फिल्म हनुमान अंश के राधेश्याम अमेठी की रामलीला में निभा रहे लक्ष्मण का किरदार, गौतम त्रिपाठी ने बताये इससे पहले के संघर्ष के दिन

फिल्म हनुमान अंश के राधेश्याम अमेठी की रामलीला में निभा रहे लक्ष्मण का किरदार, गौतम त्रिपाठी ने बताये इससे पहले के संघर्ष के दिन


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Amethi Ramlila: बाबा नीम करौली पर आधारित फिल्म हनुमान अंश में अहम भूमिका निभाने वाले प्रयागराज के गौतम त्रिपाठी अमेठी की रामलीला में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे हैं. अमेठी आए गौतम त्रिपाठी ने बताया की उनका जीवन काफी संघर्षों भरा है सफलता के पहले उनके जीवन में कई चुनौतियां आई हैं. बहुत कुछ उनके जीवन से छिन गया वह मायूस हो गए एकदम टूट गए कि उन्होंने इस विषम परिस्थिति में प्रभु की शरण में अपने आप को समर्पित कर दिया और प्रभु ने ही उनका नया रास्ता दिखाया.

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अमेठी: बाबा नीम करौली पर आधारित हनुमान अंश मूवी में किरदार निभाने वाले कलाकार की अहम भूमिका में गौतम त्रिपाठी नजर आए. जिनकी कहानी काफी संघर्ष भरी है गौतम त्रिपाठी अमेठी की रामलीला में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे हैं. अमेठी आए गौतम त्रिपाठी ने बताया की उनका जीवन काफी संघर्षों भरा है सफलता के पहले उनके जीवन में कई चुनौतियां आई हैं. बहुत कुछ उनके जीवन से छिन गया वह मायूस हो गए एकदम टूट गए कि उन्होंने इस विषम परिस्थिति में प्रभु की शरण में अपने आप को समर्पित कर दिया और प्रभु ने ही उनका नया रास्ता दिखाया. हम इनसे ही बात करने की कोशिश करूंगे कि फिल्म से लेकर और इस पूरे सफर का पूरा अनुभव किस तरीके से रहा.

प्रयागराज के रहने वाले हैं गौतम त्रिपाठी

गौतम त्रिपाठी मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले हैं. भाइयों और मां के साथ पूरा जीवन सामान्य है और बहुत ही साधारण परिवार से वे ताल्लुक रखते हैं. लोकल 18 से खास बातचीत में हनुमान अंश फिल्म में राधेश्याम का किरदार निभाने वालें गौतम त्रिपाठी ने कहा कि रामलीला से जुड़ाव मेरा 5 से 6 वर्षों से रहा है. प्रयागराज में भी रामलीला करता हूं. जो आपके अमेठी के रामलीला के निर्देशक हैं अक्षत कुशवाहा जी और वो हम लोगों के साथ ही थिएटर किया करते थे. उन्होंने बुलाया तो आना पड़ा. जिनके साथ आपने बारीकियाँ सीखी हैं, जब उनका बुलावा आता है तो इंसान मना नहीं कर पाता.

राम की कथा कहना और कथा में शामिल होने से गर्व की अनुभूति

हर बार हर वर्ष जब भी रामलीला करने का सौभाग्य मिलता है. अच्छा ही लगता है, प्रभु राम की कृपा है और रामलीला करने में बहुत आनंद आता है. अभी मैंने प्रयागराज में विष्णु जी का किरदार किया, ये उनका सौभाग्य है और इस वर्ष अमेठी की रामलीला में लक्ष्मण का किरदार करने का मौका मिला है तो बहुत अच्छा लग रहा है. राम की कथा से जुड़ना और राम की कथा कहना एक गर्व की अनुभूति होती है.

उन्होंने कहा कि रही फिल्म की बात तो फिल्म में टीम तो नहीं बनाई क्योंकि एक एक्टर की जर्नी होती है. पिछले दस सालों से थिएटर कर रहा हूं और बहुत सारे फिल्म के ऑडिशन दिए थे. जब वह बॉम्बे में थे तो एक मेरे दोस्त ने मुझे ऑडिशन भेजा और मैं सेलेक्ट हो गया. उसके बाद फिर मुंबई से प्रयागराज आया, फिर प्रयागराज से इस फिल्म की पूरी शूटिंग चित्रकूट में हुई थी. 22 से 24 दिन में प्रयागराज से चित्रकूट शूट पर अप-डाउन करता था क्योंकि इस फिल्म का कोई बजट नहीं था और आप सब प्रभु की कृपा है और उन्होंने ही पूरा रास्ता दिखाया.

शुरू में पूरी टीम हुई थी मायूस लेकिन सब बेहतर होता चला गया

उन्होंने कहा कि शुरू में दो हफ्ते हमारी फिल्म तो चल ही नहीं रही थी तो हमारे प्रोड्यूसर बहुत मायूस हो गए थे, क्योंकि हमारी फिल्म के प्रोड्यूसर कोई बहुत बड़े पैसे वाले नहीं थे. उन्होंने अपनी सारी सेविंग्स लगाई थी और जो इस फिल्म के डायरेक्टर हैं डॉक्टर विशाल चतुर्वेदी जी उन्होंने दस साल रिसर्च किया, ‘Divine Doon’ नाम की किताब लिखी उसके बाद जाके फिल्म बनाई.

सफलता से पहले मेरे पिता की मृत्यु हो गई. जिस गुरु के मार्गदर्शन में काम किया उनकी भी है मृत्यु हो गई. चुनौतियों की बात करूँ तो पिछले सात-आठ महीने बहुत ही चुनौतीपूर्ण गुजरे हैं. हनुमान अंश आने से पहले मैंने अपने जीवन में बहुत कुछ खो दिया है. प्रयागराज का समयांतर थियेटर ग्रुप जो हमारे मार्गदर्शक थे राकेश वर्मा जी मैंने उनको खो दिया तीन-चार महीनों में बहुत डिप्रेशन में था, ऐसा लग रहा था मैंने ये भी मान लिया था कि मैं इस फिल्म और करियर को छोड़ दूँगा। कहा जाता है ना कि जब आप खुद से प्रयास करते हो तो चीजें होती नहीं हैं, जब आप ईश्वर के सामने सरेंडर कर देते हो… तो मैंने सोचा था कि मैं कुछ नहीं करूँगा, मैंने भगवान के सामने माथा टेक दिया था। शायद जो इस फिल्म का गाना है कि ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डाल दी’ तो शायद हनुमान जी को मुझे यहाँ तक पहुँचाना था तो उन्होंने मेरी नैया पकड़ी और बस उन्हीं के सहारे चल रहा हूं.



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