गांगुली को दिल्ली HC से झटका, फिल्म ‘दूसरा’ की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार
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Sourav Ganguly Doosra Film: सौरव गांगुली की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को फिल्म ‘दूसरा’ की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. फिल्म शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि वह फिलहाल फिल्म की रिलीज नहीं रोक रहा है. मामले में सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी.
सौरव गांगुली को दिल्ली हाईकोर्ट से लगा तगड़ा झटका.
नई दिल्ली. भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को दिल्ली हाईकोर्ट से गुरुवार तगड़ा झटका लगा. अदालत ने फिल्म ‘दूसरा’ की रिलीज पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है. यह फिल्म तय कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. उच्च न्यायालय ने भले ही फिल्म की रिलीज पर तुरंत रोक लगाने से मना कर दिया हो, लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि गांगुली की याचिका पर आगे की सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी. गांगुली ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया है कि फिल्म में उनकी कप्तानी में साल 2022 के नेटवेस्ट सीरीज फाइनल और लॉर्ड्स के मैदान पर शर्ट उतारकर जश्न मनाने की घटना का संदर्भ देकर उनके व्यावसायिक और व्यक्तित्व संबंधी अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है.
सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने इस फिल्म के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था. गांगुली का तर्क है कि इस तरह का अनधिकृत इस्तेमाल उनके व्यक्तित्व और व्यावसायिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है. पूर्व कप्तान ने अपनी कानूनी याचिका में विशेष तौर पर भारतीय क्रिकेट टीम के उनके नेतृत्वकाल, साल 2002 के ऐतिहासिक नेटवेस्ट सीरीज फाइनल और लॉर्ड्स के बालकनी से जुड़े उनके बेहद चर्चित व शर्टलेस सेलिब्रेशन का जिक्र किया है.
लॉर्ड्स की यादें और गांगुली का पक्ष
क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में आज भी साल 2002 की नेटवेस्ट सीरीज का वह फाइनल मुकाबला और लॉर्ड्स की गैलरी से सौरव गांगुली का शर्टलेस होकर जश्न मनाना ताजा है. इंग्लैंड के खिलाफ उस मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की जीत और उसके बाद गांगुली का वह आक्रामक और ऐतिहासिक जश्न भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार पलों में शुमार है. गांगुली का मानना है कि उनकी अनुमति के बिना इस तरह के प्रतिष्ठित और निजी पलों का फिल्म में व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग किया जाना उनके अधिकारों का हनन है. उन्होंने अदालत से मांग की है कि उनके व्यक्तित्व और जीवन से जुड़ी ऐसी अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ उन्हें कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए.
रचनात्मक स्वतंत्रता बनाम व्यक्तित्व अधिकार
इस पूरे कानूनी विवाद ने एक बार फिर से उस बड़े सवाल को खड़ा कर दिया है कि आखिर फिल्म निर्माताओं की रचनात्मक स्वतंत्रता की सीमाएं कहां तक हैं. क्या फिल्में बनाते समय निर्माता किसी खिलाड़ी के जीवन, उनकी उपलब्धियों और सार्वजनिक रूप से पहचाने जाने वाले पलों का इस्तेमाल बिना अनुमति के कर सकते हैं. और यदि ऐसा किया जाता है, तो किस सीमा के बाद वह कृत्य व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन के दायरे में आ जाएगा. इस तरह के मामले हाल के दिनों में भारतीय अदालतों में तेजी से बढ़ रहे हैं. देश के तमाम मशहूर हस्तियां, अभिनेता और खिलाड़ी अपने नाम, छवि और अपनी पहचान से जुड़े अन्य विशिष्ट गुणों को अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग से बचाने के लिए कानूनी रास्ता अपना रहे हैं.
आगे की कानूनी लड़ाई और फिल्म की रिलीज
फिलहाल, सौरव गांगुली की याचिका पर अदालत में कानूनी लड़ाई जारी है. शुक्रवार को होने वाली अगली सुनवाई में इस बात पर आगे की बहस होगी कि क्या फिल्म के कुछ हिस्सों में गांगुली के अधिकारों का वास्तव में उल्लंघन हुआ है या नहीं. चूंकि अदालत ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से मना कर दिया है, इसलिए यह फिल्म अपने तयशुदा वक्त पर शुक्रवार को थिएटर्स में दर्शकों के सामने होगी. इस हाई-प्रोफाइल मामले के अंतिम फैसले से आने वाले समय में खेल हस्तियों के अधिकारों और फिल्म निर्माताओं के अधिकारों के बीच के दायरे को लेकर एक नया कानूनी दृष्टांत स्थापित हो सकता है. सभी की निगाहें अब दिल्ली हाईकोर्ट की अगली कार्यवाही और आने वाले आदेश पर टिकी हुई हैं.