Israel wants alliance with India: भारत में फ्यूचर देख रहा अमेरिका के जिगर का छल्ला खूब निभाई यारी अब सता रहा कैसा डर?

Israel wants alliance with India: भारत में फ्यूचर देख रहा अमेरिका के जिगर का छल्ला खूब निभाई यारी अब सता रहा कैसा डर?


Agency:एजेंसियां

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Israel wants Close Alliance with India: जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुबारा सत्ता में आए हैं, इजरायली पीएम के साथ उनकी दोस्ती के किस्से खूब छपे. बावजूद इसके अब इजरायल क्यों चाह रहा है कि उसके रिश्ते भारत से और बेहतर हों.

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भारत की ओर क्यों देख रहा अमेरिका का जिगरी.

Israel wants Close Alliance with India: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भविष्य की अमेरिकी राजनीति को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने आशंका जाहिर की है कि आने वाले समय में अमेरिका का कोई राष्ट्रपति इजरायल के प्रति विरोधी रुख अपना सकता है. ऐसे में इजरायल को अपनी सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत करने के लिए नए सहयोगियों की तलाश करनी चाहिए. इस रणनीति में भारत और लैटिन अमेरिका के देशों को अहम माना जा रहा है.

नेतन्याहू ने 18 अक्टूबर को एक कार्यक्रम में अपनी सुरक्षा नीति पेश करते हुए यह बात कही. यह बयान इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से महज 9 दिन पहले आया है. उनके संदेश का मुख्य जोर इस बात पर था कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर न रहे, बल्कि भारत जैसे देशों से अपने रिश्ते मजबूत बनाए.

अमेरिका से क्यों हो रहा है मोहभंग?

  1. अमेरिका लंबे समय से इजरायल का प्रमुख रणनीतिक सहयोगी रहा है. सैन्य सहायता से लेकर कूटनीतिक समर्थन तक, दोनों देशों के रिश्ते पश्चिम एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
  2. हालांकि अमेरिकी राजनीति में नेतृत्व बदलने के साथ इजरायल के प्रति नीतियों में भी बदलाव की संभावना बनी रहती है. नेतन्याहू की टिप्पणी इसी आशंका को सामने लाने वाली है.
  3. उनका मानना है कि भविष्य में अगर वाशिंगटन का रुख बदलता है, तो इजरायल के पास दूसरे देशों के साथ मजबूत संबंधों का विकल्प होना चाहिए. उनका ये बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप अब चुनाव नहीं लड़ सकते और उन्हें डर ये है कि रिपब्लिकन पार्टी का जो भी राष्ट्रपति होगा, वो शायद ही उनका पक्ष ले.

भारत से करीबी क्यों है अहम?

भारत और इजरायल के बीच रक्षा, तकनीक, कृषि, साइबर सुरक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है. दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध भी महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में भारत के साथ साझेदारी इजरायल को एशिया में अपना प्रभाव मजबूत करने का अवसर दे सकती है. भारत की अहमियत केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है. दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में उसकी भूमिका और पश्चिम एशिया के अलग-अलग देशों के साथ उसके संबंध उसे कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं.

लैटिन अमेरिका पर भी नजर

नेतन्याहू ने लैटिन अमेरिकी देशों के साथ संबंध मजबूत करने की जरूरत भी बताई. इस क्षेत्र में नए राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक साझेदार बनाकर इजरायल अपने अंतरराष्ट्रीय समर्थन का दायरा बढ़ाना चाहता है. नेतन्याहू का बयान इस संकेत के रूप में देखा जा सकता है कि इजरायल अपनी  सुरक्षा रणनीति में सहयोगियों का दायरा बढ़ाना चाहता है.



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