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देसी घी खरीदते समय उसकी शुद्धता को लेकर उलझन है? जानिए 3 आसान तरीके, जिनसे घी में मिलावट के संकेत पहचानने में मदद मिल सकती है. हालांकि, पूरी पुष्टि के लिए लैब टेस्ट जरूरी है.
भारतीय रसोई में देसी घी का इस्तेमाल दाल, रोटी, पराठे और कई तरह के पकवानों का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है. लेकिन बाजार में घी खरीदते समय उसकी शुद्धता को लेकर सवाल भी उठते हैं. कई बार घी में सस्ते वनस्पति तेल, वनस्पति घी या स्टार्च जैसी चीजों की मिलावट की आशंका रहती है. ऐसे में सिर्फ घी का रंग देखकर उसकी शुद्धता का फैसला करना सही नहीं है. कुछ आसान जांच से मिलावट के संकेत मिल सकते हैं. हालांकि, ध्यान रखें कि घरेलू टेस्ट हर तरह की मिलावट की पुष्टि नहीं कर सकते.
घी की क्वालिटी को समझने के लिए सबसे पहले उसकी खुशबू और पिघलने के बाद का रूप देखें. एक साफ पैन में थोड़ा सा घी गर्म करें. सामान्य घी गर्म होने पर पिघलकर साफ तरल बन जाता है और उसमें दूध से बनी चर्बी जैसी खास खुशबू आ सकती है. अगर उसमें असामान्य, बासी या बेकार गंध आती है, तो उसकी गुणवत्ता पर संदेह हो सकता है. हालांकि, खुशबू और रंग घी के प्रकार, बनाने की प्रक्रिया और स्टोरेज के हिसाब से भी बदल सकते हैं. इसलिए यह तरीका केवल शुरुआती संकेत देता है, शुद्धता का पक्का प्रमाण नहीं है.
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मुताबिक, घी में आलू, शकरकंद या दूसरे स्टार्च वाले पदार्थों की मिलावट का पता लगाने के लिए आयोडीन टेस्ट किया जा सकता है. इसके लिए एक छोटी कटोरी में थोड़ा घी लें और उसमें आयोडीन घोल की कुछ बूंदें डालें.
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अगर नमूने का रंग नीला या नीला-काला हो जाता है, तो उसमें स्टार्च मौजूद होने का संकेत मिल सकता है. सामान्य स्थिति में ऐसा रंग परिवर्तन नहीं होना चाहिए. इस टेस्ट की एक सीमा भी है. इससे वनस्पति तेल या वनस्पति घी जैसी दूसरी मिलावट का पता नहीं चलता. आयोडीन घोल को खाने से बचें और जांच के लिए इस्तेमाल किए गए घी को इस्तेमाल न करें.
घी खरीदते समय पैकेट पर लिखी सामग्री, निर्माता का नाम, बैच नंबर, निर्माण और इस्तेमाल की अंतिम तारीख के साथ FSSAI लाइसेंस की जानकारी भी देखें. बहुत कम कीमत देखकर तुरंत खरीदारी न करें. पैकेट की सील टूटी हो या जानकारी अधूरी हो, तो उसे खरीदने से बचें. खुले घी की खरीदारी करते समय विक्रेता और उत्पाद की विश्वसनीयता पर ध्यान दें.
घी का रंग, खुशबू या जमने का तरीका देखकर उसकी पूरी शुद्धता साबित नहीं की जा सकती. वनस्पति तेल या दूसरी वसा की मिलावट पकड़ने के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराना ज्यादा भरोसेमंद तरीका है. अगर घी में मिलावट का संदेह हो, तो उसका इस्तेमाल रोकें और खाद्य सुरक्षा विभाग से संपर्क करें.