CM Foreign Tour: पंजाब के सीएम भगवंत मान की विदेश यात्रा पर विवादों का साया पड़ गया. उन्होंने केंद्र सरकार पर अड़ंगा डालने का आरोप लगाया. पंजाब की अदालत ने मान की तरफ से याचिका स्वीकार की और फिर हाई कोर्ट की तरफ से उन्हें हरी झंडी भी मिल गई. अदालत ने फ्रांस के लिए मान के प्रस्तावित दौरे को राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार करने वाले केंद्र के फैसले को रद्द कर दिया है. किसी भी अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के विदेश दौरों को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी रूप ले चुका है. विदेश मंत्रालय की तरफ से कई प्रस्तावित विदेश यात्राओं की राजनीतिक मंजूरी रोके जाने के बाद, पंजाब सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया.
हालांकि इस विवाद ने कई सवाल भी पैदा किया है. किसी भी सीएम के लिए विदेश जाने के लिए क्या नियम कानून होता है? क्या सभी को विदेश मंत्रालय से मंजूरी की जरूरत पड़ती है. भारत देश के सभी मुख्यमंत्रियों को किसी भी विदेश यात्रा के लिए केंद्र सरकार से पहले से राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है. अब वो चाहे आधिकारिक हो या फिर प्राइवेट. यह प्रक्रिया कैबिनेट सचिवालय के लंबे समय से चले आ रहे नियमों के तहत ऑपरेट होती है और विदेश मंत्रालय (MEA) की तरफ से संभाली जाती है.
क्या है पूरी प्रक्रिया?
किसी भी मुख्यमंत्री के लिए विदेश यात्रा पर जाने से पहले कई विभागों से जुड़ी एक तय कानूनी प्रक्रिया से गुजरना जरूरी होता है. सबसे पहले राजनीतिक मंजूरी जरूरी होती है. यह पॉलिटिकल क्लिअरेंस सबसे अहम अनुमति होती है, जो विदेश मंत्रालय यानी MEA की तरफ से दी जाती है. इसके लिए आवेदन MEA के खास ऑनलाइन पोर्टल epolclearance.gov.in पर करना होता है.
इसके बाद नंबर आता है केंद्र को सूचना देने का. किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री को अपनी यात्रा के पूरे प्रोग्राम की जानकारी कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) दोनों को औपचारिक रूप से देनी होती है. यह एक तय जरूरी प्रक्रिया है.
इसके बाद फाइनेंस और रेगुलेटरी मंजूरी भी जरूरी होती है. आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) से मंजूरी लेनी जरूरी है. अगर यात्रा के दौरान किसी ऐसे संगठन से विदेशी मेहमाननवाजी या फिर स्पॉन्सरशिप मिल रहा है, जो संयुक्त राष्ट्र में शामिल नहीं है तो गृह मंत्रालय से FCRA यानी विदेशी रेगुलेशन अधिनियम के तहत अनुमति लेनी जरूरी है.
किन आधारों पर होती है समीक्षा?
राजनीतिक मंजूरी दिए जाने का मुख्य मकसद भारत के विदेश नीति के हितों की रक्षा करना है. नियमों के मुताबिक विदेश मंत्रालय इन बातों पर विचार करके आवेदन की समीक्षा करता है. वो क्या-क्या होती है, आइए समझते हैं.
- डिप्लोमेटिक प्रभाव: यह सुनिश्चित करना कि यात्रा या बैठकें जो होने वाली है, वो जियो पॉलिटिकल मुद्दों पर भारत के आधिकारिक रुख के खिलाफ ना हों.
- प्रोटोकॉल और दर्जा: यह आंकलन करना कि जिस देश या संगठन में दौरा है, वहां मुख्यमंत्री के संवैधानिक दर्जे के मुताबिक मान-सम्मान दिया जा रहा है या फिर नहीं.
- सुरक्षा का पहलू: सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास हाई लेवल की सुरक्षा जैसे Z-प्लस सुरक्षा होती है.
मान के विदेश दौरों की लिस्ट:
पंजाब राज्य सरकार और केंद्र के बीच मौजूदा तनाव की शुरुआत मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनके मंत्रियों के विदेश दौरों पर लगातार रोक लगने से हुई है. इस स्थिति के बाद राज्य सरकार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दखल की गुहार लगानी पड़ी है. इसके कुछ मुख्य उदाहरण नीचे दिए गए हैं.
फ्रांस: मान को इस महीने फ्रांस जाना था. इसमें व्यापार को बढ़ावा देने और प्रवासी भारतीयों से मिलने के कार्यक्रम के लिए मंजूरी नहीं दी गई. विदेश मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल पर बिना किसी ठोस कारण के आवेदन पर सिर्फ ‘DENIED’ लिख दिया गया, जिसके बाद पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की.
नीदरलैंड और चेक रिपल्बिक: फरवरी 2026 में इंडस्ट्रियल निवेश को बढ़ावा देने के लिए तय किया गया दौरा इसलिए रद्द करना पड़ा क्योंकि निर्धारित तारीख तक विदेश मंत्रालय की राजनीतिक मंजूरी नहीं मिल पाई थी.
यूनाइटेड किंगडम और इजराइल: जनवरी 2026 में ‘प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट’ से पहले संभावित इन्वेस्टर्स से मिलने के लिए सीएम मान की अगुवाई में जा रहे 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को विदेश मंत्रालय ने अनुमति देने से मना कर दिया था.
पेरिस ओलंपिक: अगस्त 2024 में केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों Z प्लस सुरक्षा प्राप्त इंसान की विदेश में सिक्योरिटी सिस्टम की जटिलताओं का हवाला देते हुए मान को भारतीय पुरुष हॉकी टीम का मैच देखने फ्रांस जाने की अनुमति नहीं दी थी.