ही 5 बीमारियां हैं लेकिन इन सब बीमारी में शरीर हल्का सा संकेत देता रहता है. इन्हें ही पहचानने के लिए हम यहां यह जानकारी दे रहे हैं.
अब ये बीमारी भी होने लगी है युवाओं में. Photo : Canva
ये 5 बीमारियां जवानी के दुश्मन
- ब्रेन सिंकिंग– 30-35 साल की उम्र के बाद जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है दिमाग सिकुड़ती है. लेकिन यह बहुत धीमा और नेचुरल प्रोसेस है. लेकिन 60 के बाद इसमें तेजी आती है. इसे ब्रेन सिंकिंग कहा जाता है. दरअसल, दिमाग की कोशिकाएं जब एक बार मर जाती है तो उसकी जगह दोबारा नहीं बनती है. इसलिए अगर यह तेजी से सिकुड़ने लगे तो कई तरह की परेशानियां सामने आ सकती है. कुछ युवाओं में भी ब्रेन सिंकिंग तेजी से होने लगा है जो चिंता की बात है. इसके लिए इंसान खुद जिम्मेदार है. डायबिटीज, मोटापा, स्मोक, अल्कोहल जैसे कारक इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं.
- टाइप 2 डायबिटीज– पहले के जमाने में डायबिटीज की बीमारी बुजुर्गों में होती थी लेकिन WHO के मुताबिक दुनिया भर में करीब 50 करोड़ लोग डायबिटीज के शिकार हैं. भारत तो डायबिटीज कैपिटल ऑफ वर्ल्ड कहा जाता है. यहां 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज के मरीज हैं. कितने ऐसे हैं जिन्हें पता ही नहीं कि उनके शरीर में डायबिटीज की बीमारी पल रही है. डायबिटीज एक तरह से साइलेंट किलर बीमारी हैं जिसमें शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखता. इसलिए 20 साल की उम्र से ही डायबिटीज से बचने के लिए प्रयास शुरू कर देने चाहिए.
- हाई ब्लड प्रेशर-भारत में हर 4 में से 1 वयस्क को हाई ब्लड प्रेशर है. इस से समझ सकते हैं कि कितने युवा इसके शिकार है. हाई ब्लड प्रेशर ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे हार्ट को कमजोर करने लगते हैं और एक दिन हार्ट की बड़ी बीमारी लेकर सामने आती है. जब खून नलियों की दीवार पर बहुत तेज प्रहार करने लगे तो यह हाई ब्लड प्रेशर है. चूंकि हाई ब्लड प्रेशर में कोई लक्षण भी जल्दी नहीं दिखता. इसलिए इसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल हो जाता है. हमारे यहां लोगों में बीपी जांच कराने की आदत नहीं है. इसलिए बीपी के कारण धीरे-धीरे यह शरीर को खोखला होने लगता है तब पता चलता है.
- स्ट्रोक- स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग में किसी न किसी तरह से कुछ समय के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती है. आमतौर पर पहले स्ट्रोक की बीमारी बुजुर्गों में होती थी लेकिन आजकल 20 साल के युवा भी स्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं. यहां तक कि 18 से 34 साल की महिलाओं में भी स्ट्रोक होने लगा है. स्ट्रोक की कई वजहें हो सकती है. अच्छी बात यह है कि यंग एज में यदि स्ट्रोक हो तो यह जानलेवा कम होता है लेकिन इससे बचने के लिए उपाय जरूरी है.
- कोलोन कैंसर- होपकिंस यूनिवर्सिटी की नई स्टडी में पाया गया है कि 1980 से 1994 के बीच पैदा लेने वाले लोगों में कोलोन कैंसर के मामले ज्यादा आ रहे हैं. इनमें कोलोरेक्टर कैंसर के मरीज सबसे ज्यादा होते हैं. जबकि पहले यह बीमारी युवाओं में नहीं होती थी.
इन बीमारियों से बचने के उपाय
बुढ़ापे वाली इन सभी बीमारियों से बचने का तरीका बिल्कुल आसान है. हमारे बुजुर्गों की लाइफस्टाइल जैसी थी, जैसा खान-पान था. वैसा जीवनशैली अपनाइए. रात में जल्दी सो जाइए, सुबह जल्दी उठ जाइए लेकिन 7-8 घंटे से कम की नींद न लीजिए. नींद भी सुकून वाली लीजिए. इसमें बीच-बीच में नींद टूटे न. इसके बाद रोज शरीर को थकाइए. रोज भारी चीजों को उठाइए. रोज वॉक कीजिए. रोज एक्सरसाइज कीजिए. इसके बाद खाने में ऋषि-मुनि की तरह खान-पान अपनाइए. अनहेल्दी चीजें, बीमारी फैलाने वाली चीजें न खाएं. फास्ट फूड, जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड, पिज्जा, बर्गर जैसी चीजें आज से खाना छोड़ दीजिए. जितना संभव हो घर का बना शुद्ध साबुत अनाज वाला खाना खाएं. जितना हरी पत्तीदार सब्जियों का सेवन करेंगे, उतना ही सेहतमंद रहेंगे. ज्यादा शुगर, ज्यादा नमक न खाएं. ताजे फल का खूब सेवन करें. तनाव न लें और सामाजिक मेल-जोल बढ़ाएं. खुश रहें.