कौन हैं कुमार कुशाग्र? जिन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम इंडिया से आया बुलावा, धोनी से इंस्पायर होकर शुरू की विकेटकीपिंग


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कौन हैं कुमार कुशाग्र? जिन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम इंडिया से आया बुलावा

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Who Is Kumar Kushagra: झारखंड के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के आखिरी दो मैचों के लिए भारतीय टीम में चुन लिया गया है. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 42 से अधिक के औसत से 2,507 रन बनाने वाले कुशाग्र अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं. अंडर-19 विश्व कप, रणजी ट्रॉफी में रिकॉर्डतोड़ पारियों और आईपीएल के सफर से गुजरते हुए उन्होंने भारत ए और घरेलू सर्किट में लगातार शानदार प्रदर्शन कर नेशनल क्रिकेट टीम में अपनी जगह बनाई है.

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कौन हैं कुमार कुशाग्र? जिन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम इंडिया से आया बुलावाZoom

कुमार कुशाग्र को पहली बार टीम इंडिया में शामिल किया गया है.

नई दिल्ली. एक छोटे शहर से निकलकर भारतीय क्रिकेट टीम में पहुंचने वाले युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र की कहानी सिर्फ रनों और शतकों का ब्योरा नहीं है. बल्कि यह अनुशासन, अटूट पारिवारिक समर्थन और कभी हार न मानने वाले जज्बे की एक प्रेरणादायक मिसाल है. झारखंड के इस उभरते हुए सितारे ने महज़ 21 साल की उम्र में जो मुकाम हासिल किया है. उसने भारतीय क्रिकेट गलियारों में नई उम्मीदें जगा दी हैं.

कुमार कुशाग्र (Kumar Kushagra) झारखंड के घरेलू सर्किट से निकलकर आईपीएल के मंच और अब टीम इंडिया के दरवाजे तक का उनका सफर आसान नहीं था. हाल ही में उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली पांच मैचों की वनडे सीरीज के आखिरी दो मुकाबलों के लिए भारतीय वनडे टीम में शामिल किया गया है. यह उनका पहला राष्ट्रीय बुलावा है. जिसने उनके अब तक के करियर को एक नया पंख दे दिया है. 23 अक्टूबर 2004 को जन्मे कुशाग्र ने अब तक अपने करियर में 38 प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं. जिसमें उन्होंने 42 से अधिक के औसत से 2,507 रन बनाए हैं. घरेलू क्रिकेट में उन्हें एक ऐसे जुझारू बल्लेबाज के तौर पर जाना जाता है जो नंबर तीन से लेकर नंबर छह तक किसी भी क्रम पर बल्लेबाजी करने की कूवत रखता है और दबाव के क्षणों में टीम की नैया पार लगाने का हुनर जानता है.

घर की दीवारों पर लगे क्रिकेट शॉट्स के कट-आउट
कुशाग्र की यह कहानी एक ऐसे घर से शुरू होती है जहां क्रिकेट को किसी खेल से ज्यादा एक अनुशासन की तरह देखा जाता था. उनके पिता शशिकांत, जो एक जीएसटी जिला आयुक्त हैं और जिन्होंने खुद कभी क्रिकेट नहीं खेला था. बेटे के सपनों को पंख देने के लिए कोचों की किताबें खरीदकर लाए और दीवारों पर अच्छे शॉट्स के कट आउट चिपका दिए. घर का यह माहौल ही था जिसने कुशाग्र के भीतर क्रिकेट की अलख को जलाए रखा.

मां की सलाह और धोनी से मिली प्रेरणा
उनके जीवन में कई ऐसे पल आए जिन्होंने उनकी मानसिक दृढ़ता को और मजबूत किया. साल 2023 के देवधर ट्रॉफी के दौरान जब उन्होंने एक होटल के कमरे से अपनी मां को वीडियो कॉल किया. तो मां ने उन्हें किसी भी तरह के भटकाव से दूर रहकर सिर्फ और सिर्फ अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने की नसीहत दी. पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से प्रेरित होकर उन्होंने महज 10 साल की उम्र में विकेटकीपिंग शुरू कर दी थी. उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज़ 15 साल की उम्र में वह साल 2020 के अंडर-19 विश्व कप के लिए चुनी गई भारतीय टीम के सबसे युवा सदस्य थे.

रणजी में रिकॉर्डतोड़ दोहरा शतक और पहचान
क्रिकेट जगत ने पहली बार उनकी असली क्षमता को साल 2022 में देखा. जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी के प्री-क्वार्टरफाइनल मुकाबले में नागालैंड के खिलाफ 266 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली. सत्रह साल और 141 दिन की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 250 से अधिक रन बनाने वाले वह दुनिया के सबसे युवा बल्लेबाज बने. इसके बाद 2023 की देवधर ट्रॉफी में उन्होंने निचले क्रम यानी नंबर सात पर बल्लेबाजी करते हुए 56.75 की औसत से 227 रन बनाए और चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा.

आईपीएल का भारी-भरकम कॉन्ट्रैक्ट और असफलता से सीख
इस शानदार प्रदर्शन के बाद दुनिया की सबसे बड़ी टी-20 लीग यानी आईपीएल का दरवाजा भी उनके लिए खुला. साल 2024 की नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स ने उनके लिए उनके बेस प्राइस से 36 गुना ज्यादा यानी 7.2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बोली लगाई. हालांकि, वह उस सीजन में चार मुकाबलों में केवल तीन ही रन बना सके और फ्रेंचाइजी ने उन्हें रिलीज कर दिया. लेकिन एक सच्चे खिलाड़ी की पहचान असफलता से घबराने में नहीं, बल्कि वापसी करने में होती है. गुजरात टाइटंस ने साल 2025 में उन्हें 65 लाख रुपये में अपनी टीम से जोड़ा और साल 2026 के लिए भी उन्हें रिटेन किया. आखिरकार, 4 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में उन्हें गुजरात के लिए पदार्पण करने का मौका मिला.

सैयद मुश्ताक अली और दलीप ट्रॉफी में रनों की बौछार
उनका हालिया प्रदर्शन इस बात की गवाही देता है कि वह किसी भी झटके से उबरकर और मजबूत होकर लौटे हैं. घरेलू सत्र 2025-26 में उन्होंने दस मैचों में 422 रन बनाए और झारखंड को पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई. इस टूर्नामेंट के फाइनल में उन्होंने महज 38 गेंदों पर 81 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली थी. इसके अलावा रणजी ट्रॉफी में बड़ौदा के खिलाफ 234 रनों की मैराथन पारी खेलते हुए उन्होंने पूरे सीजन में 47.66 की औसत से कुल 572 रन बनाए.

भारत ए के लिए शतक और टीम इंडिया का बुलावा
सितंबर के महीने में उनका बल्ला एक बार फिर पूरी खामोशी को चीरते हुए गरजा. जब उन्होंने दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन के लिए खेलते हुए एक शानदार शतक जड़ा. इसके बाद पुदुचेरी में ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ भारत ए का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने 113 रनों की दमदार पारी खेली. जिसने चयनकर्ताओं के लिए उनके नाम को नजरअंदाज करना नामुमकिन बना दिया.



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