18 साल पहले ISRO ने बढ़ाया था चांद की ओर पहला कदम, चंद्रयान-1 से चंद्रयान-4 तक तस्वीरों में देखिए सफरनामा

18 साल पहले ISRO ने बढ़ाया था चांद की ओर पहला कदम, चंद्रयान-1 से चंद्रयान-4 तक तस्वीरों में देखिए सफरनामा


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18 साल पहले बढ़ाया था चांद की ओर पहला कदम, तस्वीरों में ISRO का सफरनामा

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ISRO के चंद्रयान मिशन को आज 18 साल पहले हो गए. 2008 में आज के दिन यानी 22 अक्टूबर को ही चंद्रयान-1 लॉन्च किया गया था. अब भारत चंद्रयान-4 की तैयारी कर रहा है. इस मिशन में चांद से मिट्टी को वापस लाया जाना है. इसके बाद भारत 2040 तक अपने एस्ट्रॉनॉट को भी चांद पर उतारने की प्लानिंग कर रहा है. तस्वीरों में देखिए ये सफरनामा.

22 अक्टूबर 2008 को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से इसरो ने अपना पहला चंद्रयान रवाना किया था.उस वक्त शायद ही किसी ने सोचा हो कि ये मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की दिशा बदल देगा. भारत के इस पहले चंद्र मिशन ने ही चांद पर पानी के अणुओं के प्रमाण तलाशे थे, जिसका लोहा नासा तक ने माना था. इसके बाद चंद्रयान-2 ने चंद्रमा के साउथ पोल को समझने की कोशिश की थी. हालांकि ये चांद पर लैंड नहीं कर पाया था. ये काम चंद्रयान-3 ने पूरा किया था और चांद के साउथ पोल पर उतरने वाला पहला मिशन बना था. अब भारत चंद्रयान-4 की तैयारी जोर-शोर से कर रहा है. (सभी फोटो- इसरो/सोशल मीडिया)

भारत के चंद्र मिशन की घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 15 अगस्त 2003 को की थी. 22 अक्टूबर 2008 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने PSLV-C11 रॉकेट की मदद से चंद्रयान-1 को लॉन्च किया. इस मिशन में भारत और दूसरे देशों के कुल 11 वैज्ञानिक उपकरण शामिल थे. इनकी मदद से चंद्रमा की सतह का नक्शा तैयार करना, खनिजों की पहचान करना और उसकी संरचना का अध्ययन करना था. मिशन दो साल तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया था. हालांकि 2009 में ही इससे संपर्क टूट गया था. मगर तब तक मिशन कई अहम खोजें कर चुका था.

चंद्रयान-1 की सफलता के बाद इसरो ने 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान-2 लॉन्च किया. इस मिशन का लक्ष्य पहले से ज्यादा महत्वाकांक्षी था. इसमें ऑर्बिटर, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर शामिल थे. उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र का अध्ययन करना और वहां उतरकर सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग करना था. 20 अगस्त 2019 को चंद्रयान-2 चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया. इसके बाद 2 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हुआ. लेकिन मून पर लैंड करने से पहले ही संपर्क टूट गया और क्रैश लैडिंग हुई. मगर इसरो ने इस पर गहन अध्ययन किया कि आखिर मिशन असफल क्यों किया और इसी रिसर्च ने चंद्रयान-3 की सफलता की नींव रखी.

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चंद्रयान-2 की चुनौती के बाद इसरो ने चंद्रयान-3 में सॉफ्ट लैंडिंग की तकनीक को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया. 14 जुलाई 2023 को LVM3 रॉकेट से लॉन्च हुआ चंद्रयान-3 तीन प्रमुख हिस्सों यानी प्रोपल्शन मॉड्यूल, विक्रम लैंडर अपने साथ प्रज्ञान रोवर लेकर चंद्रमा की ओर रवाना हुआ. 23 अगस्त 2023 को विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया. चंद के साउथ पोल पर पहुंचने वाला भारत पहला देश बना.

चंद्रयान-3 की सफलता से दुनिया ने भारत का लोहा माना. अब भारत चांद के साउथ पोल पर पहुंचने वाला पहला देश तो था ही. चांद पर सफलता पूर्वक पहुंचने वाला भी चौथा देश बन चुका था. उससे पहले सिर्फ अमेरिका, चीन, रूस ही ऐसा कर पाए थे. इस मिशन में विक्रम लैंडर के साथ गए प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर चलकर वैज्ञानिक प्रयोग किए. लैंडर और रोवर ने चंद्र सतह के तापमान, स्थानीय प्लाज्मा, तत्वों की मौजूदगी और भूकंपीय गतिविधियों से जुड़े आंकड़े जुटाए. इन प्रयोगों से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र की परिस्थितियों को समझने में मदद मिली.

अब इसरो चंद्रयान-4 मिशन पर काम कर रहा है. 18 सितंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दी थी. यह मिशन इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इसमें सिर्फ चांद तक जाना नहीं है, बल्कि वहां से नमूने भी वापस लाने हैं. सरकार ने इसकी टाइमलाइन 2027 निर्धारित कर रखी है. हालांकि गगनयान मिशन की वजह से इसमें कुछ देरी हो सकती है.

चंद्रयान-4 चंद्रमा पर लैंड करने के साथ वहां से नमूने जुटाएगा और चांद की सतह से उड़ान भरकर नमूनों को वापस धरती पर लाएगा. इसके लिए इसे रोबोटिक आर्म से लैस किया जाएगा. चांद से जुटाई गई मिट्टी को एक कंटेनर में बंद किया जाएगा. इस मिशन में डॉकिंग और अनडॉकिंग अहम होगी. इसका परीक्षण भारत पहले ही कर चुका है.

मिशन के लिए सरकार ने 2104.06 करोड़ रुपये खर्च की मंजूरी दी है. इसमें अंतरिक्षयान का विकास, दो LVM3 प्रक्षेपण, गहरे अंतरिक्ष में संचार सहायता और परीक्षण शामिल हैं. इसके बाद भारत चांद पर मानव मिशन लॉन्च करने की भी योजना पर काम कर रहा है. इसके लिए 2050 की टाइमलाइन तय की गई है. (तस्वीर में चंद्रयान-3 की लैंडिंग साइट है)

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