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Sleeping Competition: कभी आपने सोचा है कि अगर सोते-सोते ही आपके अकाउंट में लाखों रुपये आ जाएं तो कैसा हो? लोगों का ऐसा ही मौका दिया जा रहा है, जहां उन्हें जमकर आराम करना है और बदले में हो जाएगी एक झटके में लाखों की कमाई.
सोने का हुआ कॉम्पटीशन, प्राइज लाखों में.
Japan Sleeping Competition: अब तक आप यही जानते होंगे कि जितनी मेहनत करोगे, उतना पैसा कमा पाओगे लेकिन कभी-कभी ऐसा मौका भी आता है, जब पड़े-पड़े सोने के भी पैसे मिलते हैं. ऐसा हुआ है जापान में, जहां लोग अपनी मेहनत और व्यस्त दिनचर्या के लिए जाने जाते है. यहां अब अच्छी नींद लेना भी एक प्रतियोगिता का हिस्सा बन गया है. देश में लोगों की नींद की कमी को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से टोक्यो में एक अनोखी प्रतियोगिता आयोजित की गई. इसमें प्रतिभागियों के सामने सबसे जल्दी और गहरी नींद सोने की चुनौती थी.
इस प्रतियोगिता को जीतने वाले को 20 लाख येन से अधिक यानी करीब 14 हजार डॉलर का इनाम दिया गया. इस प्रतियोगिता का नाम ‘मैट रेस’ रखा गया. इसका आयोजन एक गद्दा बनाने वाली कंपनी ने किया था. दिलचस्प ये रहा कि इस सोने की दौड़ में दर्जनों लोगों ने हिस्सा लिया. सभी प्रतिभागियों को आरामदायक गद्दे दिए गए और उनके शरीर पर नींद की निगरानी करने वाले उपकरण लगाए गए. अब वे प्रतियोगिता जीतें या हारें मजे से सोने को तो मिला ही.
कैसे तय हुआ विनर?
प्रतियोगिता में शामिल हुए सभी प्रतिभागियों को अधिकतम 90 मिनट तक सोने का मौका मिला. शर्त ये थी कि उन्हें लगातार सोना था. कम रोशनी वाले कमरे में प्रतिभागी बिस्तरों पर लेटे नजर आए. कुछ लोग अपने साथ खिलौने लेकर सोए, जबकि अन्य ने नींद पूरी करने के लिए आरामदायक माहौल का सहारा लिया. प्रतियोगिता में जीत का फैसला इस आधार पर किया गया कि कौन कितनी जल्दी सोया और किसकी नींद सबसे अच्छी रही. इसकी विजेता सुइमी ने बताया कि वह अपने अलग घर में रहना चाहती हैं. इसलिए वह इनामी राशि का इस्तेमाल घर बदलने के खर्च के लिए करेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि वह राजकुमारी जैसे शानदार बिस्तर खरीदना चाहती हैं.
नींद की कमी से जूझ रहा है जापान
प्रतियोगिता की योजना बनाने वाले क्रिएटिव डायरेक्टर रिइचिरो नाकामा ने कहा कि जापान को अक्सर ऐसे देश के रूप में देखा जाता है, जहां लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते. यहां लोग अपने काम के प्रति बेहद समर्पित रहते हैं लेकिन इसका असर उनकी नींद पर भी पड़ता है. आयोजकों का मानना है कि नींद को प्रतियोगिता का रूप देने से लोगों की इसमें दिलचस्पी बढ़ेगी और वे पर्याप्त आराम के महत्व को समझेंगे. ओईसीडी के 2021 के आंकड़ों के मुताबिक जापान में लोग औसतन प्रतिदिन सात घंटे 24 मिनट सोते थे. लंबे काम के घंटे, आने-जाने में लगने वाला समय और देर रात तक चलने वाली गतिविधियां इसके प्रमुख कारणों में गिनी जाती हैं. ऐसे में इस तरह के आयोजन उनकी नींद को प्राथमिकता देने वाले हैं.