जयपुर. राजस्थान के जयपुर जिले के जोबनेर कस्बे के पास स्थित गोकुलपुरा (कालख) गांव के कमलेश कुमावत की कहानी संघर्ष, मेहनत और पारिवारिक सहयोग की मिसाल है. सीमित संसाधनों, पिता की बीमारी, आर्थिक तंगी और कोरोना महामारी जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए कमलेश ने अपने बड़े भाई अशोक कुमावत के मार्गदर्शन में कोल्ड स्टोरेज निर्माण के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई. कमलेश का जन्म 30 जुलाई 1997 को एक साधारण परिवार में हुआ. पिता सुवालाल कुमावत की छह संतानों में वे सबसे छोटे थे. उन्होंने वर्ष 2008 तक गांव के सरकारी विद्यालय में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद एक निजी विद्यालय ने फीस में विशेष छूट दी, जिससे उनकी आगे की पढ़ाई जारी रह सकी.
आईटीआई के साथ शुरू किया व्यवसाय
विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कमलेश ने हार नहीं मानी. वर्ष 2015 में आईटीआई में दाखिला लिया और 2017 में प्रशिक्षण पूरा किया. इसी दौरान बड़े भाई अशोक कुमावत के सहयोग से कूलिंग सॉल्यूशंस के व्यवसाय की नींव रखी गई. पढ़ाई पूरी करने के बाद कमलेश ने भाई के साथ मिलकर कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत शुरू कर दी. वर्ष 2018 में दोस्तों के साथ व्यवसाय को ऑनलाइन ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली. इसके बाद दोनों भाइयों ने रणनीति बदली और वर्ष 2018 के अंत में कोल्ड स्टोरेज निर्माण के क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया.
कोरोना महामारी ने बढ़ाई मुश्किलें
मेहनत से बनाई अलग पहचान
लगातार मेहनत, बेहतर रणनीति और आपसी विश्वास के दम पर आज कंपनी सालाना 5 करोड रुपए का टर्नओवर और कर रही है. दोनों भाइयों ने कारोबार को आगे बढ़ाया. आज कमलेश कुमावत कोल्ड स्टोरेज निर्माण के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके हैं. उनकी सफलता के पीछे बड़े भाई अशोक का मार्गदर्शन और दोनों का समर्पण अहम रहा है. कमलेश का सफर बताता है कि मुश्किल परिस्थितियां सफलता की राह रोक नहीं सकती. परिवार का साथ, सही दिशा और लगातार मेहनत हो तो सीमित संसाधनों से भी नई शुरुआत कर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है.