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Jodhpur Lohawat Borewell Incident Public Opinion: राजस्थान के लोहावट में बोरवेल हादसे के बाद जोधपुर की जनता ने खुले बोरवेल पर रोक लगाने और सख्त कानून बनाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि प्रशासन को लापरवाही करने वालों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए.
जोधपुर: राजस्थान में लगातार सामने आ रहे बोरवेल हादसे मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं. दौसा के बाद अब लोहावट की घटना ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर खुले बोरवेल पर रोक कब लगेगी और इन हादसों की जिम्मेदारी किसकी है? इन्हीं सवालों को लेकर जोधपुर की जनता से बात की और जाना कि इस मुद्दे पर लोगों की क्या राय है और वे सरकार से क्या मांग कर रहे हैं.
अनिल जिंदल का कहना है कि ऐसे हादसों को रोकने की पहली जिम्मेदारी प्रशासन की है. आम जनता को जागरूक करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ सरकार को भी सख्त कदम उठाने चाहिए. बोरवेल की खुदाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए और काम पूरा होने के बाद उसे सही तरीके से बंद किया जाना चाहिए. खुले बोरवेल में खेलते हुए बच्चे के गिरने से पूरा परिवार जिंदगी भर के दर्द से गुजरता है. ऐसे में सरकार को कड़ा कानून बनाकर लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके.
लापरवाही करने वालों की तय हो जिम्मेदारी
कन्यालाल ने कहा कि खुले और अधूरे पड़े बोरवेल को लेकर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए. पहले भी सर्वे और रजिस्ट्रेशन जैसी कार्रवाई की गई, लेकिन इसके बावजूद कई जगह बोरवेल खुले पड़े हैं. प्रशासन को दोबारा सर्वे करवाकर ऐसे बोरवेल की पहचान करनी चाहिए. जो लोग सुरक्षा के इंतजाम नहीं करते, उनके खिलाफ जुर्माना लगाने के साथ जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए. बोरवेल की खुदाई के बाद उसकी सुरक्षा और बाड़बंदी सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि किसी मासूम की जान खतरे में नहीं पड़े.
सरकार को हर जगह करवाना चाहिए सर्वे
सुनील का कहना है कि बोरवेल हादसों को रोकने के लिए सरकार और प्रशासन को नियमित निगरानी करनी चाहिए. कई जगह लापरवाही के कारण बच्चे खुले बोरवेल में गिर जाते हैं. ऐसे में जरूरी है कि पूरे क्षेत्र में सर्वे करवाया जाए और जहां भी खुले बोरवेल मिलें, उन्हें सुरक्षित किया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बोरवेल की खुदाई के बाद तत्काल ढक्कन लगाया जाए और सुरक्षा के इंतजाम पूरे होने के बाद ही संबंधित काम को पूरा माना जाए. इससे बच्चों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है.
रेस्क्यू के साथ संसाधनों और रोकथाम पर भी हो ध्यान
अभिषेक ने कहा कि बोरवेल हादसे के बाद बच्चों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ता है, जिसमें काफी समय, संसाधन और धन खर्च होता है. सरकार को बचाव कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने के साथ हादसों की रोकथाम पर भी ध्यान देना चाहिए. खुले बोरवेल की समय-समय पर जांच होनी चाहिए और लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए, जिसमें बोरवेल की खुदाई से लेकर उसे सुरक्षित तरीके से बंद करने तक हर स्तर पर निगरानी हो, ताकि किसी भी परिवार को अपने बच्चे की जान खतरे में पड़ने का दर्द न झेलना पड़े.
हादसे के बाद नहीं, पहले हो कार्रवाई
जोधपुर की जनता की राय में खुले बोरवेल से होने वाले हादसों को रोकने के लिए सख्त नियम, नियमित सर्वे, जिम्मेदारी तय करने और प्रभावी निगरानी की जरूरत है. लोगों का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए जान बचाना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा अहम है कि ऐसे हादसे होने ही न दिए जाएं. अब सवाल यही है कि लोहावट की घटना से सबक लेकर जिम्मेदार एजेंसियां खुले बोरवेल को सुरक्षित करने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई करती हैं.