PHOTOS: इंतजार की घड़ियां खत्म! महेश्वर में फिर शुरू हुआ लाइट एंड साउंड शो, जानें पूरी डिटेल

PHOTOS: इंतजार की घड़ियां खत्म! महेश्वर में फिर शुरू हुआ लाइट एंड साउंड शो, जानें पूरी डिटेल


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Khargone News: महेश्वर में ऐतिहासिक किले की दीवारों पर एक बार फिर रोशनी और संगीत के जरिए इतिहास जीवंत हो उठा है. कई महीनों से बंद पड़ा लाइट एंड साउंड शो ट्रायल के बाद शुक्रवार से फिर शुरू हो गया है. करीब 30 मिनट के इस शो में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की गौरवगाथा, प्राचीन माहिष्मती का इतिहास और मां नर्मदा व भगवान शिव से जुड़े प्रसंग दिखाए जाते हैं.

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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के पर्यटन स्थल महेश्वर में पर्यटकों का इंतजार खत्म हो गया है. यहां ऐतिहासिक किले की दीवारों पर दिखाया जाने वाला प्रसिद्ध लाइट एंड साउंड शो फिर शुरू हो गया है. कई महीनों से बंद इस शो का ट्रायल पूरा होने के बाद शुक्रवार से इसे पर्यटकों के लिए शुरू कर दिया गया. बारिश के मौसम में सावधानी के चलते इसे बंद रखा गया था.

नर्मदा नदी के किनारे स्थित अहिल्या घाट पर शाम होते ही एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है. अंधेरे में किले की ऐतिहासिक प्राचीर पर जब लेजर लाइट और 3D प्रोजेक्शन के जरिए तस्वीरें उभरती हैं, तो इतिहास जीवंत नजर आने लगता है. संगीत और दमदार आवाज के साथ चलने वाला यह शो महेश्वर की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है.

महेश्वर के लाइट एंड साउंड शो में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के जीवन और उनके सुशासन की कहानी दिखाई जाती है. इसमें उनकी न्यायप्रियता, जनकल्याण के कार्यों और अटूट शिवभक्ति को खास अंदाज में प्रस्तुत किया गया है. किले की दीवारों पर उभरते दृश्य पर्यटकों को अहिल्याबाई के ऐतिहासिक योगदान से रूबरू कराते हैं.

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महेश्वर जिसका प्राचीन नाम माहिष्मती था. शो में इस ऐतिहासिक नगरी की स्थापना से जुड़ी गाथाओं और हैहय वंश के प्रतापी राजा कार्तवीर्य सहस्त्रार्जुन के इतिहास को भी दिखाया जाता है. सहस्त्रार्जुन और रावण के युद्ध का प्रसंग भी इसमें शामिल है. इस तरह पर्यटकों को मनोरंजन के साथ महेश्वर की ऐतिहासिक विरासत जानने का मौका मिलता है.

महेश्वर की पहचान मां नर्मदा और भगवान शिव से गहराई से जुड़ी है. यही वजह है कि लाइट एंड साउंड शो में इनसे संबंधित पौराणिक गाथाओं को भी शामिल किया गया है. नर्मदा के पावन तट पर रोशनी और संगीत के बीच इन प्रसंगों को देखना पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए खास अनुभव बन जाता है.

महेश्वर का नाम आते ही यहां की प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियों का जिक्र जरूर होता है. इस शो में पारंपरिक महेश्वरी साड़ी उद्योग की गौरवगाथा को भी प्रदर्शित किया जाता है. इससे पर्यटकों को पता चलता है कि महेश्वर की पहचान केवल ऐतिहासिक किले और नर्मदा घाट तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प भी इसकी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं.

महेश्वर में पर्यटन को बढ़ावा देने और शाम के समय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस प्रोजेक्ट को तैयार किया गया है. पर्यटन विभाग ने इसके निर्माण पर 6.32 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. शो में 3D प्रोजेक्शन मैपिंग, मूविंग हेड लाइट, लेजर बीम और हाई-पावर साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है. इन तकनीकों के जरिए किले की दीवारों पर इतिहास की तस्वीरें जीवंत होती दिखाई देती हैं.

करीब 30 मिनट का यह शो रोजाना शाम की नर्मदा आरती के बाद दिखाया जाता है. इसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रस्तुत किया जाता है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इसकी कहानी आसानी से समझ सकें. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे देखने के लिए किसी तरह का टिकट नहीं लेना पड़ता. पर्यटक इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रस्तुति का निशुल्क आनंद ले सकते हैं.

महेश्वर में लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत पिछले वर्ष 22 नवंबर को निमाड़ उत्सव के दौरान हुई थी. बारिश के समय इसे बंद कर दिया गया था, लेकिन अब दोबारा शुरू होने से पर्यटक शाम के समय भी यहां रुककर इतिहास और संस्कृति का अनुभव कर सकेंगे.



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