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Gudolav Lake Ajmer Singhada Cultivation: अजमेर के किशनगढ़ स्थित गुदोलाव झील में गंदे पानी और मछलियों के प्रकोप के कारण बीते 15-20 सालों से सिंघाड़े की प्रसिद्ध खेती पूरी तरह बंद है. कभी स्वाद और गुणवत्ता के लिए जानी जाने वाली यह खेती कई परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन थी. लगातार घाटे और दूषित पानी के चलते किसानों ने दूरी बना ली है, जिससे अब किशनगढ़ में केकड़ी और मसूदा से सिंघाड़े मंगाने पड़ रहे हैं. स्थानीय लोग पानी की गुणवत्ता सुधारकर झील में दोबारा खेती शुरू कराने की मांग कर रहे हैं.
अजमेर: राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित किशनगढ़ की गुदोलाव झील कभी अपनी समृद्ध सिंघाड़े की खेती के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध हुआ करती थी. इस झील में उपजने वाले सिंघाड़े अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और अनूठे स्वाद के लिए विशेष पहचान रखते थे. यहां पैदा होने वाले सिंघाड़ों की आपूर्ति केवल किशनगढ़ और अजमेर तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि राजस्थान के कई प्रमुख जिलों के बाजारों में भी हुआ करती थी. यह झील सैकड़ों स्थानीय परिवारों और किसानों की आजीविका का मुख्य आधार थी, जिससे उन्हें नियमित रोजगार और आर्थिक संबल मिलता था.
समय के बदलाव के साथ झील की स्थिति बिगड़ती चली गई और करीब 15 से 20 साल पहले यहां सिंघाड़े की खेती पूरी तरह बंद हो गई. झील में सिंघाड़े की खेती करने वाली स्थानीय निवासी कौशल्या बताती हैं कि लगभग 17 साल पहले उन्होंने करीब चार लाख रुपये की भारी लागत लगाकर सिंघाड़े के पौधे रोपे थे. लेकिन झील में मौजूद मछलियों ने फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक घाटा सहना पड़ा. झील के लगातार दूषित होते पानी और बार-बार होने वाले नुकसान की वजह से स्थानीय किसानों ने धीरे-धीरे इस पारंपरिक खेती से पूरी तरह दूरी बना ली.
स्थानीय रोजगार पर पड़ा बुरा असर, अब दूसरे क्षेत्रों पर निर्भरता
स्थानीय निवासी मीरा के अनुसार, गुदोलाव झील में खेती बंद होने से कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. अब स्थानीय किसानों को मजबूरी में दूसरे क्षेत्रों में जमीन किराए पर लेकर खेती करनी पड़ रही है, जिससे उनकी उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है. इसके अलावा, किशनगढ़ के स्थानीय बाजारों में सिंघाड़े की आपूर्ति बनाए रखने के लिए अब केकड़ी और मसूदा जैसे बाहरी क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता है. जिस झील से कभी लोगों को घर बैठे रोजगार और बेहतरीन पैदावार मिलती थी, वह आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है.
झील के पुनरुद्धार और पानी की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत
स्थानीय निवासियों और किसानों का मानना है कि यदि प्रशासन द्वारा झील के गंदे पानी के उपचार और बेहतर जल निकासी की व्यवस्था की जाए, तो यहां एक बार फिर सिंघाड़े की खेती शुरू की जा सकती है. दूषित पानी की समस्या का समाधान होने से न केवल पर्यावरण में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय लोगों को फिर से रोजगार के साधन भी मिल सकेंगे. जिस गुदोलाव झील की मिसाल कभी मिठास और खुशहाली के लिए दी जाती थी, उसे आज सरकारी उपेक्षा से निकालकर दोबारा जीवित करने की सख्त दरकार है.